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संवैधानिक शक्तियों के बावजूद आदिवासी समाज कहां तक पहुंचा, ये चिंतनीय विषय : हेमंत सोरेन

Ranchi  :  9 अगस्त को दुनियाभर में विश्व आदिवासी दिवस मनाया जा रहा है. राज्यवासियों के नाम संदेश में मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन ने इस अवसर पर देश और विदेश में बसे सभी आदिवासी भाई-बहनों को बधाई देते हुए जोहार कहा है. इसके साथ ही सीएम ने संघर्ष की मूर्ति के रूप में आदिवासी समाज के पुरखों को भी नमन किया है. हेमंत सोरेन ने इस दिन को समाज के कल्याणार्थ संकल्प दिवस के रूप में मानने पर जोर दिया है.

साथ ही कहा है कि आज का दिन आदिवासी समाज के लिए अंकित और संकल्प लेने का दिन है. हमें यह सोचना होगा कि आजादी के बाद के लंबे सफर में आदिवासी समाज कहां तक पहुंचा है. आदिवासी समाज के कल्याण के लिए संविधान में प्रदत शक्तियों के बावजूद आदिवासी समाज कहां तक पहुंचा. हमारे लिए यह एक सवाल भी है और चिंतनीय विषय भी.

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इस दिन को राजकीय अवकाश के रूप में मनाने का लिया है फैसला

कोरोना जैसी महामारी जब पूरी दुनिया में फैल रही है, मानो एक परिवर्तन का दौर पूरी दुनिया में महसूस किया जा रहा है. इस संक्रमण और गतिशील अवधि में आदिवासी समाज को यह तय करना है कि अब वे कैसे आगे बढ़ें. सीएम ने कहा कि आज के इस शुभ अवसपर पर उनकी गठबंधन सरकार ने फैसला लिया है कि अब हर वर्ष इस दिन को राजकीय अवकाश के रूप में मनाया जाएगा.

भौतिकवादी युग में देखना होगा कि कैसे समाज को विकास की प्रगति पर ले जायें

सीएम ने कहा है कि आदिवासी समाज में प्रतिभा की कमी नहीं है. फिर भी समाज में कई परेशानी बनी हुई है. इसलिए हमें संकल्प लेना होगा कि इतना लंबा सफर तय करने के बाद आदिवासी समाज ने किन-किन ऊंचाईयों को छूआ, उसे और आगे बढ़ाया जाये. आदिवासी दिवस पर उनकी सभी से विनती है कि समाज को आगे बढ़ने के लिए हमें एकजुट रहना होगा. समाज के लोगों के बीच शिक्षा को प्राथमिकता देना होगा. आज के इस भौतिकवादी और प्रतियोगिता वाली युग में देखना होगा कि कैसे हम इस समाज को विकास के प्रगति पर ले जायें.

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