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आंगनबाड़ी बहन सामने बेहोश होकर गिरी तो हेमंत ने कहा- एक भी महिला की मौत हुई तो सरकार को जीने नहीं देंगे

चार दिनों से बैठीं है भूख हड़ताल पर, अब तक दस महिलाओं को भर्ती किया गया

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Ranchi : आगनंबाड़ी बहनों का आंदोलन समय के साथ साथ जोर पकड़ता जा रहा है. पिछले चार दिनों से भूख हड़ताल में बैठी महिलाओं की तबीयत भी अब बिगड़ने लगी है. रविवार से लेकर सोमवार तक दस महिलाओं को अस्पताल में भर्ती कराया गया.

सोमवार को पूर्व मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन आंगनबाड़ी बहनों से मिलने राजभवन के पास गये. इस दौरान भी भूख हड़ताल में बैठी एक महिला बेहोश होकर गिर गयी जिसे तत्काल सदर अस्पताल में भर्ती कराया. हेमंत सोरेन ने कहा, अगर एक भी महिला मौत हुई तो सरकार को जीने नहीं देंगे.

आंगनबाड़ी बहनों से मिलने के बाद हेमंत सोरेन खुद भी उक्त महिला से मिलने पहुंचे. अभी भी लगभग 12 महिलाएं भूख हड़ताल में बैठी हैं. आंगनबाड़ी बहनों के आंदोलन का यह 32वां दिन है.

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इसके पहले महिलाएं सिर्फ धरना प्रदर्शन कर रही थी. लेकिन मुख्यमंत्री की ओर से तीन सिंतबर को आठ दिनों का समय देने के बाद भी वायदा पूरा नहीं होने पर महिलाओं ने भूख हड़ताल शुरू किया.

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‘सरकार की संवेदनहीनता चरम पर’

महिलाओं को संबोधित करते हुए हेमंत सोरेन ने कहा कि सरकार की संवेदनहीनता चरम पर है. दुर्भाग्यपूर्ण है कि महिलाएं धरना पर बैठी हैं और सरकार और उनके प्रतिनिधि उनसे मिलने तक नहीं आते. महिलाएं बिलख रही हैं, अपने अधिकार के लिए. अस्पताल में भर्ती हो रही है.

महिला सशक्तिकरण की बात करने वाली सरकार के काल में ये सब कुछ हो रहा है. शर्म की बात है. सरकार की आत्मा मर चुकी है. इनसे कुछ उम्मीद करना बेकार है. जनता ही सब सिखायेगी. उन्होंने कहा कि अगर एक भी आगंनबाड़ी बहन की मौत हुई तो सरकार को जीने नहीं देंगे. सड़क से लेकर संसद तक सरकार सिर्फ जेब भरने का काम कर रही है.

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ये हैं आंगनबाड़ी बहनों की मांग

आंगनबाड़ी कर्मचारी झारखंड प्रदेश संघ की ओर से पिछले 32 दिनों से बहनें आंदोलनरत हैं. इनकी प्रमुख मांगों में न्यूनतम मजदूरी दर देना, जनवरी 2018 में मुख्यमंत्री के साथ हुए समझौते को लागू करना, रिटायरमेंट की उम्र बढ़ाने, तीन लाख का इंश्योरेंस समेत अन्य मांगे हैं.

राज्य में आंगनबाड़ी बहनों की संख्या लगभग 88 हजार है. इनमें सहायिका 4,432, सेविका 4,400 और पोषण सखी लगभग 12 हजार हैं.

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