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रामगढ़ : #koylanchal में अपराधी बेलगाम, #gangwar और उग्रवाद में जा रहीं जानें

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Ramgarh : रामगढ़ के कोयलांचल क्षेत्र रामगढ़, भुरकुंडा, पतरातू, कुजू, उरीमारी, बरकाकाना और बड़का सायाल जैसे इलाकों में बेलगाम हो गये हैं. गैंगवार और उग्रवाद के नाम पर हत्याओं का दौर थम नहीं रहा है.

रविवार को भी बेखौफ अपराधियों ने दिनदहाड़े झामुमो सह विस्थापित नेता गहन टुडू की उनके घर के पास ही गोली मारकर हत्या कर दी. गहन टुडू को 4 अगस्त को ही जेजेएमपी के उग्रवादियों ने चेतावनी दी थी.

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इस तरह कोयलांचल में इस तरह की कई ऐसी घटनाएं हो चुकी हैं जिसमें में दर्जनभर से ज्यादा लोग गैंगवार और उग्रवाद की भेंट चढ़ चुके हैं. इस क्षेत्र में छोटे-बड़े आपराधिक गैंग सहित टीपीसी और जेजेएमपी उग्रवादी संगठनों के लोग भी सक्रिय हैं और रंगदारी वसूलने का काम कर रहे हैं.

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हत्या की असली वजह रंगदारी की गाढ़ी कमाई

पिछले 20 सालों से लगातार भोला पांडेय और सुशील श्रीवास्तव के गिरोह समेत कई छोटे आपराधिक गिरोह और उग्रवादी संगठनों के द्वारा की जा रही हत्या, फायरिंग जैसी घटनाओं की मुख्य वजह है कोयलांचल इलाके में कोयला कारोबारियों और ट्रांसपोर्टरों से रंगदारी की वसूली. इस क्षेत्र में गिरोह अपना दबदबा कायम रखना चाहते हैं.

नक्सलियों के नाम से अपराधी वसूलते हैं लेवी

लेवी वसूलने के लिए कोयलांचल के छोटे-छोटे अपराधी सक्रिय हो गये हैं. कुछ युवाओं के संगठन व हथियार एकत्रित कर ये लोग नक्सलियों के नाम पर क्षेत्र में वसूली का काम करते हैं. ज्यादातर मामलों में भय पैदा होने के बाद इन्हें लेवी मिलना शुरू भी हो जाता है.

ट्रांसपोर्टिंग कंपनी की मोटी कमाई बनी लेवी की वजह

कोल इंडिया के ट्रांसपोर्टिंग कार्य में वर्तमान में देश की बड़ी-बड़ी ट्रांसपोर्ट कंपनियां घुस गयी हैं. ये कंपनियां ऊंचे रेट पर उत्पादन व संप्रेषण का ठेका लेती हैं. उत्पादन का काम तो खुद करती है, लेकिन संप्रेषण का काम औने-पौने रेट पर पेट्टी कांट्रेक्टरों को बांट देती हैं.

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बेरोजगारी के कारण इस पेट्टी कांट्रैक्ट के काम को लेने के लिए भी काफी मारामारी होती है. यह परंपरा पिपरवार, खलारी, डकरा, आम्रपाली, मगध आदि क्षेत्र के बाद अब रामगढ़ के कोयलांचल पहुंच चुकी है.

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वारदात के पीछे ट्रांसपोर्टिंग कंपनियों की पॉलिसी जिम्मेवार

हालिया दिनों में उग्रवादियों द्वारा ट्रांसपोर्टिंग कार्य को निशाना बनाये जाने के पीछे कहीं न कहीं ट्रांसपोर्टिंग कंपनियों की पॉलिसी जिम्मेवार रही है. जब भी कोयला खनन के लिए कंपनियां आती हैं तो उग्रवादी व आपराधिक संगठन एकाएक ज्यादा सक्रिय हो जाते हैं.

कंपनी के समक्ष ऐसे जो भी तत्व आते हैं, उसे अपने स्तर पर मैनेज कर लिया जाता है. कंपनी की इसी पॉलिसी के कारण अपराधियों व उग्रवादियों का मनोबल लेवी उगाही के लिए बढ़ता रहता है. जब भी कोई नया आपराधिक या उग्रवादी संगठन इस क्षेत्र में खड़ा होता है, तो उसका पहला निशाना ऐसी ही कंपनियां बनती हैं.

कई लोग गैंगवार और उग्रवाद की चढ़ चुके हैं भेंट

  • 12 जुलाई 2018 को निजी कंपनी के मैनेजर मल्लिकार्जुन की सेंट्रल सौंदा में उनके क्वार्टर के सामने गोली मारकर हत्या कर दी गयी थी.
  • 18 दिसंबर 2018 को समाजसेवी संजीव सिंह बघेल को गोलियों से भून तिया गया. इससे पहले पूर्व मुखिया निर्मल यादव और विस्थापित नेता शर्मा मांझी की हत्या कर दी गयी थी.
  • 12 सितंबर 2018 को आजसू नेता सतीश सिन्हा और 27 फरवरी 2019 को विस्थापित सह आदिवासी छात्रसंघ के नेता दसई मांझी को गोली मारी गयी, हालांकि दोनों बच गये थे.
  • 29 जुलाई 2019 को रामगढ़ जिले के उरीमारी थाना क्षेत्र में अपराधियों ने रेलवे में काम करा रहे कंस्ट्रक्शन कंपनी के साइट इंचार्ज रोहित मिश्रा को गोली मार दी थी.
  • 15 सितंबर 2019 रामगढ़ के उरीमारी में अपराधियों ने दिनदहाड़े झामुमो सह विस्थापित नेता गहन टुडू की उनके घर के पास ही गोली मारकर हत्या कर दी.

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