
latehar: अब तक खाकी की पहचान थी हाथ में बंदूक लेकर अपराधियों, नक्सलियों और आंतकवादियों से मुकाबला करना, किन्तु अब यह अवधारणा बदल रही है. अब खाकी वर्दीधारी न केवल लोगों के बीच पहुंच रहे हैं, बल्कि उनकी पीड़ा और जुरूरतों को जानने-समझने का भी प्रयास कर रहे हैं. इसकी मिसाल पेश की है सीआरपीएफ ने.लातेहार जिले की लात पंचायत के 13 गावों में से दो गांव करमडीह और खम्बीखाप की सूरत बदलने का बीड़ा सीआरपीएफ ने उठाया है.

कभी ये दोनों गांव नक्सलवाद की राजधानी कही जाती थी, लेकिन पिछले दो महीने में इन दोनों गावों में कई साकारात्मक बदलाव आये हैं और इसका सारा श्रेय सीआरपीएफ 112 बटालियन का जाता है. इसी वर्ष जून महीने में सीआरपीएफ 112 बटालियन की एक कंपनी करमडीह में तैनात की गयी, जबकि दूसरी कंपनी 6 अगस्त को वहां तैनात की गयी. आजादी के बाद से ही बिजली से महरूम इन गावों से सीआरपीएफ ने अपनी पहल से बिजली पहुंचा दी है.
सीआरपीएफ डीआईजी जयंत पाल ने मंगलवार को यहां प्रेस कांफ्रेंस आयोजित कर बताया कि पिकेट के जेनरेटर से गांव को बिजली दी जा रही है. बिजली की खपत को कम करने के लिए सभी घरों में एलईडी बल्ब लगाये गये हैं. इससे करीब तीन सौ लोगों को लाभ पहुंचा है. श्री पाल ने बताया कि प्रत्येक दिन शाम सात बजे से रात 10 बजे तक सभी घरों में बिजली दी जाती है, ताकि लोग अपना कामकाज भी कर सकें और ग्रामीण बच्चों की पढ़ाई भी हो सके.
डीआईजी ने बताया कि पिछले दिनों सीआरपीएफ के आईजी संजय आनंद लाटकर ने इन गावों का दौरा किया था और इस क्रम उन्होंने गांव में अंधेरा देखा था. उसी दौरान श्री लाटकर ने पिकेट की बिजली गांव के घरों तक पहुंचाने का निर्देश दिया था.
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हेल्थ कैंप का आयोजन
डीआईजी पॉल ने बताया कि ग्रामीणों की सुविधा के लिए सीआरपीएफ की ओर से गांव में स्वास्थ्य शिविर का भी आयोजन किया गया है. यह शिविर आज भी जारी है. स्वास्थ्य शिविर का सीआरपीएफ आईजी श्री-लाटकर ने भी जायजा लिया. इस दौरान ग्रामीणों को आश्वस्त किया गया कि रात में भी अगर उन्हें जरूरत पड़े तो वे सीआरपीएफ की सेवा प्राप्त कर सकते हैं.
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स्वावलंबी बनाने की पहल
मौके पर मौजूद सीआरपीएफ 112 बटालियन के प्रभारी कमांडेंट संजय कुमार ने बताया कि ग्रामीणों के साथ उनका संवाद लगातार जारी है. उनकी जरूरतों के मुताबिक सीआरपीएफ अपनी ओर से जो कुछ कर सकती है किया जा रहा है. उन्होंने बताया कि ग्रामीणों से कहा गया है कि वे सब्जी का उत्पादन करें. पशुपालन करें, दूध का व्यवसाय करें. श्री कुमार ने कहा कि ग्रामीणों द्वारा उगायी गयी सब्जी, निकाले गये दूध आदि सीआरपीएफ ही अपनी जरूरत के लिए खरीदने को तैयार है. ग्रामीणों को बाजार तलाशने की भी जरूरत नहीं है. उन्होंने यह भी कहा कि व्यवसाय के लिए ग्रामीणों को छोटी-मोटी पूंजी भी सीआरपीएफ उपलब्ध कराने को तैयार है.
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नक्सल अभियान का हिस्सा
मौके पर सीआरपीएफ 112 बटालियन के द्वितीय कमान अधिकारी रवि रंजन ने कहा कि ग्रामीणों का विश्वास हासिल करना भी नक्सल अभियान का ही हिस्सा है. उन्होंने कहा कि सीआरपीएफ ग्रामीणों के बीच नक्सलियों की घुसपैठ को तोड़ने की दिशा मे काम कर रही है. उन्होंने कहा कि ये गावं नक्सलियों के गढ़ बुढ़ापहाड़ से महज पांच किलोमीटर की दूरी पर अवस्थित हैं. गावं में हमारी पहुंच हो जाने से नक्सलियों का राशान-पानी बंद हो गया है.
लाउडस्पीकर से सुनाया जायेगा न्यूज
सीआरपीएफ डीआईजी श्री पाल ने यह भी कहा कि गावं वालों ने न्यूज सुनने-जानने की इच्छा व्यक्त की है. इसके लिए गावं में अखबार मंगाने की व्यवस्था कर दी गयी है. इसके साथ ही गावं में लाउडस्पीकर के जरिये देश-दुनिया की खबरों से भी गावं वालों को वाकिफ कराया जायेगा. गावं वालों को ट्रांजिस्टर उपलब्ध कराने की योजना पर भी काम चल रहा है, ताकि वे न्यूज के साथ-साथ प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के ‘मन की बात’ कार्यक्रम को भी सुन सकें. इसके अलावा सामुदायिक भवन में प्रोजेक्ट स़्क्रीन के जरिये लोगों को देशभक्ति पर आधारित कार्यक्रम और फिल्में भी दिखायी जायेंगी.
श्री पाल ने कहा कि गांव में संचार साधन उपलब्ध कराने के साथ-साथ रोड कनेक्टिविटी बढ़ाने पर काम किया जायेगा. इसके लिए जिला प्रशासन से भी सहयोग मांगा जायेगा. गौरतलब है कि पलामू प्रमंडल के विभिन्न नक्सल प्रभावित और रिमोट इलाकों में सिविल एक्शन प्रोग्राम के तहत लोगों के बीच जाकर न केवल लोगों में विश्वास की भावना पैदा की है, बल्कि गरीब और असहाय लोगों के बीच विभिन्न प्रकार के उपकरण बांटकर अपने पैरों पर खड़े होने की प्रेरणा दी है.
नतीजा यह है कि ग्रामीण खाकी वर्दी को देखकर दूर भागते थे, वे अब उनके साथ कदम से कदम मिलाकर खड़े होने लगे हैं. पुलिस और सीआरपीएफ भी उनके हर दुख-दर्द को बांटने के लिए पूरी तरह तत्पर दिखायी पड़ रही है.




