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21 अगस्त को अपहृत प्रिया सिंह के भाई को गढ़वा पुलिस ने कहा-नौटंकी करते हो, 29 अगस्त को पलामू में मिली डेड बॉडी

पहले प्रिया सिंह का अपहरण और फिर उसकी हत्या के मामले में बड़ी साजिश की बात सामने आ रही है.

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Sweta Kumari

Gharwa: गढ़वा की सामाजिक कार्यकर्ता प्रिया सिंह का अपहरण के बाद हत्या के मामले में गढ़वा पुलिस की भूमिका पर सवाल उठने लगा है. पहले प्रिया सिंह का अपहरण और फिर उसकी हत्या के मामले में बड़ी साजिश की बात सामने आ रही है. क्योंकि गढ़वा पुलिस ने अपहरण की घटना की सूचना मिलने पर कोई कार्रवाई नहीं की. न ही प्राथमिकी दर्ज की. प्रिया का अपहरण गढ़वा टाउन से 20 अगस्त को हुआ था. उसके परिजनों ने इसकी सूचना थाना प्रभारी अनिल कुमार सिंह को दी. लेकिन थाना प्रभारी ने प्रिया के भाई से कहा था कि नौटंकी मत करो. कोई प्राथमिकी दर्ज नहीं होगी. प्रिया के भाई ने प्राथमिकी दर्ज कराने के लिए गढ़वा के डीसी और एसपी से भी मुलाकात की. लेकिन इसका फायदा नहीं हुआ. प्राथमिकी दर्ज नहीं की गयी. इस दौरान प्रिया सिंह की हत्या कर दी गयी. 29 अगस्त को एक युवती का क्षत-विक्षत शव पलामू के विश्रामपुर थाना के नौगढ़ा ओपी के अमवा गांव के बगदइया नाला से बरामद किया गया. प्रिया सिंह के भाई पंकज ने शव की पहचान अपनी बहन के रुप में की. शव की शिनाख्त प्रिया सिंह के कपड़े से हुई.

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क्या था मामला

जानकारी के मुताबिक प्रिया सिंह 20 अगस्त को घर से गायब हुई. जब घर नहीं लौटी तो भाई पंकज सिंह ने 21 अगस्त को गढ़वा थाना जाकर आवेदन दिया और गुमशुदगी की एफआईआर दर्ज करने का अनुरोध किया. लेकिन थाना प्रभारी ने पंकज के साथ बुरा बर्ताव किया. थाना प्रभारी ने परिजनों से कहा कि नौटंकी कर रहे हैं. जिसके बाद परेशान परिजन उल्टे पांव लौट गये. फिर परिजन आवेदन लेकर डीसी के पास गये तो वहां उन्हें एसपी के पास जाने की सलाह दी गयी.

परिजनों ने फिर भी हिम्मत नहीं हारी और वे एसपी शिवानी तिवारी के पास गये,  लेकिन एसपी से मुलाकात नहीं हुई. इसके बाद प्रिया के परिजनों ने 23 अगस्त को डीएसपी से मिलकर मामले की शिकायत की. तब जाकर गुमशुदगी की रिपोर्ट दर्ज की गयी. वहीं इस मामले में जब गढ़वा एसपी शिवानी तिवारी से न्यूज विंग ने बात की तो उन्होंने कोई जानकारी नहीं दी और फोन काट दिया. उनका पक्ष आने पर हम उसे भी प्रकाशित करेंगे.

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गढ़वा के पूर्व एसपी ने सम्मानित भी किया था

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प्रिया सिंह महिलाओं को स्वरोजगार से जोड़ने का काम करती थीं. वे दक्ष फाउंडेशन नाम का एक एनजीओ चलाती थीं. उसके सामाजिक कार्यों के लिये प्रिया को गढ़वा के पूर्व एसपी मोहम्मद अर्सी ने सम्मानित भी किया था. वह अपने सामाजिक कार्यों के दौरान कई तरह के लोगों से मिलती रहती थी. कई लोगों से उसके संबंध थे.

प्रिया सिंह के शव की बरामदगी के बाद पलामू पुलिस ने तीन सितंबर को पोस्टमार्टम के लिए शव को रिम्स भेजा. खबर है कि रिम्स में एक मेडिकल टीम का गठन किया गया है,  जो प्रिया का DNA प्रोफाइल को उसके परिजनों से डीएनए से मिलान करायेगी. इस मामले में पलामू के एसपी ने बताया कि प्रिया के भाई ने शव की पहचान कर ली है. लेकिन हम अब भी पक्के तौर पर यह नहीं कह सकते कि बरामद किया गया शव प्रिया सिंह की ही है. डीएनए प्रोफाइल के मिलान के बाद ही इस बारे में आगे कुछ कहा जा सकता है. शव बरामदगी को लेकर हमने हत्या की प्राथमिकी दर्ज कर ली है. अनुसंधान जारी है.

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इस मामले में सुप्रीम कोर्ट के अधिवक्ता और अभिभावक संघ के अध्यक्ष किशोर कुमार पांडेय ने मांग की है कि गढ़वा थाना के प्रभारी के खिलाफ कार्रवाई की जाये. क्योंकि गढ़वा थाना प्रभारी ने शिकायत मिलने के बाद भी कार्रवाई नहीं की और मृतक प्रिया सिंह के भाई के साथ दुर्व्यवहार करके भगा दिया. श्री पांडेय ने मामले की जांच कर आरोपियों की गिरफ्तारी की मांग की है.

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