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ग्रामीणों को कौन पूछे, यहां मवेशियों को भी नहीं मिल रहा पर्याप्त पानी

पेयजल संकट से ग्रस्त हैं ग्रामीण, क्षेत्र के सांसद हैं शिबू सोरेन और विधायक हैं मंत्री डॉ लुईस मरांडी

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Dumka : शिबू सोरेन के संसदीय क्षेत्र और झारखंड सरकार में मंत्री डॉ लुईस मारंडी के विधानसभा क्षेत्र स्थित दुमका प्रखंड की रामपुर पंचायत के अंतर्गत रानीडीन्डा के ग्रामीणों के साथ-साथ मवेशी भी पेयजल संकट का समाना कर रहे हैं. ग्रामीण समस्या के समाधान के लिए सरकारी अधिकारी से लेकर जनप्रतिनिधियों तक दौड़ लगा चुके हैं, लेकिन किसी ने भी रानीडीन्डा गांव की समस्या को दूर करने में रुचि नहीं ली. यहां ग्रामीणों की आजीविका का एक मात्र सहारा कृषि और पशुपालन है. धान की फसल वर्षा अच्छी होने से किसी तरह हो गयी, लेकिन बरसात के बाद अब ग्रामीणों व उनके मवेशियों को जल संकट का समाना करना पड़ा रहा है. इससे मवेशियों को भी पर्याप्त मात्रा में पानी नहीं मिल पा रहा है. गांव में मौजूद जलस्रोत सूखने लगे हैं. इतना ही नहीं, गांव में तीन चापाकल लंबे समय से खराब पड़े हैं. वहीं, अन्य तीन चापाकल से काफी कम पानी निकलता है.

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वोट नहीं देने का मन बना रहे हैं ग्रामीण

रानीडीन्डा गांव में रहनेवाली प्रेमशिला सोरेन कहती हैं कि चुनाव नजदीक आ रहा है. गांव में नेता दौड़ने लगे हैं. मुखिया से लेकर विधायक, सांसद तक ने गांव की समस्याओं को लेकर अब तक बेरुखी दिखायी है. ऐसे में गांव के लोग वोट नहीं देने के निर्णय तक पहुंच रहे हैं. सांसद से लेकर विधायक, मंत्री तक से फरियाद करने के बाद भी चापाकल ठीक नहीं हो पाया. गांव में बड़े-बड़े नेता वोट मांगने तो आ जाते हैं, लेकिन गांव की छोटी सी जरूरत दूर नहीं करते हैं, तो वे गांव का विकास क्या करेंगे.

शौचालय होते हुए भी खुले में शौच को मजबूर हैं बहू-बेटियां

पिंकी हेम्ब्रोम का कहना है कि गांव में चापाकल खराब होने के कारण खासकर बहू, बेटी और महिलाओं को काफी दिक्कत का सामना करना पड़ रहा है. कई शौचालय होने के बाद भी पानी के अभाव में मजबूरन खुले में शौच करने के लिए मजबूर हैं.

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जनप्रतिनिधि और विभाग उदासीन, पीने के लिए भी नहीं मिल रहा पर्याप्त पानी

आनंद हांसदा का कहना है कि जनप्रतिनिधि और विभाग की उदासीनता के कारण कई वर्षों से चापाकल खराब होने के कारण ग्रामीणों को पीने के पानी के लिए बहुत दिक्कत का सामना करना पड़ रहा है. पानी की कमी के कारण स्वच्छता भी प्रभावित हो रही है. पानी की कमी के कारण शरीर के साथ घर-द्वार को भी साफ-सुथरा रखना मुश्किल हो गया है.

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चापाकलों की जल्द मरम्मत नहीं हुई, तो सड़क पर उतर आंदोलन करेंगे ग्रामीण

इस समस्या को लेकर गांव में ग्रामसभा की बैठक हुई. इसमें ग्रामीणों ने कहा कि गांव में पेयजलापूर्ति का सारा दारोमदर अन्य तीन चपाकलों पर है. इन तीनों चापाकलों की भी स्थिति ठीक नहीं है. इनसे बहुत कम पानी निकलता है. जनप्रतिनिधि अगर जल्द ही चापाकलों की मरम्मत करने में रुचि नहीं लेते हैं, तो ग्रामीण सड़क पर उतरकर आंदोलन के लिए विवश होंगे.

कौन-कौन चापाकल कब से है खराब

  • बाबूधन राणा के घर के सामने का चापाकल आठ महीने से खराब है.
  • अर्जुन हेम्ब्रोम के घर के सामने का चापाकल डेढ़ वर्ष से खराब है.
  • किशोर हेम्ब्रोम के घर के सामने का चापाकल पांच वर्ष से खराब है.

ग्रामीणों को कौन पूछे, यहां मावेशियों को भी नहीं मिल रहा पर्याप्त पानी

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ग्रामसभा की बैठक में प्रेमशिला सोरेन, रानी हेम्ब्रोम, मकु सोरेन, बिटी मुर्मू, सबरी मुर्मू, पोलिना सोरेन, रासमुनी टुडू, सबोदी हेम्ब्रोम, काहा मुर्मू, फूलमुनी मुर्मू, होपनी हांसदा, बाहामुनि सोरेन, लुखी सोरेन, सोनाली हांसदा, निशा हांसदा, सुनील हांसदा, गणेश हांसदा, कालिदास हेम्ब्रोम, निर्मल हांसदा, जगदीश हेम्ब्रोम, मुनि हेम्ब्रोम, उर्मिला मुर्मू, रुपिन मुर्मू, लुखी सोरेन, काहा मुर्मू के साथ काफी संख्या में महिला और पुरुष उपस्थति थे.

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