
Ranchi : राजधानी के लोगों को आये दिन जाम का सामना करना पड़ रहा है. ट्रैफिक व्यवस्था भी बेहाल है. सड़कों पर गाड़ियां रेंग रही हैं. शाम के वक्त स्थिति ज्यादा खराब हो जाती है. अगर आठ या दस किलोमीटर की दूरी तय करनी हो, तो 15 से 20 मिनट सिर्फ जाम से निपटने में खर्च हो जाते हैं. गली-मुहल्लों की सड़कें भी जाम रहती हैं. शहर की ट्रैफिक की बुनियादी सुविधाएं भी नहीं बढ़ रही हैं. पिछले 22 वर्षों में सड़कें तो नहीं बढ़ीं, लेकिन उन पर गाड़ियों का बोझ बढ़ता चला गया. औसतन हर साल राजधानी में एक लाख से ज्यादा गाड़ियां बढ़ रही हैं.
झारखंड राज्य बनने के 22 साल बाद भी राजधानी में ट्रैफिक व्यवस्था दुरुस्त नहीं हो पायी है. यहां के लोग हर दिन जाम की समस्या से जूझ रहे हैं. शहर की मुख्य सड़कों पर रोज जाम लगना आम बात है. राज्य बनने के बाद साल 2001 में झारखंड में निबंधित वाहनों की कुल संख्या 22,240 थी जो नवंबर 2022 तक बढ़कर 66,69,640 हो गयी है. इसमें 15 साल पुरानी गाड़ियों की भी तादाद अच्छी खासी है.
हर दिन बढ़ रही वाहनों की संख्या: रांची में प्रति दिन वाहनों की संख्या लगातार बढ़ रही है. राजधानी में फिलहाल साढ़े 12 से 15 लाख से ज्यादा निबंधित गाड़ियां हैं. रांची में निबंधित वाहनों की संख्या भी बढ़ी है.
साल दर साल निबंधित गाड़िया
जनवरी 2021 से लेकर 24 नवंबर, 2021 तक में कुल 82,479 वाहन निबंधित हुए हैं, जबकि, 2020 में निबंधित वाहनों की संख्या 94,911, 2019 में 1,09,560, 2018 में 1,31,709 और 2017 में कुल निबंधित वाहनों की संख्या 1,20,496 है. यानी कोरोना काल में भी हर वर्ष करीब एक लाख नयी गाड़ियां सड़क पर उतर रही थीं. वहीं कोराना से पूर्व यह आंकड़ा एक लाख से ज्यादा था़.
साल व वाहनों की संख्या
2022-2,09,23
2021- 82,479
2020- 94,911
2019- 1,09,560
2018- 1,31,709
2017- 1,20,496
इसे भी पढ़ें: गढ़वा : बिस्कुट लेने गए बच्चे पर तेंदुआ ने किया हमला, शव के आधे हिस्से को खाया




