
Akshay/Nitesh
Ranchi: जैसा कि झारखंड के सीएम दावा कर रहे हैं, उससे यही कहा जा सकता है कि प्रधानमंत्री आवास बनाने में ना तो सीमेंट की जरूरत है. ना ही ईंट और ना ही ढलाई होनी है. अब तो बस छू-मंतर-छू और गिल-गिली-छू भर कहने से ही मकान खड़ा हो जाएगा. जी हां… ऐसा ही होगा. क्योंकि सीएम रघुवर दास ने कहा कि 2020 तक वो सभी बेघरों को आवास बनाकर दे देंगे. जबकि सिर्फ ग्रामीण इलाकों की बात करें, तो झारखंड में कुल बेघरों की संख्या 14 लाख है.
झारखंड सरकार ने 14 लाख में से करीब 5.30 लाख का टारगेट सेट किया. इसके एवज में 2016 से लेकर अब तक सरकार ने सिर्फ 3.66 लाख आवास बनाए हैं. अगर टारगेट की बात छोड़ कर बेघरों की बात करें तो 10.34 लाख आवास बनाने होंगे. तभी सभी बेघरों को छत मिलने का सपना पूरा किया जा सकता है. सीएम रघुवर दास ने दावा किया है कि 2020 तक वो सभी बेघरों को आवास दे देंगे. ऐसे में ग्रामीण इलाकों में सिर्फ 710 दिन में 10.34 लाख आवास बनाने होंगे. यानि हर रोज 1500 आवास. अगर ऐसा होता है तो यह एक जादू ही होगा.
ये आंकड़े मुख्यमंत्री रघुवर दास के उस दावे को खोखला साबित करता है जिसमें वो कह रहे हैं कि 2020 तक वो झारखंड के सभी बेघरों को अपना छत नसीब करवा देंगे. इस बात का खुलासा झारखंड सरकार के ग्रामीण विकास विभाग और नगर विकास विभाग के आंकड़ों से हो रहा है.
शहरी क्षेत्र में 36,566 को मिला आवास, बाकी हैं 73,060 बेघर
बात अगर प्रधानमंत्री आवास (शहरी) योजना की करें, तो कुल 2.47 लाख बेघरों के लिए आवास की मांग की गयी थी. लेकिन सूची में केंद्र ने केवल 1,56,396 बेघरों को आवास देना एप्रूव किया है. ऐसे में शहरी इलाको में भी करीब 91 लाख बेघरों को आवास नहीं मिल पाएगा. वहीं अबतक शहरी विकास विभाग ने 36,566 बेघरों को ही आवास उपलब्ध कराया है. शेष बचे दिन (710 दिन) में विभाग को 73,060 बेघरों को मकान देना है. जो किसी भी तरह संभव नहीं है.
ग्रामीण इलाकों में हर दिन बनाने होंगे 1500 आवास
बेघरों को आवास देने के मुख्यमंत्री के घोषणा के बाद ग्रामीण विकास विभाग के अधिकारी सकते में पड़ गये हैं. नाम न बताने की शर्त पर एक अधिकारी ने बताया कि सीएम के इस दावे को पूरा करने में अब 710 दिन ही शेष बचे है. आंकड़े बताते हैं कि केंद्र ने शहरी और ग्रामीण दोनों इलाकों के कई बेघरों को सूची में ही नहीं जोड़ा है. बात अगर ग्रामीण इलाकों की करें, तो करीब 14 लाख बेघर है. इसके उलट सूची में कुल 5.28 लाख बेघरों (वित्तीय वर्ष 2016-17, 2017-18, 2018-19) को शामिल किया है.
वही अबतक केवल 3,66,524 बेघरों को आवास मुहैया कराया गया है. 10.34 लाख अभी भी बेघर हैं. इस तरह अगर सीएम के दावे को विभाग पूरा करना भी चाहे तो संभव नहीं है, क्योंकि ऐसा करने के लिए 710 दिन में हर रोज ग्रामीण इलाकों में 1500 आवास बनाने होंगे.
तीन साल का ब्योरा
| वित्तीय वर्ष | टारगेट | काम पूरा हुआ
|
| 2016-17 | 2,30,855 | 1,97,767 |
| 2017-18 | 1,60,052 | 1,11,223 |
| 2018-19 | 1,38,084 | 57,524 |
क्या संभव है शहरी क्षेत्र में हर दिन 103 आवास बनाना ?
पीएम आवास योजना (शहरी) के तहत अगर बेघऱों की संख्या देखें तो शहरी विकास विभाग में कुल 2.47 लाख बेघऱों ने मकान बनवाने की मांग की थी. जबकि केंद्र ने 1,56,396 बेघऱों को सूची में शामिल किया. पिछले तीन वर्षों में विभाग ने कुल 36,566 बेघरों को मकान दिया है. वहीं 46,770 मकान अभी निर्माणधीन अवस्था में हैं. ऐसे में सीएम के तय तिथि (वर्ष 2020 तक) तक 73,060 बेघरों को आवास देना होगा. यानि 710 दिन में हर रोज 103 मकान बनाने होगें. जो कतई संभव नहीं है.
योजना में 60:40 का है अनुदान
आवास निर्माण के लिए केंद्र और राज्य का अंशदान 60:40 फीसदी का है. यह राशि विभिन्न जिलों के लिए अलग-अलग है. संताल परगना के दुमका, गोड्डा, देवघर, साहेबगंज, जामताड़ा और पाकुड़ सहित धनबाद में यह राशि 1.20 लाख है. वहीं अऩ्य जिलों में 1.30 लाख राशि प्रस्तावित है. इसके अतिरिक्त आवास निर्माण में लगे मजदूरों के लिए 15,500 रूपये. शौचालय निर्माण में 12,000 रूपये सहित निःशुल्क गैस कनेक्शन, विद्युत और पेयजल सुविधा दी जानी है.
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