
Ranchi : “कैंसर जैसी बीमारी में डरना नहीं चाहिये. ऐसे में आत्मविश्वास होना चाहिये कि कैंसर का सामना कर सकें. मरीजों का आत्मविश्वास कम न हो, इसका ध्यान डॉक्टर को रखना चाहिए.”
उक्त बातें कोलकाता की डॉ शर्मिला चंद्रा ने शनिवार को कही. वे आंकोलॉजी इंडिया और AIRO के संयुक्त तत्वावधान में आयोजित राष्ट्रीय कार्यशाला को संबोधित कर रही थीं.
उन्होंने कहा कि कैंसर जैसी बीमारी बहुत तेजी से अपने पैर फैला रही है. ऐसे में लोगों के बीचजागरुकता बहुत जरूरी है. अभी बहुत सारे ऐसे उपाय आये हैं जिससे अलग-अलग तरह के कैंसर को काबू किया जा सकता है. आने वाले समय में इस क्षेत्र में और भी विकास की संभावना है. लेकिन इन सब बातों में इन बातों को ध्यान रखने की जरूरत है कि भले ही कैंसर जैसी बीमारी को पूरी तरह खत्म करना थोड़ा मुश्किल है, पर अब इतनी तकनीक उपलब्ध है जिससे मरीजों को कम से कम तकलीफ हो.
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लंग्स कैंसर में धुम्रपान बिलकुल ही छोड़ देना चाहिए
पुणे से आये डॉ आशीष डोलास ने कहा कि लंग्स कैंसर का बहुत बड़ा कारण धुम्रपान है. ट्यूमर भी एक प्रमुख कारण है. लेकिन इसमें सबसे पहले मरीज की धूम्रपान करने की अवधि, पारिवारिक इतिहास जो स्वास्थ्य संबधी हो, कैंसर इलाज के बाद के खतरों समेत अन्य कारणों पर विशेष ध्यान दिया जाना चाहिये. जरूरी है कि मरीज धुम्रपान बिलकुल न करें. अगर कैंसर पूरी तरह ठीक हो भी जाता है तब भी मरीजों को धुम्रपान नहीं करना चाहिए. किसी भी तरह के कैंसर का दुबारा होना स्वास्थ्य के लिए ज्यादा हानिकारक है.
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मरीजों के साथ मित्रवत व्यवहार जरूरी
AIRO के सचिव डॉ राजेश कुमार सिंह ने कहा कि डॉक्टरों के लिए जरूरी है कि मरीजों के साथ मित्रवत व्यवहार करें. वहीं मरीज भी सहजता से इलाज करायें. मौके पर डॉ जेके मित्रा, डॉ वीके जैन, डॉ पीके भट्टाचार्य, डॉ एनएन सिंह समेत कई दूसरे राज्यों के डॉक्टर उपस्थित थे.
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