
Ranchi : चर्च ऑफ नॉर्थ इंडिया (सीएनआइ) और इसके तहत आनेवाले छोटानागपुर डायसिस के लोगों के बीच इन दिनों एक बात को लेकर खूब चर्चा चल रही है. और वह यह कि चर्च में होनेवाली शादियों के सर्टिफिकेट पर मुहर किसकी लगेगी ? यह सवाल इसलिए उठ रहा है कि जब से छोटानागपुर डायसिस ने सीएनआइ से स्वायत्त होने (ऑटोनोमस) की घोषणा कर दी है.
सीएनआइ के साथ उसके गतिरोध बढ़ रहे हैं. यह गतिरोध पिछले दो तीन महीनों में कई बार ऊभर कर सामने आ चुका है. गत नौ अक्तूबर को सीएनआइ के प्रतिनिधियों ने चेतावनी दी है कि ऑटोनोमस छोटानागपुर डायसिस के द्वारा जारी विवाह, बपतिस्मा के सर्टिफिकेट गैरकानूनी है. यदि पुरोहित सीएनआइ के द्वारा जारी लाइसेंस का दुरूपयोग कर छोटानागपुर डायसिस के नाम से विवाह, बपतिस्मा कराते हैं तो वह अवैध होगा. उनके खिलाफ कार्रवाई की जा सकती है.
इस चेतावनी के बाद से डायसिस के सदस्यों के बीच संशय की स्थिति बन गयी है. चर्च के पादरी भी नहीं समझ पा रहे हैं कि विवाह और बपतिस्मा जैसे संस्कार किस प्रकार कराये जायें.
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छोटानागपुर डायसिस का प्रमाणपत्र जारी होगा, रजिस्ट्रेशन की प्रक्रिया जारी
दूसरी ओर, छोटानागपुर डायसिस (ऑटोनोमस) के वाइस प्रेसीडेंस रेव्ह मार्शलेन गुड़िया ने कहा कि फिलहाल चर्च बंद हैं. ऑनलाइन चर्च सर्विस चल रही है. जब भी चर्च खुलेंगे तो विवाह संस्कार और बाकी धर्मविधियां संपन्न कराये जायेंगे. छोटानागपुर डायसिस की ओर से सर्टिफिकेट जारी किया जायेगा.
जहां तक रजिस्ट्रेशन का सवाल है उसके लिए प्रक्रिया जारी है. इसलिए चिंता की कोई बात नहीं है. उन्होंने कहा कि छोटानागपुर डायसिस 1970 में सीएनआइ में शामिल हुआ था. जबकि हमारा डायसिस उससे भी पुराना है. पहले जिस तरह से विवाह और बाकी धार्मिक संस्कार होते थे उसी तरह से आगे भी होते रहेंगे.
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क्या है विवाद
गौरतलब है कि छोटानागपुर डायसिस का इतिहास सौ साल से भी ज्यादा पुराना है. संत पॉल्स चर्च में एक छोटी मंडली से इसकी शुरुआत हुई थी. समय बीतने के साथ छोटानागपुर के अन्य इलाकों में इसका विस्तार हुआ और छोटानागपुर डायसिस का विस्तार हुआ. छोटानागपुर डायसिस के तहत कई चर्च, शिक्षण संस्थान, अस्पताल और अन्य संस्थाएं हैं.
1970 में उत्तर भारत के कई चर्च समूह के साथ चर्च ऑफ नॉर्थ इंडिया की स्थापना हुई, इनमें छोटानागपुर डायसिस भी शामिल था. सभी सीएनआइ के संविधान और नियमों के साथ संचालित होते थे. कुछ महीनों से अनियमितता, भ्रष्टाचार सहित अन्य कारणों की वजह से छोटानागपुर डायसिस के बिशप बीबी बास्के सहित उनके समर्थकों ने सीएनआइ से स्वायत्त होने की घोषणा कर दी. इस स्वायत्तता को सीएनआइ ने मान्यता नहीं दी है.
पिछले कुछ समय से दोनों ही पक्षों से कई बार खुलकर गतिरोध सामने आ चुका है. सुलह कराने की कोशिशें भी जारी है. पर इन सबके बीच डायसिस के आम विश्वासियों (सदस्यों) के बीच सशंय बरकरार है कि वे अपने धार्मिक सामाजिक संस्कारों का निर्वाह किस प्रकार करें?
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