
Ranchi : राज्य में कृषि उपज और विपणन विधेयक को लेकर 15 फरवरी से खाद्यान्न बाजार बंद कर दिया जायेगा. पूर्व निर्धारित कार्यक्रम के तहत व्यापारी व्यापार अपनी दुकानें बंद रखेंगे. इस संबंध में मंगलवार को प्रेस कांफ्रेंस कर चैंबर ऑफ कॉमर्स प्रतिनिधियों ने जानकारी दी. अध्यक्ष किशोर मंत्री और डॉ अभिषेक रामाधीन ने बताया कि व्यापारी हड़ताल नहीं करना चाहते हैं. लेकिन सरकार से बार-बार आग्रह के बाद भी मामले में पहल नहीं की जा रही है. कांग्रेस के आला नेताओं से पत्राचार भी किया गया लेकिन सरकार विधेयक वापस नहीं ले रही. और न ही व्यापारियों से बात कर रही. नतीजतन आंदोलन ही एक मात्र विकल्प है. जब तक सरकार अब बिल वापस नहीं लेगी, तब तक आंदोलन जारी रहेगा.
अलग-अलग एसोसिएशन का समर्थन
आलू प्याज थोक विक्रेता संघ, फल विक्रेता संघ, हरमू बाजार, डेली मार्केट, हरमू फल मंडी, चुटिया फल मंडी ने बंद का समर्थन करते हुए 15 फरवरी से बाजार बंद रखने का निर्णय लिया है.
आवक भी होगा बंद
डॉ रामाधीन ने कहा कि इस दौरान आवक भी मध्य रात्रि से बंद होगा. पहले भी व्यापारियों ने ऑर्डर करना बंद कर दिया था. ऐसे में राज्य में खाद्यान्न संकट होगा. जिसकी जिम्मेदारी सरकार की होगी. उन्होंने बताया कि रिटेलर दुकानों ने हड़ताल को समर्थन दिया है. लेकिन छोटे राशन दुकानों में राशन के साथ अन्य सेवाएं उपलब्ध होती हैं. जिससे इस पर पूर्ण बंदी नहीं हो सकती. अगर सरकार विधेयक वापस नहीं लेती है तो राज्य में कृषि और खाद्यान्न व्यापार प्रभावित होगा. व्यापारियों का आंदोलन चैंबर ऑफ कॉर्मस के बैनर तले किया जा रहा है.
स्टॉक होगा खत्म
खाद्यान्न व्यापार बंद होने से राज्य में खाद्यान्न संकट गंभीर हो सकता है. व्यापारियों ने खाद्यान्न आवक भी बंद कर दिया तो एक सप्ताह में राज्य में खाद्यान्न संकट हो सकता है. व्यापारियों की मानें तो राज्य भर में एक सप्ताह का ही खाद्यान्न स्टॉक में रहता है. हर दिन व्यापारी खाद्यान्न ऑर्डर करते हैं. जो प्रतिदिन की आपूर्ति के अनुसार होती है. ऐसे में खाद्यान्न व्यापार बंद होने से सरकार की जवाबदेही बढ़ेगी. राज्य में अधिकांष खाद्यान्न के आपूर्ति अन्य राज्यों से होती है. चावल को छोड़ कर किसी भी खाद्यान्न में राज्य सरकार की पूर्ण निर्भरता नहीं है. यहां हरियाणा, पंजाब, एमपी, यूपी, पश्चिम बंगाल से खाद्यान्न मंगाये जाते हैं.
एक सप्ताह से काला बिल्ला लगा कर काम
राज्य सरकार ने दिसंबर में शीतकालीन सत्र में बिल पास किया. जनवरी से व्यापारियों के बीच आंदोलन तेज हुआ. वहीं, 8 फरवरी को व्यापारियों ने राज्य स्तरीय बैठक का आयोजन किया. जिसमें निर्णय लिया गया कि 15 फरवरी से खाद्यान्न व्यापार राज्य में बंद कर दिया जायेगा. इसमें छोटे दुकानदारों ने भी बंदी को समर्थन दिया. वहीं, 6 फरवरी से ही राज्य के अलग-अलग हिस्सों में व्यापारियों ने काला बिल्ला लगाकर प्रदर्शन करना शुरू कर दिया था. जहां व्यापारियों ने 8 फरवरी को मंडी बाजार को बंद भी रखा था. अलग-अलग जिलों में समय-समय पर राज्य सरकार के विरोध में प्रदर्शन भी जारी है.
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