
Jamshedpur : जनगणना (2021) में आदिवासियों के सरना धर्म कोड को मान्यता दिए जाने की मांग को लेकर शुक्रवार को डीसी कार्यालय पर धरना दिया गया. अंत में डीसी के माध्यम से राष्ट्रपति के नाम ज्ञापन सौंपा गया. धरना पर बैठे वक्ताओं ने कहा कि प्रकृति की पूजा करने वाले 15 करोड़ आदिवासी इस देश के निवासी हैं. ये हिन्दू, मुस्लिम, सिख और ईसाई धर्म से ताल्लुक नहीं रखते हैं. प्रकृति की पूजा करने वाले आदिवासी सरना धर्म को मानते हैं और भारतीय संविधान में अभी तक सरना धर्म कोड को लागू नहीं किया गया है.
दो दशक से हो रहा आंदोलन
आदिवासियों के सरना धर्म कोड को मान्यता देने की मांग को लेकर आदिवासी सेंगेल अभियान की ओर से पूर्व सांसद सालखन मुर्मू के नेतृत्व में पिछले दो दशक से आंदोलन किया जा रहा है. बावजूद इस दिशा में अभी तक किसी तरह की पहल सरकार की ओर से नहीं की गई है. आदिवासी सेंगल अभियान के केंद्रीय संयोजक बिमो मुर्मू ने कहा कि अब भी इस दिशा में सरकार की ओर से पहल की जा सकती है.
ये हैं मांगें
संताली को हिंदी के साथ झारखं की राजभाषा बनाने, हो, मुंडा, कुड़ूख और खिड़ाया भाषा को 8वीं अनुसूची में शामिल करने, झारखंडी डोमिसाइल और अन्य संवैद्धानिक कानूनी अधिकारों की रक्षा करने, सीएनटी/एसपीटी एक्ट की रक्षा करते हुए वीर शहीद सिदो मुर्मू और बिरसा मां के वंशजों को सम्मान देने, सुरक्षा और समृद्धि के लिए दो ट्रस्टों का गठन करने, असम, अंडमान आदि के झारखंडी आदिवासियों को अविलंब अनुसूचित जनजाति का दर्जा देने, विस्थापन और पलायन पर रोक लगाने, शहीद सिदो मुर्मू के वंशज रामेश्वर मुर्मू और रूपा तिर्की के संदिग्ध मौतों की सीबीआई जांच कराने संबंधी मांगें शामिल हैं. धरना में आदिवासी सेंगेल अभियान के केंद्रीय महासचिव डॉ सोमाय सोरेन, जिला अध्यक्ष सीताराम माझी, सेंगेल परगना जूनियर मुर्मू आदि शामिल थे.
इसे भी पढ़ें- BIG BREKING : हथियार चमका कर बंगाल में वसूली कर रहा था जमशेदपुर का भाजपा नेता, चार साथियों संग गिरफ्तार




