
Ranchi: सदर अस्पताल में बच्चों के इलाज कराने आयी माताओं को घंटों इंतजार करना पड़ा. इंतजार करते-करते थक-हारकर ये मातायें डॉक्टर के चैंबर के पास बैठ गयीं. लेकिन, घंटों बीत गए, पर डॉक्टर नदारद ही रहे. इंतजार करते-करते कई मातायें वापस घर चली गईं. वहीं जो दूर-दराज से आये थे उनके लिए यह संभव नहीं था कि घर वापस जाकर दूसरे दिन फिर से आ सकें, इसिलिए वे इंतजार करते रहे. कांटाटोली से आई मोबीना ने बताया कि वह सुबह 10 बजे से ही अपने बच्चे का इलाज कराने आयी है. लेकिन, डॉक्टर बार-बार आते हैं और दस मिनट बैठने के बाद फिर उठ कर चले जाते हैं. धुर्वा से आई बेबी कुमारी ने बताया कि वे भी अपने बच्चे का इलाज के लिए सदर अस्पताल आई थीं. लेकिन, घंटों इंतजार करने के बाद भी ईलाज नहीं हुआ. सुबह दस बजे इलाज कराने आई थी और शाम के चार बजे गये. लेकिन, इलाज नहीं हुआ.
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भूखे-प्यासे परेशान होते रहे बच्चे
शनिवार को डॉ मृत्युजंय का ओपीडी था, लेकिन वे चेंबर में कम और मीटिंग में ज्यादा व्यस्त रहे. 10 मिनट में चेंबर में बैठकर एक दो पेसेंट को देखने के बाद बार-बार मीटिंग अटेंड करने चले जा रहे थे. इधर मरीजों की परेशानी बढ़ी हुई थी. भूख-प्यास से बेचैन बच्चे इंतजार कर रहे थे. चेंबर के बाहर खड़ी महिला गार्ड ने बताया कि सिर्फ एक डॉक्टर होने के कारण ऐसी परेशानी उत्पन्न हो जाती है. मीटिंग या कोई और काम होने से डॉ का चेंबर खाली हो जाता है और मरीज इलाज की आस में बैठे रहते हैं.
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लाल बिल्डिंग बुला कर किया गया इलाज
सदर अस्पताल में इलाज की उम्मीद लगाये घंटो से बैठे मरीज और उनके परिजन को आखिरी बेला में शाम साढ़े चार बजे लाल बिल्डिंग में बुलाया गया. जहां डॉ. लाल मांजी ने एक-एक कर मरीजों को अटेंड किया.
नर्स करती हैं बुरा व्यवहार
पिस्का मोड़ निवासी पप्पु कुमार ने बताया कि आठ दिन पहले अपनी बहन को भर्ती कराया था. उसी दिन डिलीवरी हो गया था, उसके बाद बच्चे और उसकी मां के ट्रीटमेंट के लिए नर्स से पूछने पर नर्स सीधे मुंह बात तक नहीं करती है. परेशान मरीज के परिजनों को और मरीजों को और ज्यादा परेशान किया जाता है. उन्होंने बताया कि जब नर्स से पूछने गये कि डिस्चार्ज कब करेंगे तो नर्स ने झिड़कते हुए कहा कि रहना है तो रहिये, नहीं बच्चे को लेकर चले जाइये.




