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NEWS WING IMPACT:  प्रशासन ने की सख्ती, पाकुड़ में बंद हुआ अवैध बालू उठाव

टीम के पहुंचते ही ट्रैक्टर लेकर भाग गये लोग

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Pakur/Ranchi: शुक्रवार को सुबह न्यूज विंग में “पाकुड़ में डीसी ने बनायी ऐसी व्यवस्था कि बालू माफिया के हो गए व्यारे-न्यारे” शीर्षक खबर के बाद एक बार फिर से खबर का असर हुआ है. पहले तो प्रशासन ने खबर को गलत बताया. यहां तक कि पाकुड़ के डीडीसी रामनिवास यादव ने एक व्हाट्सएप ग्रुप में लिखा कि पाकुड़ में ऐसा कुछ नहीं हो रहा है. वहीं दूसरी तरफ पाकुड़ के महेशपुर के कई घाटों में जिला खनन की टीम डीएमओ की अगुआई में पहुंची. टीम के पहुंचते ही बालू उठाव कर रहे लोग ट्रैक्टर लेकर वहां से भागने लगे. बालू का उठाव कर रहे मजदूरों भी काम छोड़ कर आराम करने लगे.

बालू उठाने वाले मजदूरों ने साफ कहा कि हमें यह नहीं पता है कि बालू कहां जाता है. हमारा काम बालू का उठाव कर ट्रैक्टर को भर देना है. आखिर हम रोजगार के लिए करें तो करें क्या. अब परिवार के सारे लोग दिल्ली मुंम्बई जाकर तो काम नहीं कर सकते. प्रशासन की सख्ती ने यह साबित कर दिया कि न्यूज विंग पर आयी खबर सही थी. प्रशासन के गलत निर्देश की आड़ में पाकुड़ में बालू माफिया चांदी काट रहे थे. दिन रात नदी से बालू का उठाव हो रहा था.

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बालू घाटों का सच, मजदूरों की जुबानी

बालू घाटों पर प्रशासन की दबिश के बाद बालू उठाव बंद हो गया. न्यूज विंग की टीम ने वहां पहुंच कर यह जानने की कोशिश की आखिर माजरा क्या है. मजदूरों ने प्रशासन के सारे दावों की पोल खोल कर रख दी. मजदूरों ने माना कि यहां से दिन रात बालू का उठाव हो रहा था.


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स्वच्छ भारत के नाम पर नदी से बालू साफ

पूरे देश में बालू को लेकर एक कानून चल रहा है. MOEF (Ministry of Environment & Forests) के नियमों के मुताबिक, मॉनसून तक किसी भी नदी एरिया में 15 अक्टूबर तक बालू का उठाव बंद है. निर्माण कार्य में उसी बालू का इस्तेमाल हो सकता है, जो कहीं स्टॉक है. उसके लिए भी लाइसेंस का होना जरूरी है. लेकिन इन सारे नियमों को पाकुड़ में ताक पर रख कर काम किया जा रहा है. इसी नियम का फायदा उठा कर पाकुड़ में बालू का खेल जोरों पर है. सुबह होते ही महेशपुर प्रखंड के बांसलोई नदी से बालू का उठाव धड़ल्ले से शुरू हो जा रहा है. जो रात तक होता रहता है.

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ब्लॉक लेवल से लेकर पाकुड़ समाहरणालय तक सारी चीजें सेट

यह MOEF के नियमों की सीधे तौर पर अनदेखी है. लेकिन इस बात से पाकुड़ प्रशासन को कोई फर्क नहीं पड़ता है. ब्लॉक लेवल से लेकर पाकुड़ समाहरणालय तक सारी चीजें सेट हैं. बालू आराम से लोड होकर बिना किसी रोक-टोक के बांग्लादेश पहुंच जा रहा है. हालांकि खनन विभाग के किसी भी वाहन की जांच की इजाजत पुलिस को नहीं है. लेकिन जहां तक MOEF कानून की बात है, पुलिस को पावर है कि वो बालू से लदे वाहनों की जांच करे. पुलिस ने ऐसा करना शुरू भी किया. लेकिन पाकुड़ प्रशासन ने बड़ी ही चालाकी से पुलिस के हाथ-पैर बांध दिए. एसडीएम की अध्यक्षता में हुई बैठक में पुलिस पदाधिकारियों को साफ कहा गया कि वो बालू के लदे किसी भी वाहन की जांच कतई नहीं करेंगे.

क्योंकि बालू स्टॉक एरिया से उठकर शौचालय निर्माण स्थल पर जा रहा है. डीसी का हवाला देते हुए, एसडीएम ने यह सरकारी फरमान पुलिस पदाधिकारियों को सुना दिया. इसके बाद से पुलिस के सामने नदी से लाद कर बालू सीमा पार पहुंच जा रहा है. और प्रशासन लोगों को कहते फिर रहा है कि मोदी जी का स्वच्छ भारत का सपना साकार हो रहा है

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