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तीन राज्यों ने लेबर लॉ में किये बदलावः जानिये क्या है इस संशोधन का चीन कनेक्शन और निवेश के नाम पर कैसे बढ़ेगा श्रमिक शोषण

NW Desk: देश के तीन राज्यों यूपी, मध्य प्रदेश और गुजरात ने हाल ही में लेबर लॉ में बदलाव किया है. जिसका विपक्षी पार्टियां विरोध भी कर रही हैं. इसे लेकर आठ विपक्षी दलों ने राष्ट्रपति को चिट्ठी भी लिखी है. इन राजनीतिक घटनाओं के बीच इस लेबर लॉ में बदलाव का चाइना कनेक्शन भी सामने आ रहा है.

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दरअसल श्रम कानून में हुआ सबसे बड़ा बदलाव तो ये है कि कंपनियों को वर्किंग आवर 12 घंटे करने की इजाजत मिल गई है. हालांकि, सरकार की दलील है कि सिर्फ वही कर्मचारी या मजदूर 8 घंटे से अधिक काम करेंगे, जो करना चाहेंगे.  लेकिन इस बात से इनकार नहीं किया जा सकता है कि कंपनियां इसका इस्तेमाल अपने फायदे और मजदूरों के शोषण के लिए कर सकती हैं. वहीं सरकारों का तर्क है कि इससे निवेश आकर्षित होगा  और नई नौकरियां पैदा होंगी.

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लेबर लॉ का चीन क्नेकशन

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नवभारत टाइम्स की खबर के मुताबिक, सरकार जिस निवेश आकर्षण की बात कर रही है, दरअसल वही लेबर लॉ का चीन कनेक्शन है. खबर है कि चीन से करीब 1000 कंपनियां निकलना चाह रही हैं और भारत की कोशिश है कि उन कंपनियों को अपनी ओर खींचा जा सके.

ऐसे में श्रम कानून में बदलाव कर इन कंपनियों को वैसा ही माहौल दिया जा सके, जैसा उन्हें चीन में मिला हुआ था. उल्लेखनीय है कि चीन में अधिकतर आइटी कंपनियों में 12 घंटे की शिफ्ट होती है.

मजदूरों का होगा शोषण

लेबर लॉ में ना सिर्फ काम की अवधि बढ़ाई जाने को मंजूरी मिली है. बल्कि श्रमिकों के बचाव के उपायों में भी ढील दी गई है, जिसे लेबर सेफ्टी के लिए सबसे अधिक जरूरी माना जाता है. फिलहाल देश में इतने सख्त नियमों के बावजूद कई कंपनियों में मजदूरों का शोषण होता है तो ऐसे में नियमों में ढील देने से तो कंपनियों को शोषण करने का एक हथियार ही मिल जाएगा.

12 घंटे की शिफ्ट यानी हफ्ते में 48 की जगह 72 घंटे काम

लेबल लॉ में बदलाव के तहत सरकारों ने काम करने के घंटों को रोजाना 4 घंटे बढ़ा दिया है. यानी जो पहले एक सप्ताह यानी 6 दिनों में 48 घंटे था, अब वह 72 घंटे हो जाएगा. बता दें कि चीन में बहुत सारी आइटी कंपनियों में 12 घंटे की शिफ्ट होती है.

8 की बजाये 12 घंटे की होगी एक शिफ्ट (फाइल फोटो)

इसे चीन में 996 वर्किंग आवर सिस्टम भी कहते हैं, क्योंकि इससे तहत सुबह 9 बजे से रात 9 बजे तक हफ्ते में 6 दिन काम होता है.

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क्यों कंपनियों को आकर्षित करता है चीन?

चीन में कंपनियों की रुचि के लिए दो चीजें काफी खास है पहला लेबर और दूसरा इंफ्रास्ट्रक्चर. श्रमिकों की बात करें तो एक तो वहां सस्ते दर पर लेबर मिलते हैं. ऊपर से चीन की कम्युनिस्ट सरकार लेबरों के लिए जो नियम बना देती है, उसे सबको मानना होता हैं. ऐसे में कंपनियों को मजदूरों को लेकर कोई दिक्कत नहीं होती है.  रही बात इंफ्रास्ट्रक्चर की तो चीन ने इंफ्रास्ट्रक्चर पर तो खूब काम किया ही है, जिससे कंपनियां चीन में अपने प्रोडक्शन हब लगा लेती हैं.

लेबर लॉ में क्या हुए बदलाव

उत्तर प्रदेश सरकार ने अगले तीन साल के लिए श्रम कानूनों से छूट देने का फैसला किया है. योगी सरकार ने उत्तर प्रदेश चुनिंदा श्रम कानूनों से अस्थाई छूट का अध्यादेश 2020′ को मंजूरी दी है, ताकि फैक्ट्रियों और उद्योगों को तीन श्रम कानूनों तथा एक अन्य कानून के प्रावधान को छोड़ बाकी सभी श्रम कानूनों से छूट दी जा सके. हालांकि, महिलाओं और बच्चों से जुड़े लेबर लॉ के प्रावधान और कुछ अन्य श्रम कानून लागू रहेंगे.

वहीं मध्यप्रदेश सरकार ने औद्योगिक विवाद अधिनियम और कारखाना अधिनियम सहित प्रमुख अधिनियमों में संशोधन किए हैं. प्रदेश में सभी कारखानों में वर्किंग आवर 8 घंटे से बढ़कर 12 घंटे की होगी. सप्ताह में 72 घंटे के ओवरटाइम को मंजूरी दी गई है.

गुजरात सरकार ने भी श्रम कानून आसान बनाते हुए 1,200 दिनों के लिए काम करने वाली सभी नई परियोजनाओं या पिछले 1,200 दिनों से काम कर रही परियोजनाओं को श्रम कानूनों के सभी प्रावधानों से छूट दी है. राज्य सरकार ने वैश्विक कंपनियों के लिए 33,000 हेक्टेयर जमीन की भी पहचान की है, जो चीन से अपना कारोबार स्थानांतरित करना चाहती हैं.’ न्यूनतम मजदूरी के भुगतान से संबंधित कानूनों, सुरक्षा मानदंडों का पालन करना तथा औद्योगिक दुर्घटना के मामले में श्रमिकों को पर्याप्त मुआवजा देना जैसे कानूनों के अलावा कंपनियों पर श्रम कानून का कोई अन्य प्रावधान लागू नहीं होगा.

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