
Ranchi: सरकारी स्कूल के बच्चों की पढ़ाई को लेकर शिक्षा विभाग केवल कागजों पर ही निर्णय ले रहा है. लॉकडाउन के बाद बच्चों की पढ़ाई के लिए व्हाट्सएप क्लास का लिया गया निर्णय हाथी के दांत ही साबित हुए हैं.
राज्य के लगभग 50 लाख स्टूडेंट्स में से केवल 3 लाख बच्चे ही व्हाट्सएप क्लास से जुड़ पाये हैं. शिक्षकों और अभिभावकों की मानें तो शिक्षा परियोजना की तरफ से व्हाट्सएप क्लास का निर्णय पूरी तरह से फेल हो गया है.
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रिजल्ट जारी करने को लेकर जैक के पास नहीं है जवाब
झारखंड शिक्षा परियोजना ने 8 मई को आदेश जारी करते हुए एक जून से क्लास 8वीं, 10वीं और 12 वीं की कक्षा शुरू करने का निर्णय लिया है. बाकि क्लास 15 जून के बाद शुरू होंगे. शिक्षा परियोजना का आदेश अव्यावहारिक है. क्योंकि 10वीं और 12वीं में वही स्टूडेंट्स क्लास करेंगे जो इस वर्ष 9वीं और 11वीं क्लास में हैं.
जैक की ओर से इन दोनों ही क्लास की परीक्षा पहली बार ओएमआर शीट पर ली गयी है. इसमें लिखित परीक्षा और इंटरनल मार्क्स के आधार पर रिजल्ट प्रकाशित करना है. स्थिति यह है कि अभी जैक 9वीं और 11वीं के स्टूडेंट्स का इंटरनल मार्क्स मंगा ही रहा है. इसका रिजल्ट भी अब तक जारी नहीं किया गया है. रिजल्ट कब जारी किया जायेगा इसका जवाब झारखंड एकेडमिक काउंसिल के पास भी नहीं है. ऐसे में 10वीं और 12वीं की कक्षा कैसे शुरू की जा सकती है.
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30 दिन कम हुआ स्कूलों का कार्यदिवस
बच्चों का सिलेबस पूरा कराने के लिए झारखंड शिक्षा परियोजना ने स्कूलों का कार्यदिवस ही कम कर दिया है. जहां पहले सामान्य दिनों में स्कूल 250 दिन चलते थे इस एकेडमिक इयर में केवल 220 दिन ही चलेंगे. यानी बच्चों की पढ़ाई 30 दिन कम करायी जायेगी. जारी आदेश के निर्णय के मुताबिक अब विद्यालयों में सुबह आठ से शाम चार तक पढ़ाई होगी. एक जून से 13 जून तक नामांकन प्रक्रिया चलेगी.
इस दौरान शिक्षक विद्यालय आयेंगे. वह नामांकन एवं उपस्थिति पंजी तैयार करने का काम करेंगे. वहीं कक्षा एक से सात तक की परीक्षा नहीं ली गयी है, लेकिन सभी बच्चों को अगली कक्षा में प्रमोट करने का निर्देश दिया गया है.
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प्रखंडों तक पहुंची किताबों पर परियोजना का ध्यान नहीं
शिक्षा परियोजना की ओर से स्कूलों के संचालन का निर्णय तो ले लिया गया लेकिन मार्च महीने से सभी प्रखंड़ों तक पहुंची किताबों पर कोई जिक्र नहीं हुआ है. जबकि बच्चों तक किताबें पहुंचाने को लेकर शिक्षा मंत्री जगरनाथ महतो ने भी आदेश दिया था. जेसीइआरटी की ओर बच्चों के घरों तक किताबें पहुंचाने की बात की गयी थी लेकिन इसके बाद कुछ अपरिहार्य कारण बताकर पुस्तक वितरण के काम को रोक दिया गया.




