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पलामू : आज भी नाले का दूषित पानी पीने को मजबूर हैं इस गांव के लोग, जर्जर स्कूल में सांपों का बसेरा

आजादी के 72 वर्षों के बाद भी पलामू जिले के इस गांव में सरकार लोगों को मूलभूत सुविधाएं भी नही उपलब्ध करा पायी है.

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Dilip Kumar

Palamu : देश 73वां स्वतंत्रता दिवस मनाने की तैयारी में जुटा है. सरकार के नुमाइंदे विकास की बड़ी-बड़ी बातें कर रहे हैं. लेकिन आजादी के 72 वर्षों के बाद भी पलामू जिले के इस गांव में सरकार लोगों को मूलभूत सुविधाएं भी नही उपलब्ध करा पायी है.

उबड़-खाबड़ रास्ते, न चिकित्सा सुविधा और न ही पेयजल की व्यवस्था, यही है पांकी प्रखंड में बसे इरगू गांव की पहचान. आजादी के बाद से ही यहां के लोग विकास के लिए तरस रहे हैं. ग्रामीणों ने कभी भी मजबूती से सुविधाओं की मांग नहीं की तो जनप्रतिनिधियों और प्राशासनिक अधिकारियों ने भी इस गांव के विकास पर ध्यान देने की जरूरत महसूस नहीं की.

प्रखंड मुख्यालय से करीब 25 किलोमीटर और लातेहार जिले के मनिका से लगभग दस किलोमीटर दूरी पर अवस्थित इरगू गांव में आदिवासी और खरवार जाति के करीब दो सौ घर है, जहां करीब 800-1000 लोग निवास करते हैं.

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नाला और चुआड़ी का दूषित पानी पीते हैं ग्रामीण

इस गांव में पेयजल की कोई व्यवस्था नहीं है. इस कारण यहां के लोग गंदे नाले और चुआड़ी का पानी पीने को विवश हैं. बरसात के दिनों में गंदे नाले का पानी पीने हमेशा गांव में महामारी होने का खतरा बना हुआ है.

गांव में कुछ चापानल तो हैं, लेकिन वे सभी शोभा के वस्तु बनकर रह गये हैं. एक चापानल चालू हालत में जरूर है, जो इरगू गांव से करीब पांच किलोमीटर की दूरी पर अवस्थित है.

गांव में एक नाला है, जिसका पानी गांव वाले लम्बे समय से पीते आ रहे हैं. बरसात के दिनों में जब नाले का पानी पूरी तरह से गंदा हो जाता है तो यहां रहने वाली आबादी चुआड़ी का सहारा लेती है.

पेयजल की मुकम्मल व्यवस्था नहीं होने से पानी जनित बीमारियों के लोग शिकार हो रहे हैं. पिछले दिनों डायरिया और टायफाइड जैसी बीमारी से गावं के तीन लोगों की मौत भी हो चुकी है.

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अब तक कोई जनप्रतिनिधि नहीं पहुंचा

आजादी के 72 वर्ष बाद भी इस गांव को पक्की सड़क नसीब नहीं हुई है. ग्रामीण पगडंडी से होकर एक-दूसरे गांवों को आते-जाते हैं. बरसात के दिनों में तो यह गांव बिल्कुल अलग-थलग पड़ जाता है. सबसे बड़ी विडम्बना की बात यह है कि इस गांव में अब तक कोई जनप्रतिनिधि नहीं पहुंचा है, ऐसा ग्रामीणों का आरोप है.

गांव में इलाज का कोई प्रबंध नहीं

इरगू में निवास करने वाले ग्रामीण बताते हैं कि जब कोई बीमार पड़ता है तो मरीज को खाट पर लादकर प्रखंड मुख्यालय या दूसरे गांव ले जाना पड़ता है. ग्रामीणों के मुताबिक इरगू गांव में स्वास्थ्य की कोई सुविधा उपलब्ध नहीं है.

जर्जर है विद्यालय भवन, सांपों का बसेरा

पलामू : आज भी नाले का दूषित पानी पीने को मजबूर हैं इस गांव के लोग, जर्जर स्कूल में सांपों का बसेरा
जर्जर स्कूल भवन.

शिक्षा के नाम पर गांव में एक न्यू प्राथमिक विद्यालय है, जिसका भवन पूरी तरह से जर्जर है. ग्रामीणों की मानें तो यह स्कूल कम और सांपों का बसेरा ज्यादा है. स्कूल भवन में खिड़की भी नहीं लगाये गये हैं. न यहां बेंच है, न डेस्क. इसके बावजूद यहां 50 बच्चे अपनी पढ़ाई करते हैं. इन बच्चों को फर्श पर बैठकर अपनी पढ़ाई करनी पड़ती है. यहां विषैले सांपों का भय हमेशा बना रहता है.

बिजली के पोल बने हैं शोभा की वस्तु

पांकी प्रखंड का इरगू गांव में विद्युतीकरण से भी कोसों दूर है. यहां बिजली के खम्भे तो गड़े हैं, लेकिन बिजली नहीं पहुंची है. आज भी यहां के लोग ढिबरी युग में जीने को मजबूर हैं.

विकास योजनाओं का नहीं मिलता लाभ

इरगू गांव में रहने वाले आदिवासियों को आवास, पेंशन जैसी योजनाओं का भी लाभ प्राप्त नहीं हो रहा है. यहां तक कि पीडीएस डीलर की मनमानी का भी इन्हें शिकार होना पड़ता है. ग्रामीणों की मानें तो उन्हें पांच किलो की जगह चार किलो ही अनाज दिया जाता है. यहां रोजगार का भी घोर अभाव है. यही कारण है कि यहां के पुरूष मजदूरी करने के लिए मनिका के बरवैया जाते हैं.

विकास की पहल तेज की जायेगी: बीडीओ

पांकी के प्रखंड विकास पदाधिकारी इन्द्रलाल ओहदार का कहना है कि रतनपुर पंचायत के इरगू गांव के किसी भी ग्रामीण ने अब तक बुनियादी सुविधाओं के अभाव की जानकारी नहीं दी है. उन्होंने कहा कि अब जब यह मामला उनके संज्ञान में आ गया है तो वहां विकास की पहल तेज की जायेगी. गांव में कैम्प लगाकर ग्रामीणों की समस्याओं का समाधाान किया जायेगा.

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