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ये है दुनिया का सबसे आलसी जानवर, पेड़ पर उल्टा लटक कर गुज़ार देता है ज़िंदगी लेकिन बेहतरीन तैराक भी है ये

New Delhi : अगर आपसे कोई ये पूछे कि दुनिया के सबसे तेज़ दौड़नेवाला जानवर कौन है तो आप बड़ी आसानी से बता देंगे चीता लेकिन अगर कोई आपसे ये पूछे कि दुनिया का सबसे आलसी जानवर कौन है तो बहुत कम लोग इसका सही जवाब दे पायेंगे. आइये आज हम आपको इस सबसे आलसी जानवर से परिचय कराते हैं.

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दक्षिण अमेरिका के उष्णकटिबंधीय जंगलों में पाया जाता है

ये जानवर इतना अधिक आलसी है कि अपनी पूरी ज़िंदगी उल्टा लटके हुए बिता देता है. इस जानवर का नाम स्लोथ है. मध्य और दक्षिण अमेरिकी उष्णकटिबंधीय जंगलों में ये शाकाहारी जानवर रहते हैं. धरती पर इसकी 6 तरह की प्रजातियां मौजूद हैं. दो जीववैज्ञानिक कुलों में ये 6 प्रजातियां बंटी हुई हैं. एक 2 उंगली वाले Megalonychidae और दूसरी 3 उंगली वाले Bradypodidae कहलाती है.

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बस एक पत्ती खाकर भी गुज़ार सकता है पूरा दिन

पेड़ों के ऊपर ही स्लोथ हमेशा लटके रहते हैं. इनके आलस की इंतिहा ये है कि वो क़रीब 90 फ़ीसदी हिस्सा अपनी ज़िंदगी का उल्टा लटके हुए ही गुज़ारता है. हिलता-डुलता भी इस दौरान वो बहुत कम है. यहां तक कि ये इसी स्थिति में मादा से संबंध बनाते हैं और ऐसे ही उल्टे लटके हुए मादा बच्चे पैदा करती है. स्लोथ का पाचन तंत्र भी बहुत ज़्यादा सुस्त होता है. वो बस एक पत्ती खाकर भी पूरा दिन गुज़ार सकता है.

दरअसल, एक पत्ती को पचाने में उसे महीनाभर लग जाता है. इसका फ़ायदा ये है कि स्लोथ बहुत कम खाना खाकर भी लंबे वक़्त तक जीवित रह सकता है.

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रोज़ क़रीब 15 से 20 घंटे तक सोता है

ज़्यादा सोने की वजह से इनकी मांसपेशियां तनकर स्थिर हो जाती हैं. फिर ये तभी ढीली होती हैं, जब स्लोथ इन्हें जागकर ढीला करता है. स्लोथ के पैर की सभी उंगलियां एक साथ ही मुड़ती और खुलती हैं. ये आलसी जानवर हर रोज़ क़रीब 15 से 20 घंटे तक सोता रहता है. बाकी के वक़्त में भी ये पेड़ पर ही रहता है.

इन्हें ये अलग-अलग नहीं खोल सकता. इनके शरीर क तापमान भी काफ़ी कम रहता है. ये क़रीब 86°F-93°F के कम शरीर के तापमान को बनाए रखते हैं.

ये इतना सुस्त होते हैं कि पूरे दिन में महज़ 41 गज की ही दूरी तय कर सकते हैं. साथ ही, ये जानवर बमुश्किल ही इधर-उधर चलता है. ये अगर भागने की भी कोशिश करें, तो इनकी स्पीड 3 किलोमीटर प्रति घंटा भी नहीं होती है.

कभी-कभी वो पेड़ से नीचे पानी में गिर जाते हैं, तो आसानी से तैरकर वापस पेड़ पर चढ़ जाते हैं. हालांकि, हैरानी की बाद ये है कि इतना सुस्त होने के बावजूद स्लोथ बेहतरीन तैराक होते हैं.

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ज़्यादा खाना नहीं खाते

सुस्त पाचन तंत्र के चलते इन्हें ज़्यादा खाना नहीं होता. ऐसे में खाने की तलाश भी नहीं करनी पड़ती. इधर-उधर देखने के लिए भी इन्हें मेहनत नहीं करनी पड़ती. प्रकृति स्लोथ पर कुछ ज़्यादा ही मेहरबान है. पेड़ पर रहने के चलते ये जगुआर और चील जैसे शिकारियों से बच जाते हैं. क्योंकि प्रकृति ने इनकी गर्दन में 10 नेक वेरटेबर दे दिया है. इससे ये अपनी गर्दन 270 डिग्री तक घुमा सकते हैं.

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