
NewDelhi : सुप्रीम कोर्ट ने मंगलवार को राहुल गांधी की याचिका स्वीकार करते हुएउन्हें दूसरा हलफनामा दायर करने की अनुमति दी है. इस मामले में अगली सुनवाई छह मई को होगी. सुप्रीम कोर्ट ने राहुल द्वारा दाखिल किये गये हलफनामे की भाषा पर नाराजगी व्यक्त की है. सीजेआई रंजन गोगोई ने सुनवाई के दौरान राहुल गांधी के वकील अभिषेक मनु सिंघवी से कहा कि ब्रैकेट में खेद जताने का क्या मतलब है.
अपने हलफनामें में राहुल गांधी ने कहा था कि चौकीदार चोर है बयान को गलत तरीके से सुप्रीम कोर्ट का बताने के लिए उनके हलफनामे में इस्तेमाल किया गया खेद शब्द एक तरह से माफी जैसा है. अब इस मसले पर अगली सुनवाई सोमवार , छह मई को होगी. अदालत की तरफ से राहुल गांधी को हलफनामा दायर करने के लिए एक और मौका दिया है, लेकिन इस मौके को ऐसा ना समझें कि माफी को स्वीकार कर लिया गया है.
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अदालत ने राहुल गांधी के हलफनामे की भाषा पर भी सवाल खड़े किये
सीजेआई रंजन गोगोई ने राहुल गांधी के वकील से पूछा कि जब हमने अपने फैसले में ये बातें (चौकीदार चोर है) नहीं कहीं तो ऐसा क्यों कहा जा रहा है. अदालत ने राहुल गांधी के हलफनामे की भाषा पर भी सवाल खड़े किये हैं. सीजेआई ने पूछा है कि दूसरा हलफनामा क्यों दाखिल किया गया है, आपने कहां पूरा खेद जताया है. सुनवाई के दौरान जस्टिस कौल ने राहुल गांधी के वकील अभिषेक मनु सिंघवी से कहा कि आप अपनी गलती जस्टिफाई कर रहे हैं. जिसपर सिंघवी ने अपनी बात रखने के लिए 10 मिनट मांगे, तो जज ने कहा कि आप 10 नहीं 30 मिनट लें, लेकिन जवाब दें.
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सिंघवी बोले कि खेद और माफी समान है
अभिषेक मनु सिंघवी ने कहा कि उनके हलफनामे में तीन गलतियां हैं, जिसको वह मानते हैं. उन्होंने कहा कि वह खेद प्रकट करते हैं, जो माफी समान ही है. उन्होंने कहा कि मैं तीन गलतियां मानता हूं, लेकिन हमारा राजनीतिक रुख भी है. सिंघवी बोले कि खेद और माफी समान है, चाहे तो वह डिक्शनरी दिखा सकते हैं. जिसपर अदालत ने कहा है कि उसमें उनकी कोई दिलचस्पी नहीं है. इस क्रम में सुप्रीम कोर्ट ने मीनाक्षी लेखी के वकील से पूछा कि राहुल पर अवमानना का मामला कैसे बनता है.
इस पर वकील ने राहुल का वह बयान पढ़कर सुनाया है, जिसमें उन्होंने कहा था कि सुप्रीम कोर्ट का बयान भी कह रहा है कि चौकीदार भी चोर है. इस दौरान उन्होंने कई मीडिया रिपोर्ट भी सामने रखीं. याचिकाकर्ता मीनाक्षी लेखी की ओर से मुकुल रोहतगी ने कहा कि बाहर वह लगातार इसे अपनी जीत बता रहे हैं. सुप्रीम कोर्ट ने जब किसी राजनीतिक नारे को तवज्जो नहीं दी है तो वह इसका इस्तेमाल कैसे कर रहे हैं.
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