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गिरिडीह के आजसू नेता का ट्रेडिशनल मसाला कारोबार बना जिले में चर्चा का विषय, परंपरागत तरीके से होती है मसालों का कुटाई

मसाले का स्वाद भी उसी अंदाज में

Manoj Kumar Pintu

Giridih : कोरोना महामारी के कारण खतरे में आए जनजीवन ने लोगों को कई सबक दिये हैं. कई तरह की आशंकाओं को लेकर लोग खुद बचत करना भी सीख गए. वहीं कुछ लोगों ने परंपरागत कारोबार को भी बढ़ावा दिया है. इस ट्रेडिशन से जुड़े कारोबार ने कई ग्रामीणों को रोजगार भी उपलब्ध कराया है.

यहां बात हो रही है गिरिडीह के डुमरी की. यहां डुमरी के आजसू नेता रहे छोटू महतो ने अब खुद से देसी मसालों का कारोबार शुरू किया. आजसू नेता छोटू महतो द्वारा ट्रेडिशन अंदाज में मसाला कूटने के बाद उसकी पैकेजिंग कर बाजार में आपूर्ति करते है. उसकी चर्चा जिले में अधिक है. क्योंकि देशी तरीके से कुटाई किए गए मसालों का टेस्ट अलग रहता है.

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हरियर उलगुलान मसाला उद्योग

फिलहाल छोटू महतो के साथ कई अन्य ग्रामीण भी मसाला कारोबार में काम कर रहे है. ढेकी से मसाला के साथ दाल और चावल को कूट कर उसका पैकेट भी तैयार किया जाता है. डुमरी के भरखर में आजसू नेता छोटू महतो ने अपने इस ट्रेडिशन कारोबार का नाम भी झारखंडी स्टाइल में रखते हुए हरियर उलगुलान मसाला उद्योग रखा है.

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मशीन का नहीं होता इस्तेमाल

शुरुवाती दौर में आजसू नेता बैदनाथ महतो उर्फ छोटू ने 30 एकड़ जमीन पर हल्दी की खेती शुरू की थी. इसके बाद इसे पिछले दो वर्षों में बढ़ाते हुए अनाज और मसाला की कुटाई और पैकेजिंग भी शुरू की. इसमें मशीन का इस्तेमाल कहीं भी नहीं होता. पुराने जमाने में जिस तरह अंदाज में लकड़ी का हल जमीन से सेट कर मसाला बनाया जाता था, उसी पारंपरिक अंदाज को आजसू नेता छोटू महतो ने अपनाया, और मसाला बनाना शुरू किया. इस दौरान न्यूज विंग से हरियर उलगुलान मसाला उद्योग को लेकर छोटू महतो और उनके मजदूरों ने खास बातचीत की.

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