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एनडीपीएस एक्ट के तहत 450 मामला चतरा कोर्ट में है विचाराधीन : पीडीजे

Chatra : आजादी का अमृत महोत्सव को लेकर कानूनी जागरूकता अभियान चलाया जा रहा है. डालसा के माध्यम से गांव-गांव तक सरकारी योजनाओं में आम जनता के अधिकारों के प्रति जागरूक किया जा रहा है. उक्त बातें प्रिंसिपल जिला जज राकेश कुमार सिंह ने अपने चेम्बर में आयोजित प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान कही. उन्होंने बताया कि जिले में फिलहाल अवैध अफीम, ब्राउन शुगर, डोडा, पोस्ता से सम्बंधित लगभग 450 एनडीपीएस एक्ट के तहत मामला कोर्ट में विचाराधीन है.

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इस प्रकार के कारोबार से न केवल वर्तमान नस्ल बल्कि आने वाले नस्ल पर भी कुप्रभाव पड़ता है.इस बाबत क़ानूनी नुकसान को लेकर जागरुकता फैलाने का कार्य किया जा रहा है. उन्होंने बताया कि मामले में सात साल से लेकर उम्र कैद तक की सजा का प्रावधान है. पीडीजे ने बताया कि जिस भूमि पर पोस्ता अफीम की खेती की जाती वे भूमि बंजर हो जाती है. इस काम में लिप्त परिवारों के जीवन पर प्रतिकूल असर होता है. इस मादक पदार्थों के उपयोग से देश की युवा शक्ति खोखला हो रही है. पीडीजे श्री सिंह कहते हैं कि पोस्ता अफीम की खेती का ग्राम स्तर पर विरोध किया जाना चाहिए. डालसा के द्वारा पोस्ता अफीम की कारोबार से उत्पन्न दुष्परिणाम की जानकारी घर-घर तक पहुंचाया जा रहा है.

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कब बना कानून

एनडीपीएस एक्ट की धारा 20 में ड्रग्स का उत्पादन करने, बनाने, रखने, बेचने, खरीदने, दूसरी जगह भेजने, एक राज्य से दूसरे राज्य में आयात या निर्यात करने और इस्तेमाल करने पर सजा का प्रावधान है. धारा 20 में क्लॉज दो के (a) में कहा गया है कि अगर किसी व्यक्ति के पास प्रतिबंधित ड्रग्स की कम मात्रा पाई जाती है तो उसे 6 महीने तक की जेल या 10 हजार रुपये का जुर्माना या दोनों सजा हो सकती है.

भारतीय संसद ने साल 1985 में नशीले पदार्थों को बेचने, बनाने और सेवन को लेकर नारकोटिक्स ड्रग्स

साइकोट्रोपिक सब्सटेंस एक्ट 1985 ( NDPS) पारित किया था. धारा 20 में क्लॉज दो के (b) में कहा गया है कि अगर किसी व्यक्ति के पास कम मात्रा से अधिक प्रतिबंधित नशीला पदार्थ पाया जाता है तो, ऐसे व्यक्ति को 10 साल तक की जेल हो सकती है और 1 लाख रुपये तक का जुर्माना लगाया जा सकता है. इस एक्ट के तहत पुलिस भी कार्रवाई कर सकती है. इसके अलावा केंद्र और राज्यों में अलग से नारकोटिक्स विभाग भी होते हैं. नशीले पदार्थों से जुड़े मामलों में कार्रवाई करने वाली सर्वोच्च जांच संस्था नारकोटिक्स कंट्रोल ब्यूरो है. इसकी स्थापना 17 मार्च, 1986 को हुई थी.

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