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खूंटी सांसद के गोद लिये गये गांव का हालः कहने को आर्दश गांव, सड़क, बिजली, पेयजल सुविधा से महरूम हैं तिलमा के ग्रामीण

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  • सांसद कड़िया मुंडा ने लिया है इस गांव को गोद
  • घर-घर पाइप लाइन से जलापूर्ति करने का दावा फेल, तीन टोलो में है जलमीनर लेकिन घर तक नहीं पहुंचता पानी

Pravin kumar

Ranchi:  लोकसभा चुनाव के शंखनाद के बाद राजनीतिक दलों के द्वारा वोटरों को रिझाने के लिए विकास के नये-नये दावे वोटरों के समक्ष परोसने और उन्हें रिझाने का सिलसिला शुरू हो जायेगा. लेकिन इस बीच, 16वीं लोकसभा में चुने गये सांसदों के द्वारा गांव की तकदीर बदलने के दावे की पड़ताल करना भी कम दिलचस्प नहीं होगा. किसी गांव को सांसद के द्वारा गोद लेकर उसे शहर जैसी सुविधा से लैस करने की कवायद प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने 11 अक्टूबर 2014 को शुरू की थी.

इसके बाद सभी सांसदों ने गांव को गोद लेकर विकास करने की बात कही थी. इसी कड़ी में खूंटी सांसद ने अपने लोकसभा क्षेत्र के दो गांवों को गोद लिया था. सांसद कड़िया मुंडा के गोद लिये तिलमा गांव में कितना विकास हुआ है और क्या परिवर्तन आया है, न्यूजविंग ने इसकी पड़ताल की है. आर्दश गांव तिलमा की पूरी रिपोर्ट पढ़िये.

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क्या कहा था सांसद ने गांव गोद लेने के समय

अप्रैल 2016 के तीसरे सप्ताह, दिन मंगलवार को उत्क्रमित मध्य विद्यालय तिलमा में आयोजित कार्यक्रम में सांसद द्वारा गांव को गोद लेकर आदर्श गांव बनाने की घोषणा की गयी थी. सांसद ने अपने संबोधन में कहा था, तिलमा गांव ही नहीं पूरे तिलमा पंचायत का विकास करने की जरूरत है. तिलमा पंचायत के सभी गांव को मॉडल बनाने की जरूरत है.

इस पंचायत में वो सारी सुविधा उपलब्ध होगी, जो शहर में उपलब्ध है. स्कूल, अस्पताल, बिजली, पीसी रोड, नाली, सड़क, डीप बोरिंग के माध्यम से घर-घर पाइप लाइन से जलापूर्ति सहित कई सुविधाएं उपलब्ध करायी जायेंगी. इसके अलावा लोगों को आगे बढ़ने के लिए प्रोत्साहित करना है. पशुपालन, मत्स्य, कौशल विकास सहित अन्य योजनाओं से उन्हें आत्मनिर्भर बनाना है.

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कहां अवस्थित है तिलमा

खूंटी जिला मुख्यालय से 25 किलोमीटर दूर खूंटी-तैमारा सड़क पर स्थित है तिलवा गांव. यहां  करीब 325 परिवार का बसाहट है. 11 टोलों में बंटा तिलमा गांव इलाके का बड़े गांव में से एक है. यह गांव आज भी अपनी तकदीर सुधरने के लिए सांसद कड़िया मुंडा की बांट जोह रहा है. ग्रामीण कहते हैं सांसद पिछले पांच साल में गांव को गोद लेने की घोषणा करने के लिए गांव आये थे, फिर दोबारा नहीं आये.

गांव में अगर कुछ नया हुआ है तो 5 सालों में 3 टोला में जल मीनार लगाये गये हैं. लेकिन घरों तक पानी नहीं पहुंच सका. पेयजल की जरूरत पूरा करने के लिए ग्रामीण परंपरागत जल स्रोत डांडी पर ही निर्भर हैं. वहीं गांव के कई टोलों की सड़कें कच्ची है. बरसात में चलने के योग्य नहीं रह जातीं. गांव में स्वास्थ्य केंद्र नहीं है. वहीं खेती के लिए कोई सिंचाई का साधन नहीं है.

शिक्षा के नाम पर उत्क्रमित मध्य विद्यालय है. सांसद जब गांव गोद लेने की घोषणा करने अप्रैल 2016 में जब गांव पहुंचे थे, तो उस कार्यक्रम में उत्क्रमित मध्य विद्यालय के प्रधानाध्यापक कार्तिक की ओर से विद्यालय में पेयजल की समस्या, कक्षा की कमी और चहारदीवारी बनाने का आवेदन दिया था. जिसे सांसद कड़िया मुंडा ने सभा में पूरा करने का वादा किया था. लेकिन आज तक विद्यालय की चहारदीवारी नहीं बन सकी. चार कमरों का निर्माण पिछले दो साल से किया जा रहा है, अभी तक पूरा नहीं हुआ. गर्मी में पेयजल की समस्या विद्यालय में हो जाती है.

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गांव में कोई नया काम नहीं हुआः राज मुंडा

गांव के युवा राज मुंडा कहते हैं, मेरे गांव में कोई नया काम नहीं हुआ है, जो दूसरे गांव से अलग है. गांव में जलापूर्ति के लिए तीन टोला में जलमीनार बना है. परन्तु आज तक किसी के घर में एक बूंद पानी पाईप से नहीं पहुंचा.

विकास कार्य के बारे में पूछे जाने पर ग्रामीणों का कहना है कि कुछ पीसीसी सड़क बनी और कुछ लोगों को उज्ज्वला योजना के तहत गैस कनेक्शन मिला है. गांव में बिजली के पोल लगाये गये हैं, लेकिन सभी के घरों तक कनेक्शन नहीं पहुंचा है. पोल और तार गांव की शोभा बढ़ा रहे हैं. इसके अलावा अब तक कोई काम पंचायत के किसी गांव में नहीं हुआ है.

क्या कहते है ग्राम प्रधान राम सिंह मुंडा

सांसद सिर्फ एक बार गांव आये फिर दोबारा नजर नहीं आये. सांसद ने गांव को गोद लेकर विकास कार्य कुछ भी नहीं किया गया है, जो दूसरे गांव से अलग हो.

आज भी गांव को पानी, बिजली, स्वास्थ्य सुविधा और बच्चों की शिक्षा जैसी सुविधा से वंचित रहना पड़ रहा है. गांव में शौचालय निर्माण भी आधा-अधूरा हुआ है. सिंचाई का कोई साधन नहीं है. रोजगार नहीं है. पिछले पांच सालों में गांव में कोई खास विकास कार्य नहीं किया गया.

गांव के विकास को लेकर क्या कहते हैं उप मुखिया सोमा पहान सोमा

गांव में तीन जल मीनार नहीं, बल्कि दो जल मीनार नया बना है. लेकिन पानी का कनेक्शन घरों तक नहीं किया गया है. गांव में बिजली की समस्या है. दो टोला के घरों में कनेक्शन किया गया था, लेकिन बिजली नहीं होने के कारण ग्रामीणों ने कनेक्शन लेने से इंकार कर दिया. गांव में पोल और बिजली के तार दिखते हैं, लेकिन बिजली सभी घरों में नहीं पहुंची. गांव के तीन टोला की सड़कें  खराब हैं.

क्या हैं सांसद आदर्श ग्राम योजना के उद्देश्य

  • पहचानी गईं ग्राम पंचायतों के समग्र विकास के लिए नेतृत्व की प्रक्रियाओं को गति प्रदान करना.
  • जनसंख्या के सभी वर्गों के जीवन की गुणवत्ता के स्तर में सुधार निम्न माध्यमों से करना-बुनियादी सुविधाएं में सुधार, उच्च उत्पादकता, मानव विकास में वृद्धि करना, आजीविका के बेहतर अवसर, असमानताओं को कम करना, अधिकारों और हक की प्राप्ति.
  • स्थानीय स्तर के विकास और प्रभावी स्थानीय शासन के मॉडल इस प्रकार बनाना जिससे आस-पड़ोस की पंचायतें प्रेरित और प्रोत्साहित होकर उन मॉडल को सीखने और अपनाने के लिए तैयार हों.

क्या कहते हैं ग्रामीण

सांसद की ओर से पंचायत के विकास का दिया गया भरोसा खोखला साबित हुआ. ग्रामीण विकास कार्य नहीं किये जाने और शहरों जैसी सुविधा गांव में मिलने के दावे को खोखला बता रहे हैं. युवाओं में जनप्रतिनिधियों के झूठे दावों से नाराजगी है. तिलमा के युवा कहते हैं, कड़िया मुंडा कई बार सांसद बने. लेकिन गांव की दशा आज भी बदहाल है.

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योजनाएं, जो ठंडे बस्ते में पड़ी हैं  

विकास योजना के संबंध में जिला प्रशासन खूंटी से मिली जानकारी के अनुसार, तिलमा पंचायत में 40 पीसीसी सड़क के निर्माण का प्रस्ताव भेजा गया है. इसके अलावा 31 गाय शेड, बकरी शेड, कूप, चेकडैम, बेरोजगारों को प्रशिक्षण, सभी योग्य लोगों को पेंशन, गगरी नदी से तीन नहर के निर्माण का भी प्रस्ताव संबंधित विभाग को भेजा गया है.

इसके अलावा प्रधानमंत्री आवास, पांच जलमीनार और चापानल, डीप बोरिंग, सरना पूजा स्थल की घेराबंदी, सोलर लाइट लगाने की योजना है. जिला प्रशासन ने इन सभी विकास कार्यों का प्रस्ताव स्वीकृति के लिए संबंधित विभाग को भेज दिया था जिसके पांच साल होने को हैं. लेकिन एक-दो को छोड़ कर कोई भी कार्य पूरा नहीं हो सका.

तिलमा की डेमोग्राफी (जनसांख्यिकी)

तिलमा गांव में 11 टोला हैं. पंचायत में कुल 12 गांव हैं. तिलमा, संडासोम, हटिंगचौली, पुटीदाग, डंगियादाग, कुजराम, तारूब, लतारहातू, बाड़ीलोंग, ओमटो, हाकाडूबा और करोड़ा. पंचायत की कुल आबादी 6573 है. इनमें अनुसूचित जनजातियों की आबादी 6032 है. अनुसूचित जाति की कुल जनसंख्या 141 और अन्य जातियों की संख्या 400 है. पंचायत में महिलाओं और पुरुषों की आबादी क्रमश: 3294 और 3279 है. पंचायत में कुल 1311 परिवार निवास करते हैं. पंचायत में औसत साक्षरता दर 55 प्रतिशत है. हालांकि कुजराम एक ऐसा गांव है, जहां की साक्षरता दर 93.95 फीसदी है.

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