
Ranchi: कोल ब्लॉक में पेंच और खनन शुरू नहीं होने के कारण तीन प्रमुख कोल ब्लॉक बनहर्दी, राजबार और मौर्या हाथ से निकल सकता है. छह दिसंबर 2015 को बनहर्दी कोल ब्लॉक का आबंटन मिला था. इस कोल ब्लॉक के कोयले का उपयोग पतरातू में बन रहे 4000 मेगावाट के पावर प्लांट में किया जाता. पावर प्लांट बनने में दो साल की देरी हो गई है. इस कारण खनन शुरू नहीं हो पाया है. कोल ब्लॉक में मौजूद कोयले की कीमत 40 हजार करोड़ रुपये आंकी गई है.
10 वर्ग किलोमीटर तक हो चुकी है ड्रिलिंग
बनहर्दी कोल ब्लॉक के 10 वर्ग किलोमीटर में ड्रिलिंग हो चुकी है. इसमें 900 मिलियन टन कोयला का अनुमान लगाया गया है. शेष आठ वर्ग किलोमीटर में 600 मिलियन टन कोयले का अनुमान लगाया गया है. हरियाणा की साउथ वेस्ट पिनाकल कंपनी ने 10 वर्ग किलोमीटर में ड्रिलिंग की है. 14 करोड़ में इसकी जूलॉजिकल रिपोर्ट खरीदी गई. लातेहार के चंदवा में 4600 एकड़ में बनहर्दी कोल ब्लॉक है. बनहर्दी कोल ब्लॉक से 35 साल तक पावर प्लांट के लिये कोयला उपलब्ध होता. हर साल 10 मिलियन टन कोयला निकालने का लक्ष्य रखा गया था. इस हिसाब से 35 साल में 350 मिलियन टन कोयला निकाला जाता.
राजबार कोल ब्लॉक से भी खनन नहीं
इसी तरह टीवीएनएल को लातेहार के समीप राजबार कोल ब्लॉक आबंटित किया था. इसमें 500 मिलियन टन कोयले का अनुमान लगाया गया है. इसका माइनिंग प्लान भी केंद्र को भेज दिया गया है. लेकिन टीवीएनएल के विस्तारीकरण का काम पूरा नहीं होने के कारण इस कोल ब्लॉक से भी खनन शुरू नहीं हो पाया है. टीवीएनएल में विस्तारीकरण की तरह 660 मेगावाट की दो यूनिटें लगाई जानी हैं. लगभग दो साल पहले टीवीएनएल के विस्तारीकरण को कैबिनेट से मंजूरी मिली थी.
मौर्या कोल ब्लॉक की स्थिति जस की तस
तत्कालीन बिजली बोर्ड को मौर्या कोल ब्लॉक आबंटित किया गया था. यह कोल ब्लॉक भवनाथपुर में लगने वाले 1320 मेगावाट के पावर प्लांट के लिये मिला था. इसमें 225 टन कोयले का अनुमान लगाया गया. सीएमपीडीआई से आठ करोड़ में जूलॉजिकल रिपोर्ट खरीदी गई थी. पूर्व सीएम हेमंत सोरेन में इस पावर प्लांट का शिलान्यास किया था. लेकिन यह प्रोजेक्ट ही खत्म हो गया.
डेढ़ लाख करोड़ की परियोजनायें लंबित
कोल ब्लॉक व आयरन ओर की खदानों में पेंच फंसे होने के कारण राज्य में लगभग डेढ़ लाख करोड़ की परियोजनायें लंबित हैं. 79 कोल ब्लॉक व आयरन ओर को खनन का लाइसेंस नहीं मिला है. सिर्फ 19 कंपनियों को ही पीएल लाइसेंस(खनन से पहले ड्रिल कर खनिज का पता लगाने का लाइसेंस) मिला. ओएनजीसी और आइओसी को हजारीबाग, बोकारो और धनबाद में कोल बिड मिथेन की निकासी के लिये पेट्रोलियम एक्सप्लोजन का लाइसेंस मिला है. वहीं खदानों में पेंच होने के कारण हर माह 50 करोड़ रुपये वाणिज्य कर का नुकसान हो रहा है. खनिजों से पांच फीसदी वाणिज्य कर की प्राप्ति होती है.
इन कंपनियों को पीएल लाइसेंस
जय प्रकाश मेहता- अबरक, क्वार्ट्ज और फेलास्फर
नटवर लाल- मैगनीज व आयरन ओर
संतोष कुमार- ग्रेनाइट
शीशा गोआ- आयरन ओर
जेएसडब्ल्यू- आयरन ओर व मैगनीज
टीवीएनएल- कोयला
श्यामल साव- फे लास्फर
एमएमटीसी- कोयला
सीएससी- कोयला
ऊजंदल- कोयला
एस्सार- आयरन
टाटा स्टील- आयरन
ऊबजली बोर्ड- कोयला
मो शेख रफीक- फेलास्फर व क्वार्ट्ज
बंगाल एम्टा- कोयला
राजकुमार साह- लाइम स्टोन
10 कोल ब्लॉक को फॉरेस्ट क्लीयरेंस नहीं
कोरी- 226.67 हेक्टेयर
रजरप्पा- 277.15 हेक्टेयर
घोरी- 25.40 हेक्टेयर
खास महल- 14.99 हेक्टेयर
अमलो- 39.664 हेक्टेयर
तारसी- 97.44 हेक्टेयर
चुरी बेती- 65.84 हेक्टेयर
पुर्नाडीह- 295.48 हेक्टेयर
पिंडरा- 4.00 हेक्टेयर
पुंडी- 353.65 हेक्टेयर
खदानों के बंद होने से क्या हो रहा नुकसान
रेलवे को हर दिन लगभग दो करोड़ का नुकसान हो रहा है. साथ ही लगभग 10 करोड़ की मजदूरी का नुकसान भी बताया जा रहा है. वहीं दो लाख मजदूरों के रोजगार पर भी आफत बन आयी है. इसके अलावा वाहनों से प्राप्त होने वाले टैक्स का भी नुकसान हो रहा है.
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