
Ranchi : करीब 1.57 करोड़ रुपये के अलकतरा घोटाले मामले की सुनवाई आज जस्टिस अनिल कुमार चौधरी की अदालत में मामले की सुनवाई हुई. मामले की सुनवाई करते हुए अदालत ने आरोपी पीएंडटी के निदेशक केदार पासवान को 15 हजार रुपये के फाइन के साथ सजामुक्त कर दिया है. सुनवाई के दौरान वरीय अधिवक्ता अजीत कुमार ने याचिकाकर्ता आरोपी केदार पासवान की तरफ से पक्ष रखते हुए कहा कि यह आपराधिक मामला पिछले 26 सालों से चल रहा है.
ऐसे में महज 15000 रुपये के कथित रिश्वत के आरोप में केदार पासवान को 7 साल की सजा हुई थी. इसमें उन्होंने करीब 3 साल की सजा पूरी कर ली है.
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लगातार हिरासत में रहने के कारण 73 वर्षीय केदार पासवान की तबीयत काफ़ी खराब रहती है. हाल ही में उनकी एंजियोप्लास्टी हुई है. इसके साथ ही वे मधुमेह से भी पीड़ित हैं.
ऐसे में अधिवक्ता अजीत कुमार ने अदालत से आरोपी की सजा माफ करने का आग्रह किया. ऐसे में आग्रह को स्वीकार करते हुए आरोपी की सजा घटा कर 15 हजार रुपये के फाइन के साथ उसे सजामुक्त कर दिया.
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क्या है पूरा मामला
बता दें कि वर्ष 1994 में आरसीडी रोड डिविजन चतरा के तहत सड़कों का निर्माण कार्य किया जाना था. इसके लिए हल्दिया ऑयल रिफाइनरी कोलकाता से अलकतरा आना था. लेकिन मंत्री व इंजीनियरों ने कंपनी से साठगांठ कर सरकार को करोड़ों का चूना लगाया. सीबीआइ की तफ्तीश में सरकार को चूना लगाने के सबूत मिले हैं.
आइओसी कोलकाता को 17 अगस्त 1994 को 1500 मीट्रिक टन अलकतरा, 29 जुलाई 1995 को 1000 मीट्रिक टन, 17 अगस्त 1995 को 500 मीट्रिक टन एवं 29 जनवरी 1996 को 250 मीट्रिक टन अलकतरा भेजा गया.
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कुल 3266 मीट्रिक टन अलकतरा अवैध तरीके से बेच दिया गया. उसकी कीमत उस समय 1.57 करोड़ रुपये थी.
ये काट रहे हैं सजा
पूर्व मंत्री मो. इलियास हुसैन, मंत्री के सचिव शहाबुद्दीन बेग, उपनिदेशक मुजतबा अहमद, कार्यपालक अभियंता रामानंद राम, सेक्शन पदाधिकारी शोभा सिन्हा एवं ट्रांसपोर्टर आपूर्तिकर्ता डीएन सिंह.
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