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सौ यूनिट फ्री बिजली का वायदा भूल गयी सरकार, तय कर दिया चार सौ यूनिट का लिमिट

Chhaya

Ranchi: झारखंड में सरकार सौ यूनिट फ्री बिजली देने का वायदा करके भूल गयी है. अब तक सौ यूनिट फ्री बिजली पर कोई निर्णय नहीं ले पायी है. इसके उलट सरकार उपभोक्ताओं को राहत देने के बजाय सब्सिडी में कटौती कर रही है. इसके लिये अपर लिमिट भी तय कर दी गयी है. जो चार सौ यूनिट है. उर्जा विभाग की मानें तो सौ यूनिट फ्री बिजली पर राज्य सरकार अब तक कोई निर्णय नहीं ले पायी है. पिछले साल झारखंड बिजली वितरण निगम को सौ यूनिट फ्री बिजली के लिये सब्सिडी की बात की गयी थी.

लेकिन इस पर आगे कोई निर्णय नहीं लिया गया. उपभोक्ताओं को सब्सिडी मिलने पर राज्य सरकार सब्सिडी राशि निगम को देती. याद दिला दें कि सत्ता में आने के पहले चुनावी घोषणा का अहम बिंदू सौ यूनिट फ्री बिजली रहा. लेकिन अभी तक राज्य सरकार इस पर कोई निर्णय नहीं ले पायी है.

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सब्सिडी राशि का आंकलन नहीं: जेबीवीएनएल की मानें तो सौ यूनिट फ्री बिजली के लिये सब्सिडी राशि का अब तक आंकलन नहीं किया गया है. ऐसे में निगम को राज्य सरकार से मिलने वाले राशि की जानकारी नहीं दी जा सकती. जबकि निगम को ये राशि स्वीकृत करने के बाद ही उपभोक्ताओं को इसका लाभ दिया जायेगा. जबकि राज्य में घरेलू उपभोक्ताओं की संख्या लगभग 32 लाख है. जिसमें ग्रामीण और शहरी उपभोक्ता शामिल है.

चार सौ यूनिट कटौती की तैयारी: चार सौ यूनिट से अधिक बिजली बिल जलाने वाले उपभोक्ताओं को सब्सिडी का लाभ नहीं दिया जायेगा. पिछले सप्ताह राज्य कैबिनेट में इसका निर्णय लिया गया. इसमें शहरी घरेलू, ग्रामीण घरेलू, कृषि समेत अन्य उपभोक्ताओं को शामिल किया गया है. जो अधिक खपत पर सब्सिडी से वंचित होंगे. वहीं, कर्मिशयल और एलटीआइएस उपभोक्ताओं को पहले भी सब्सिडी का लाभ नहीं दिया जाता है. ऐसे में इस योजना में कार्मिशयल उपभोक्ताओं को कोई फर्क नहीं पड़ने वाला.

210 करोड़ का सालाना बचत: निगम की मानें तो सरकार को हर महीने नयी योजना से 18 करोड़ राजस्व में बचत होगी. इससे निगम को ये राशि नहीं दी जायेगी. वहीं सालाना लगभग 210 करोड़ की बचत होगी. ऐसे में उपभोक्ताओं के साथ साथ निगम को भी इस योजना से नुकसान है. निगम को हर महीने सरकार 160 करोड़ रूपये सब्सिडी राशि देती है. इस राशि में 18 करोड़ रूपये की कटौती की जायेगी. वर्तमान में घरेलू उपभोक्ता प्रति यूनिट 6.25 पैसे बिजली जलाते है. जिसमें सब्सिडी प्रति यूनिट है. वहीं ग्रामीण घरेलू उपभोक्ता 5.75 रूपये प्रति यूनिट भुगतान करते है. जानकारी हो कि बिजल वितरण निगम के संचालन में सब्सिडी का अहम योगदान है. पिछले कुछ सालों से निगम नुकसान में है. जो लगभग छह हजार करोड़ रूपये है.

क्या है सरकार का फैसला: हेमंत सरकार की कैबिनेट ने 400 यूनिट से ज्यादा बिजली खपत करने वालों की सब्सिडी हटा दी है. सरकार ने ऐसे सभी उपभोक्ता जो 400 यूनिट से ज्यादा बिजली की खपत करते हैं उन्हें सब्सिडी नहीं देने का निर्णय लिया है. ऐसे उपभोक्ताओं को सब्सिडी का लाभ नहीं देने से राज्य सरकार को 210 करोड़ की बचत होगी.

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