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जेल की हवा खा चुकी चार्जशीटेड दरोगा मीरा सिंह का हनक ऐसा कि डीजीपी को तबादला आदेश लेना पड़ा वापस

Ranchi: झारखंड की राजधानी रांची में गुरुवार को ईडी की टीम ने तुपुदाना रांची की थाना प्रभारी दारोगा मीरा सिंह, करीबी जमीन कारोबारी सह कांग्रेस के प्रदेश सचिव लाल मोहित नाथ शाहदेव के तुपुदाना स्थित आवास पर छापेमारी कर रही है. अब तक आधा दर्जन से अधिक मोबाइल और 15 लाख नगद जब्त किया गया है. ईडी यह छापेमारी जमीन घोटाले से जुड़े मामले को लेकर कर रही है. 2012 बैच की दारोगा मीरा सिंह सत्ता के करीबी रही हैं. बताया जाता है कि सत्ता का हनक ऐसा है कि तुपुदाना ओपी प्रभारी रहते मीरा सिंह पर गंभीर आरोप लगे. लेकिन सहयोगी मीरा सिंह को बचाने में जी जान से जुट गए. पद से हटाने की भी अनुशंसा पर डीजीपी ने हजारीबाग स्थानांतरित करने का आदेश जारी किया था.

लेकिन अपने रसूख के बल पर मीरा सिंह ने स्थानांतरण को रुकवाया. डीजीपी को अपना आदेश वापस लेना पड़ा. उसके बाद महकमे में यह चर्चा होने लगी कि बिना सत्ताशीर्ष के सहयोग के बिना मीरा सिंह को मदद नहीं हो सकती है. इस आदेश को लेकर विभाग में तरह-तरह की चर्चाएं होने लगी थी. मीरा सिंह का दबदबा एवं प्रभाव काफी जबरदस्त माना जाता था. उसने अपने प्रभाव में लेकर कई उल्टे सीधे काम किये. अपनी ऊंची पहुंच और रसूख की वजह से रांची में थानेदार बनी. विवादिता रही मीरा सिंह को लेकर बीजेपी नेता बाबूलाल मरांडी, पूर्व सीएम सह ओडिशा के राज्यपाल रघुवर दास भी पूर्व में कई बार सरकार को पत्र लिखकर मीरा सिंह पर कार्रवाई की मांग कर चुके हैं. मीरा सिंह पर झारखंड हाईकोर्ट, राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग में पहले से मुकदमा चल रहा है.

बाबूलाल ने उठाया था सवाल, चार्जशीटेड दरोगा को तुपुदाना थानेदार बनाने की क्या है मजबूरी ?

पूर्व सीएम और बीजेपी प्रदेश अध्यक्ष बाबूलाल मरांडी ने झारखंड सरकार पर हमला बोलते हुए जुलाई 2023 में सोशल मीडिया पर घुसखोरी के आरोप में जेल गयी चार्जशीटेड दरोगा मीरा सिंह को रांची के तुपुदाना के थानेदार बनाये जाने पर सरकार और पुलिस महकमा को कटघरे में खड़ा किया. उन्होंने कहा था कि रांची के एसएसपी सड़क पर घूम रहे हैं और अपराधी थाने संभाल रहे हैं. श्रीमान एसएसपी आपकी मजबूरी क्या है आदिवासियों से घूस लेते रंगे हाथ पकड़े गये चार्जशीटेड अपराधी को थानेदार बनाए रखने की? साथ ही उन्होंने कहा था कि जब मांझी ही नाव को डुबाने लगे तो फिर कौन बचायेगा. राज्य में आज रक्षक ही भक्षक बन गये हैं.

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रांची के एसएसपी सड़क पर घूम रहे और अपराधी थाना संभाल रहे. आदिवासियों से घूस लेते रंगे हाथ पकड़े गये चार्जशीटेड और जमानत पर जेल से छूटी सब इंस्पेक्टर मीरा सिंह को थानेदार बनाने की आखिर रांची एसएसपी को कौन सी मजबूरी है. इसके अलावे पत्रकार पर 14 सनहा के बाद एफआईआर करनेवाली तुपुदाना की घूसखोर थानेदार मीरा सिंह की करतूत फिर सामने आई है. जेल भेजे गये प्रदीप साहू ने पत्र लिखकर बताया है कि कैसे उनके पत्रकार भाई को संजय साहू को फंसाया गया है. एसएसपी को पत्रकार ने पहले ही बताया था कि 14 सनहा दर्ज करने वाली चार्जशीटेड अपराधी और बेल पर रिहा मीरा सिंह उन्हे फर्जी केस फंसाने का प्रयास करेगी और वही हुआ. आखिर सिस्टम में बैठे अपराधियों को महत्वपूर्ण जिम्मेवारी देने की कौन सी मजबूरी है?

रिश्वत लेने के आरोप में गई जेल, रांची पोस्टिंग हुई तो बनी थानेदार

2012 बैच की दरोगा मीरा सिंह को एसीबी ने खुंटी महिला थाना प्रभारी रहते 25 फरवरी 2021 को 15 हजार रुपये रिश्वत लेते रंगे हाथ गिरफ्तार किया था. मीरा सिंह पर आरोप था कि दुष्कर्म के एक मामले में आरोपी को बचाने के लिए 50 हजार रुपये की रिश्वत मांगी थी. पहली किश्त के तौर पर 15 हजार रुपये मांगे थे. इसके बाद रिश्वत के पहली किस्त लेते समय एसीबी की टीम ने मीरा को रंगेहाथों गिरफ्तार किया था. जेल से जमानत मिलने के बाद रांची में पोस्टिंग मिली. इसके बाद मीरा सिंह को तुपुदाना ओपी प्रभारी बनाया गया. पोस्टिंग पर कई सवाल उठे थे.

मीरा के खिलाफ जांच अब भी एसीबी में लंबित है. वहीं, तुपुदाना ओपी प्रभारी रहते मिलन चौक स्थित माया रेसिडेंट में हुई चोरी के आरोप में वहां कार्यरत सुपरवाइजर विकास कुमार के साथ मारपीट का आरोप है. पिटाई इस कदर की है कि दोनों पैर सूज गये. पीड़ित विकास ने इसकी लिखित शिकायत एसएसपी से की थी. अपनी शिकायत में उसने बताया है कि फ्लैट में हुई चोरी की शक पर पुलिस ने उठाया. पूछताछ के बहाने घंटो मारपीट की. इसके बाद कागज पर हस्ताक्षर लेकर छोड़ा. भुक्तभोगी ने खुद के पैसे से इलाज कराना पड़ा था.

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