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फ्रांस पर आतंकी हमला :  इस्लामिक आतंकवाद के मुद्दे पर दुनिया दो  ध्रुवों में बंटी,  टकराव तेज होने की आशंका

आतंकी हमले को लेकर जहां फ्रांस में इस्लामिक कट्टरवादियों पर कार्रवाई हो रही है., वहीं फ्रांस की इन कार्रवाइयों के विरोध में मुस्लिम देशों में बड़े पैमाने पर प्रदर्शन हो रहे हैं

Paris  :  साफ दिख रहा है कि इस्लामिक आतंकवाद  के मुद्दे पर दुनिया दो ध्रुवों में बंटती जा रही है. पेरिस में टीचर का सिर धड़ से अलग किये जाने और  नीस शहर में  हुए आतंकी हमले को लेकर जहां फ्रांस में इस्लामिक कट्टरवादियों पर कार्रवाई हो रही है. वहीं फ्रांस की इन कार्रवाइयों के विरोध में मुस्लिम देशों में बड़े पैमाने पर प्रदर्शन हो रहे हैं. इसी बीच इस्लामिक आतंकवाद के मुद्दे पर फ्रांस को भारत, अमेरिका और यूरोपीय संघ जैसी बड़ी महाशक्तियों का साथ मिला है. जिससे इस मुद्दे पर आगे टकराव तेज होने की आशंका बढ़ गयी है.

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पाकिस्तान, सऊदी अरब और तुर्की जैसे कई इस्लामी देशों के निशाने पर आये फ्रांस के राष्ट्रपति इमैनुअल मैक्रों के समर्थन में भारत खुलकर आ गया है. भारतीय विदेश मंत्रालय ने एक बयान जारी कर न सिर्फ मैक्रों पर किये जा रहे व्यक्तिगत हमलों की कड़े शब्दों में निंदा की है बल्कि कुछ देश जिस तरह से फ्रांस के शिक्षक की हत्या किये जाने को जायज ठहरा रहे हैं, उसे भी खारिज किया है.

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भारतीय कूटनीति में  आया बड़ा बदलाव

भारत के इस रुख को जानकार भारतीय कूटनीति में एक बड़े बदलाव के तौर पर देख रहे हैं. दूसरी तरफ, विदेश मंत्रालय इसे आतंकवाद पर पारंपरिक नीति को आगे बढ़ाने के तौर पर देख रहा है. विदेश मंत्रालय ने कहा है कि राष्ट्रपति मैक्रों पर अमान्य शब्दों में किये जा रहे व्यक्तिगत हमले की निंदा करते हैं. यह अंतरराष्ट्रीय परिचर्चा के बेहद आधारभूत मान्यताओं का उल्लंघन है.

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इसी बीच पेरिस में टीचर की गला काटकर हत्या के बाद फ्रांस के नीस शहर में एक बार फिर इस्लामिक आतंकी हमला हुआ.  हाथ में कुरान और चाकू लिए एक कट्टरवादी ने पहले मजहबी नारे लगाये. उसके बाद चाकू से लोगों पर हमला बोल दिया. वारदात में तीन  लोगों की मौत हो गयी और कई लोग घायल हो गये. तीन लोगों की हत्या करने वाला आरोपी इसी साल सितंबर के आखिर में ट्यूनिया से आया था और उसकी उम्र सिर्फ 21 साल है.

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इस्लामी आतंक का शिकार हुआ हमारा देश : मैक्रों

इस घटना के बाद राष्ट्रपति इमैन्युअल मैक्रों ने कहा, सर और मैडम एक बार फिर से हमारा देश इस्लामी आतंकवाद का शिकार हुआ है. इस सुबह एक बार फिर से हमारे तीन हमवतनों की नीस में हत्या कर दी गई. यह स्पष्ट रूप से फ्रांस पर हमला किया गया है. जिस समय हम फ्रांस में गिरफ्तारियां कर रहे थे, उसी दौरान हमने जेद्दा में सऊदी अरब में फ्रांसीसी कांसुलर सेक्शन पर हमला देखा है.

  स्कूलों और धार्मिक स्थानों पर बढ़ाये गये सैनिक

नीस में इस आतंकी हमले के बाद फ्रांस ने इस्लामिक आतंक पर अपना रूख और सख्त कर लिया है.  राष्ट्रपति इमैन्युअल मैक्रों ने देश में सुरक्षा का स्तर बढ़ाने और इस्लामिक आतंकियों के खिलाफ कार्रवाई तेज करने का आदेश जारी किया. अब फ्रांस के प्रमुख स्थानों, स्कूल और धार्मिक स्थानों पर सैनिकों की तैनाती की जा रही है. सार्वजनिक स्थानों पर सुरक्षा के लिए तैनात सैनिकों की संख्या भी तीन  से बढ़ाकर सात  हजार की गयी है.

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फ्रांस को मिला भारत का समर्थन

इस्लामिक आतंक के खिलाफ फ्रांस को भारत, अमेरिका और यूरोपीय संघ जैसी बड़ी महाशक्तियों का साथ मिला है. पीएम नरेंद्र मोदी ने ट्वीट कर कहा, ‘मैं नीस में चर्च के भीतर हुए नृशंस हमले समेत फ्रांस में हुए हालिया आतंकी हमलों की कड़ी निंदा करता हूं. पीड़ितों के परिवार वालों और फ्रांस के लोगों के साथ हमारी संवेदना. आतंकवाद के खिलाफ लड़ाई में भारत फ्रांस के साथ है.

ट्रंप ने कहा, हमारा दिल फ्रांस के लोगों के साथ

भारत के प्रधानमंत्री के सा​थ ही अमेरिका के राष्ट्रपति डॉनल्ड ट्रंप ने भी इस्लामी आतंकवाद के खिलाफ आवाज बुलंद की है. ट्रंप ने कहा,  हमारा दिल फ्रांस के लोगों के साथ है. अमेरिका इस लड़ाई में हमारे सबसे पुराने सहयोगी के साथ खड़ा है.

यूरोपीय संघ फ्रांस के समर्थन में

27 यूरोपीय देशों के शक्तिशाली संगठन यूरोपीय संघ ने इस्लामिक आतंकवाद के खिलाफ फ्रांस का समर्थन करते हुए बयान जारी किया है. यूरोपीय संघ ने कहा कि इन बर्बर आतंकी हमलों के खिलाफ वह फ्रांस की जनता और सरकार के साथ खड़ा है. आतंकवाद और हिंसात्मक अतिवाद के खिलाफ फ्रांस की इस लड़ाई में वह उसके साथ है.

 महातिर मोहम्मद का ट्वीट डिलीट किया

फ्रांस के खिलाफ आग उगलते हुए मलेशिया के पूर्व प्रधानमंत्री और कट्टर मुस्लिम नेता महातिर मोहम्मद ने भड़काऊ ट्वीट  लिखा, हालांकि, धर्म से परे, गुस्साये लोग हत्या करते हैं. फ्रांस ने अपने इतिहास में लाखों लोगों की हत्या की है जिनमें से कई मुस्लिम थे. मुस्लिमों को गुस्सा होने और इतिहास में किये गये नरसंहारों के लिए फ्रांस के लाखों लोगों की हत्या करने का हक है.
ट्विटर ने महातिर के इस ट्वीट को नियमों का उल्लंघन बताते हुए डिलीट कर दिया.

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