
Ranchi : परिवहन व्यवसायियों की समस्याओं के निराकरण को लेकर सोमवार को झारखंड चेंबर ऑफ कॉमर्स की एक बैठक विभागीय सचिव के रवि कुमार के साथ हुई. बैठक के दौरान राज्य कैबिनेट द्वारा स्वीकृत लॉकडाउन अवधि के व्यावसायिक बसों की टैक्स छूट को प्रभावी करने के साथ ही स्कूली बसों की टैक्स छूट पर वार्ता की गयी. जिस पर विभागीय सचिव ने अवगत कराया कि व्यावसायिक बसों की टैक्स माफी की प्रक्रिया आरंभ हो चुकी है.
जिन बस मालिकों ने उस अवधि में टैक्स जमा करा दिया है, उनका टैक्स समायोजित कर दिया जायेगा. उन्होंने यह भी कहा कि स्कूली बसों का स्कूल खुलने के एक दिन पूर्व तक का टैक्स भी माफ किया जायेगा. राज्य में केवल धनबाद में भारी मोटर ड्राइविंग प्रशिक्षण केंद्र की उपलब्धता के कारण व्यवसायिक वाहन के ड्राइवरों की कमी को देखते हुए उन्होंने अवगत कराया कि दुमका में यह प्रशिक्षण केंद्र कार्यरत हो चुका है, शीघ्र ही रांची में भी कार्यरत होगा.
परिवहन व्यवसायियों की समस्याओं पर चेंबर द्वारा विभागीय सचिव को एक विस्तृत ज्ञापन सौंपा गया. ज्ञापन में केंद्रीय परिवहन मंत्रालय द्वारा वाहनों के विभिन्न दस्तावेज की वैद्यता 31 मार्च तक के निर्णय को झारखंड में प्रभावी बनाने की मांग की गयी. लोगों की कठिनाइयों को देखते हुए रांची में दो मोटरयान निरीक्षकों की पदस्थापना करने की भी मांग की गयी है. पासपोर्ट कार्यालय के तर्ज पर राज्य में ड्राइविंग लाइसेंस बनाने के लिए मोटर व्हिकल के प्रोफेशनल्स को अधिकृत करने, व्यावसायिक बसों के विवादित बकाया कर का भुगतान करने के लिए वनटाइम सेटलमेट स्कीम लागू करने की मांग की गयी है.
राजस्थान सरकार की तर्ज पर राज्य में निबंधित बस किसी भी जिला में मोटरयान निरीक्षक से दुरुस्ती प्रमाण पत्र के लिए अपने व्यावसायिक वाहनों के निरीक्षण की अनुमति देने की मांग की गयी है. बसों के झारखंड से उत्तर प्रदेश आवागमन के लिए राज्य सरकार द्वारा उत्तर प्रदेश से पारस्परिक समझौता करने तथा केंद्र सरकार द्वारा मोटरवाहन अधिनियम में तय जुर्माना राशि की समीक्षा करने का सुझाव दिया गया है.
बैठक के दौरान चैंबर ने यह भी अवगत कराया कि दुमका एवं पलामू क्षेत्रीय परिवहन प्राधिकार में अध्यक्ष व सचिव का पद रिक्त होने एवं कोल्हान परिवहन प्राधिकार में भी कार्य सुचारू नहीं होने के कारण व्यवसायिक वाहन मालिकों को कठिनाई हो रही है. इस दिशा में विभागीय कार्रवाई के साथ ही प्राधिकार की बैठक जल्द से जल्द कराने का आग्रह किया गया. यह भी कहा गया कि राज्य गठन के पश्चात् राज्य में स्लीपर बसों का परिचालन अन्य राज्यों की तर्ज पर प्रारंभ हुआ. उस समय स्लीपर बसों के कर का निर्धारण नहीं किया गया था . बसों का दुरूस्ती प्रमाण पत्र सीट की बैठान क्षमता की गणना के अनुसार मोटरयान निरीक्षक द्वारा किया गया था. अब हमारे राज्य में स्लीपर बस पर कर का निर्धारण (एक स्लीपर बस पर 2 सीट का टैक्स लिया जाना) किया गया है.




