Jamshedpur

टाटानगर स्टेशन पार्किंग : शहर के दबंग ठेकेदार भी नहीं दे रहे भाव, छठे बार भी रिस्पांस नहीं

Ashok kumar

Jamshedpur : टाटानगर स्टेशन के पार्किंग स्टैंड का टेंडर एक बार फिर से खाली ही चला गया है. छठी बार टेंडर को रिस्पांस नहीं मिला है. इससे सिर्फ चक्रधरपुर रेल मंडल के ही अधिकारी परेशान नहीं हैं, बल्कि पूरे साउथ इस्टर्न रेलवे के अधिकारी भी खासा परेशान हैं. उन्हें इसका अहसास भी है कि रेलवे को करोड़ों का नुकसान हो रहा है. साउथ इस्टर्न रेलवे की ओर से भले ही चक्रधरपुर को मुख्यालय का दर्जा दिया गया है और सभी वरीय अधिकारी भी वहीं रहते हैं, लेकिन इस रेल मंडल की ओर से सबसे ज्यादा राजस्व टाटानगर स्टेशन की ओर से ही रेलवे को दिया जा रहा है.

कोरोनाकाल से लगा हुआ है ग्रहण

स्टेशन पार्किंग पर कोरोनाकाल से ही ग्रहण लगा हुआ है. पार्किंग का टेंडर सितंबरह 2020 में पहले बार निकाला गया था. अबतक की बात करें तो कुल छह बार टेंडर निकालने का काम किया गया है. बावजूद किसी ठेकेदार ने इसपर ध्यान नहीं दिया है. पूर्व की बात  करें तो रेलवे की ओर से पहली बार 5.60 करोड़ का टेंडर निकाला गया था, लेकिन छठी  बार उसे घटाकर 4.60 करोड़ रुपये कर दिया गया था. एक करोड़ घटाने के बाद भी रेलवे को इसपर रिस्पांस नहीं मिला है.

आसान नहीं है पार्किंग स्टैंड चला पाना

टाटानगर स्टेशन के पार्किंग स्टैंड को चला पाना आसान भी नहीं है. इसका इतिहास ही बताता है तो किसी आम के लिए यह आसान नहीं है. अगर खास भी इसका टेंडर लेता है तो उसे पूरी दबंगई के साथ यहां पर वसूली करनी होगी. टाटानगर स्टेशन पर वीआइपी से लेकर पैरवीकारों तक की गाड़ियां लगती है. उनसे रुपये वसूल कर पाना आसान नहीं होगा.

वर्ष 2000 तक हुआ करता था साइकिल स्टैंड

टाटानगर स्टेशन के पार्किंग पर प्रकाश डाला जाये तो वर्ष 2000 में मात्र साइकिल स्टैंड ही हुआ करता था. तब इसका टेंडर आजसू के पूर्व नेता राबर्ट दास और स्वपन कुमार सिंहदेव ने लिया था और आसानी से इसका संचालन भी किया था. जब से पार्किंग को बड़ा रूप देकर बाइक और कार स्टैंड बनाया गया है, तब से ही इसमें पेंच फसता  रहा है.

अजय शर्मा से लेकर उपेंद्र सिंह तक से हुआ था विवाद

कार स्टैंड बनने के बाद सबसे पहले अजय शर्मा ने  पार्किंग स्टैंड को लिया था. उसके समय में भी पार्किंग को लेकर विवाद हुआ था. विवाद भी ऐसा होता है कि इसमें पुलिस वाले ही उलझा करते हैं. वे ही पार्किंग शुल्क देने से आना-कानी करते हैं और पैरवी लगाते हैं. दबंगई भी दिखाते हैं. उपेंद्र सिंह के समय में तो टेंपो चालकों के कारण बन्ना गुप्ता को सामने आना पड़ा था और फायरिंग की घटना में टेंपा चालक जितेंद्र की मौत हो गयी थी. जब पार्किंग स्टैंड में आगजनी भी कर दी गयी थी. पूरा माहौल ही बिगड़ गया था. जिला पुलिस को पार्किंग को ही छवनी  में तब्दील करना पड़ा था.

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