
Akshay Kumar Jha
Ranchi: राज्य में तब रघुवर दास की अगुवाई वाली सरकार थी. 2016 में झारखंड स्थापना दिवस के दिन विभिन्न जिलों में टी-शर्ट वितरण के नाम पर राज्य के खजाने से 6 करोड़ रुपये का भुगतान हुआ. लेकिन इस राशि का भुगतान जिन कागजात, बिल और बिल्टी के आधार पर किया गया, उनका ब्योरा बेहद चौंकाने वाला है.
घोटाले के तार जैसे-जैसे खुले, कई नायाब किस्से सामने आये. न्यूजविंग ने आपको इस सीरीज की पहली किस्त में बताया कि कैसे ट्रांसपोर्ट कंपनी के नाम पर फर्जी बिल्टी तैयार की गयी.
न्यूज विंग को जो कागजात मिले हैं, उसके मुताबिक लुधियाना से पांच ट्रक टी-शर्ट्स की खेप लेकर लुधियाना से चले और धनबाद पहुंचे. लुधियाना से धनबाद की दूरी करीब 1600 किमी है. ट्रांस्पोर्टरों का कहना है कि कोई भी लदा हुआ ट्रक एक दिन में अमूमन 250-300 किमी की दूरी ही तय कर सकता है.
इस लिहाज से अगर सबसे आइडियल स्थिति की भी बात करें तो लुधियाना से धनबाद आने में कम से कम 5-6 दिन लगेंगे. लेकिन टी-शर्ट लाने में मामले में ऐसा नहीं हुआ.
टी-शर्ट की खेप रवाना होने और झारखंड में उनके पहुंचने के ब्योरे पर यकीन करें टी-शर्ट लदे ट्रक कम से कम हजार किमी प्रति घंटा से रफ्तार से लुधियाना से धनबाद पहुंचे.
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11 से 15 नवंबर तक अलग-अलग खेप में झारखंड आयी टी-शर्ट्स
रघुवर सरकार के दावे की बात करें तो 2016 के स्थापना दिवस यानि 15 नवंबर को बच्चों के बीच टी-शर्ट बांटी गयी. कागजात बताते हैं कि लुधियाना से टी-शर्ट से लदे ट्रक 11 से 15 नवंबर के बीच अलग-अलग खेप में धनबाद के लिए रवाना हुए.
कागजात के अनुसार सुप्रीम फ्राइट कैरियर्स नाम के ट्रांसपोर्ट ने दो ट्रक 15 नवंबर को लुधियाना से धनबाद के लिए रवाना किये थे, जबकि इसके एक ट्रक को 14 नवंबर को रवाना किया गया था.
महादेव फ्राइट कैरियर्स ने दो ट्रक 11 नवंबर को रवाना किया. 15 नवंबर को टी-शर्ट का वितरण बच्चों के बीच किया जाना था. इस लिहाज से 11 नवंबर को भी जो ट्रक लुधियाना से चला है, उसे पहुंचने में 5-6 दिनों का वक्त लगता और वो 15 की रात तक धनबाद पहुंचता.
वहीं जो ट्रक 15 नवंबर को लुधियाना से धनबाद के लिए चला, वो आखिर किस रफ्तार से चला कि उसने 1600 किमी का सफर कुछ ही घंटों में तय कर लिया.
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