
Ranchi: झारखंड में पिछले कुछ महीनों में भाकपा माओवादी के कई हार्डकोर नक्सलियों ने पुलिस के समक्ष हथियार डाले हैं. सूत्रों से इस बात की पक्की जानकारी मिली है 5 से 6 हार्डकोर नक्सलियों ने सरेंडर कर दिया है. हालांकि, इसकी आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है. कमांडरों की कमी के साथ ही संगठन को कई चुनौतियों जूझना पड़ रहा है. भाकपा माओवादी संगठन की झारखंड की प्राकृतिक संपदा और लेवी पर नजर है. एक जानकारी के अनुसार भाकपा माओवादी संगठन को सबसे ज्यादा लेवी झारखंड से मिलता है और नक्सलियों के सरेंडर से संगठन में खलबली मची हुई है . भाकपा माओवादी के शीर्ष नेताओं को इस बात की पूरी भनक है की सरेंडर करने से संगठन पर कई तरह के प्रभाव पड़ते हैं. वहीं नक्सलियों के बीच अब अच्छे लड़ाकू नेतृत्व की कमी है.काडर नहीं मिल रहा है और साजो-सामान की भी भारी कमी है. सूत्रों की मानें तो अभी भी कई नक्सली सरेंडर के लिये पुलिस के संपर्क में है.
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जानकारी के अनुसार झारखंड के अलग-अलग जिलों से कई हार्डकोर नक्सलियों ने सरेंडर किया है और उनसे पूछताछ के आधार पर पुलिस लगातार अभियान चला रही है. स्थिति यह बन गयी है कि झारखंड को शरणस्थली समझने वाले नक्सली छुपने के लिये इधर-उधर भाग रहे हैं. राज्य पुलिस और सीआरपीएफ दोनों मिल कर दिन रात नक्सलियों के खात्मे में लगे हुए हैं.
नक्सली संगठन भाकपा माओवादी कोयल शंख जोन में नए कमांडर की तलाश कर रहा है. नए कमांडर को लेकर माओवादियों की बड़ी बैठक झारखंड के जंगलो में हुई थी. 15 जून को गुमला थाना क्षेत्र के खटंगा पाकरटोली में सुरक्षाबलों के साथ मुठभेड़ में 15 लाख का माओवादी कमांडर बुद्धेश्वर उरांव मारा गया था जबकि 25 लाख का इनामी माओवादी विमल यादव ने आत्मसमर्पण कर दिया है. बुद्धेश्वर के मारे जाने और विमल यादव के आत्मसमर्पण के बाद माओवादी कोयल शंख जोन में नए कमांडर की तलाश कर रहे हैं.
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दक्षिणी छोटानागपुर जोनल कमेटी के कमांडर महाराज प्रमाणिक ने पुलिस के समक्ष सरेंडर कर दिया है. सरेंडर किए जाने के बाद रांची में गुप्त ठिकाने पर महाराज से पूछताछ की जा रही है. भाकपा माओवादी संगठन में पतिराम मांझी को सेंट्रल कमेटी सदस्य बनाकर सारंडा इलाके का प्रभार दिए जाने के बाद से ही माओवादी संगठन में आदिवासी नेताओं के बीच नाराजगी थी. महाराज प्रमाणिक के पुलिस के समक्ष सरेंडर करने से रांची के तमाड़, सरायकेला- खरसांवा के कुचाई, चाईबासा मे माओवादियों की धमक कमजोर हुई है. महाराज प्रमाणिक की आदिवासी कैडरों के बीच काफी अच्छी पकड़ थी, ऐसे में माओवादियों का प्रभाव उन कैडरों के बीच कमजोर पड़ेगा. दक्षिणी छोटानागपुर जोनल कमेटी के कमांडर अब तक किसी को नही बनाया गया है. इनकी भरपाई के लिये संगठन ने नये कमांडरों की तलाश शुरू कर दी है.




