
Ranchi: सीएम हेमंत सोरेन व उनके करीबियों के शेल कंपनियों में निवेश को लेकर दायर एसएलपी पर शुक्रवार को सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई हुई. सुप्रीम कोर्ट के जस्टिस यूयू ललित, जस्टिस अनिरुद्ध बोस और जस्टिस सुधांशु धूलिया की खंडपीठ में मामले की सुनवाई के दौरान अधिवक्ता कपिल सिब्बल ने याचिका पर सवाल उठाते हुए कहा कि यह पीआईएल एक्सटॉर्शन के लिए हुआ है. कपिल सिब्बल ने झारखंड हाईकोर्ट के अधिवक्ता राजीव कुमार पर लगे आरोपों और उनकी गिरफ्तारी को आधार बनाया. सुनवाई के दौरान खंडपीठ ने जनहित याचिका से जुड़े तमाम दस्तावेजों को अदालत में प्रस्तुत करने का निर्देश दिया.अपनी मौखिक टिप्पणी में सुप्रीम कोर्ट ने याचिका दर्ज होने के पूर्व विभाग एवं संबंधित पार्टी को दी जाने वाली रीप्रेजेंटेशन कॉपी की भी मांग की है. कोर्ट में ईडी की तरफ से सॉलिसीटर जनरल तुषार मेहता मौजूद थे. मामले की अगली सुनवाई अब 17 अगस्त को होगी.
राज्य सरकार ने फैसले को दी है चुनौती
गौरतलब है कि प्रार्थी राज्य सरकार ने एसएलपी दायर कर झारखंड हाईकोर्ट के 3 जून, 2022 के फैसले को सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दी है. हाईकोर्ट ने प्रार्थी शिवशंकर शर्मा द्वारा मुख्यमंत्री के करीबियों के शेल कंपनियों में निवेश एवं अनगड़ा में माइनिंग लीज आवंटन मामले में दायर जनहित याचिकाओं को मेंटेनेबल माना था. इसके साथ ही इसकी मेरिट पर सुनवाई करने का निर्णय लिया था. इधर, हाइकोर्ट सीएम के करीबियों के शेल कंपनियों में निवेश व माइनिंग लीज आवंटन मामले में प्रार्थी शिव शंकर शर्मा द्वारा दायर जनहित याचिकाओं की मेरिट पर सुनवाई कर रही है.




