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पांचवीं अनुसूची पर सुलगते सवालों का जवाब नहीं सूझा एक्सपर्ट सुभाष कश्यप को, सचिव ने किया प्रोग्राम बंद करने का इशारा

पहली बार सरकार की पहल पर पांचवीं अनुसूची पर हुआ व्याख्यान

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Ranchi : झारखंड सरकार के कल्याण विभाग द्वारा भारतीय संविधान की पांचवीं अनुसूची पर आरयू के आर्यभट्ट सभागार में शनिवार को व्याख्यान का आयोजन किया गया. कार्यक्रम को संबोधित करते हुए राज्यपाल द्रौपदी मुर्मू ने कहा कि राज्य में आदिवासी मांत्रलाय अलग से नहीं है. सरकार से बात हुई है, 15 नवंबर को राज्य सरकार आदिवासी मंत्रालय अलग से बनाने की घोषणा करेगी. पांचवीं अनुसूची पर हो रहे व्याख्यान से राज्य के लोग लभान्वित होंगे.

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पत्थलगड़ी मामले में सरकार ने निराकरण नहीं, सिर्फ क्राइसिस मैनेजमेंट किया गया : सुभाष कश्यप

संविधान विशेषज्ञ सुभाष कश्यप ने अपने व्याख्यान में कहा कि आदिवासी इलाके के लिए विशेष कानून बने हुए हैं, लेकिन उनका पालन करना और पालन न करना, दोनों पालनकर्ता की नीयत पर टिके हैं. राज्यपाल को पांचवीं अनुसूचित इलाकों के लिए विशेष दायित्व और अधिकार दिये गये हैं. इन क्षेत्रों के लिए ट्राइबल एडवाइजरी कौंसिल के माध्यम से कानून बनाकर लागू किया जा सकता है. वहीं, राज्य के इन इलाकों के विकास और स्थिति को लेकर हर साल राज्यपाल की ओर से केंद्र को पांचवीं अनुसूची से संबंधित रिपोर्ट भेजनी होती है. लेकिन, राज्यों से जानेवाली रिपोर्ट अब डिपार्टमेंटल रिपोर्ट बनकर रह गयी है. संविधान विशेषज्ञ सुभाष कश्यप ने कहा कि पांचवीं अनुसूची और आदिवासी अधिकारों की जहां तक बात है, तो मुझसे कहीं ज्यादा झारखंड में रहनेवाले लोगों को जानकारी है. इसके बाद उन्होंने कहा राज्य में पत्थलगड़ी आंदोलन की शुरुआत हुई है, जिसका सही निराकरण नहीं किया गया है. सिर्फ सरकार द्वारा क्राइसिस मैनेजमेंट किया गया है. संविधान विशेषज्ञ सुभाष कश्यप द्वारा पांचवीं अनुसूची पर दिये गये व्याख्यान के बाद प्रतिभागियों से सवाल पूछने को कहा गया. इस पर प्रतिभागियों ने सवाल तो किये, लेकिन उन सवालों का जवाब सुभाष कश्यप नहीं दे पाये.

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प्रतिभागियों ने संविधान विशेषज्ञ सुभाष कश्यप से किये ये सवाल

  • ट्राइबल एडवाइजरी कौंसिल के अध्यक्ष गैर आदिवासी हो सकते हैं या नहीं? अगर हो सकते हैं, तो किन कानूनी प्रावधानों के तहत?
  • संविधान में कितने पार्ट हैं और कितने शेड्यूल हैं? पार्ट और शेड्यूल में क्या अंतर है?
  • पांचवीं अनुसूचित क्षेत्र में निजी कंपनियों द्वारा जमीन का अधिग्रहण कर खनन कार्य किया जा रहा है, यह गलत है या सही?
  • पांचवीं अनुसूचित क्षेत्र में पंचायती राज विस्तार अधिनियम लाकर पेसा कानून बनाया गया. क्या नगर निगम और नगरपालिका की शक्तियों का विस्तार पांचवीं अनुसूचित क्षेत्र में किया गया है? अगर किया गया है, तो कब संविधान संशोधन किया गया? अगर नहीं, तो क्या पांचवीं अनुसूचित क्षेत्र में नगर निगम और नगरपालिका संवैधानिक है या नहीं? क्या कहता है अनुच्छेद 243 जेडसी?
  • खूंटी से आये हुए एक व्यक्ति ने पूछा- सीएनटी एक्ट में जब संशोधन हो रहा था, तब जमीन बचाने के लिए मुंडा समुदाय ने पत्थलगड़ी आंदोलन शुरू किया, जिसमें पत्थरों पर संविधान की बातें लिखी गयीं. यह किस तरह असंवैधानिक है, कृपया बतायें.
  • पांचवीं अनुसूचित क्षेत्र में सेक्शन 40 के तहत जिला स्तर पर स्वशासी जिला परिषद का प्रावधान छठी अनुसूची के पैटर्न के तहत किया जाना था, लेकिन यह नहीं हो पाया. यह गलत है या सही?

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जवाब नहीं दे पाये सुभाष कश्यप, तो आनन-फानन में प्रतीक चिह्न भेंट कर व्याख्यान समाप्ति की कर दी गयी घोषणा

सवाल करनेवालों में प्रेमचंद्र मुर्मू ,प्रकाश चंद्र उरांव, प्रभाकर कुजूर, सुषमा बिडूउली, पुष्पा के सवालों के जवाब संविधान विशेषज्ञ सुभाष कश्यप नहीं दे सके. जो जवाब दिये, उससे प्रतिभागी संतुष्ट नहीं हो सके. वहीं, सवालों का जवाब प्रतिभागियों को नहीं मिलने पर सभागार में शोर होने लगा. इसे देख मंच पर बैठीं कल्याण विभाग की सचिव हिमानी पांडे ने संचालक को कार्यक्रम समाप्त करने का इशारा किया. इसके बाद जल्द ही सुभाष कश्यप को प्रतीक चिह्न भेंट करते हुए धन्यवाद ज्ञापन कर व्याख्यान की समाप्ति की घोषणा कर दी गयी.

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लोगों ने आयोजन की सराहना की

कार्यक्रम में आये ज्यादातर लोग संतुष्ट नहीं हुए, लेकिन सरकार की इस पहल की सराहना की. कहा कि सरकार इस तरह की परिचर्चा का आयोजन कर आदिवासियों में चेतना शक्ति लाने का कार्य कर रही है. कुछ लोगों का तर्क था कि इस तरह की परिचर्चा झारखंड के ज्वलंत मुद्दों पर की जायेगी, तो राज्य के अदिवासियों को कोई दिग्भ्रमित नहीं कर सकता है.

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