
Ranchi : झारखड विकास मोर्चा (झाविमो) के केन्द्रीय महासचिव बंघु तिर्की ने रघुवर सरकार की मिट्टी के डॉक्टर योजना को राज्य के किसानों के साथ धोखा करार दिया है.
उन्होंने कहा, मिट्टी का डॉक्टर बनने के लिए बिरसा कृषि विश्वविद्यालय के अंतर्गत रांची, गढ़वा, गोड्डा और देवघर में कृषि महाविद्यालय हैं जहां चार साल का कोर्स पूरा करने पर ही कोई पौधे व मिट्टी का डॉक्टर बनता है, जबकि रघुवर सरकार सखी दीदी को मात्र एक सप्ताह में प्रशिक्षण देकर मिट्टी का डॉक्टर बनने का सपना दिखा रही है. क्या रघुवर सरकार कृषि शिक्षा को महत्व को भी नहीं समझती? या फिर राज्य के किसानों के साथ मजाक कर रही है.
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‘सरकार की मृदा स्वास्थ्य कार्ड योजना फेल’
बंधु ने कहा कि राज्य सरकार ने 2015 में मृदा स्वास्थ्य कार्ड की योजना शुरू की थी जिसमें सभी किसानों को उनके खेतों को पोषण तत्वों की जांच कर मिट्टी स्वास्थ्य कार्ड देने की बात की थी. इसमें मात्र 10% किसानों का मृदा स्वास्थ्य कार्ड बनाया गया.
जेवीएम महासचिव ने कहा, योजना विफल होने के बाद रघुवर सरकार ने मिट्टी का डॉक्टर वाली योजना को विधानसभा का चुनाव को देखते हुए शुरू किया है. इससे किसानों को फयदा हो या न हो सरकार को मतलब नहीं. अभी प्रदेश में मात्र 40% खेती योग्य भूमि में ही धान तथा खरीफ की खेती की जाती है. किसानों को इस बार भी सूखा झेलना पड़ रहा है. सरकार की ओर से किसानों को फसल बीमा के पैसे का भुगतान अभी तक नहीं किया गया है.
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‘किसानों के इजरायल भ्रमण वाली योजना भी विफल’
बंधु तिर्की ने कहा, इजरायल भ्रमण वाली योजना बिल्कुल असफल साबित हुई है. इजरायल में 2% आबादी कृषि कार्य में लगी हुई है. वहां किसानों को सब्सिडी मिलती है. वहां के किसान फल-फूल, दूध का उत्पादन करते हैं. वहां की कृषि व्यवस्था निर्यात पर आधारित है. निर्यात में कार्गो विमान का प्रयोग होता है.
जबकि झारखंड में 80% आबादी कृषि कार्य में लगी हुई है. राज्य में मटर, टमाटर, शिमला मिर्च, धनिया पत्ता, गोभी आदि का अधिक उत्पादन होने पर किसानों को लागत मूल्य भी वापस नहीं मिलता. झारखंड और इजरायल की जलवायु में भी काफी अंतर है. जो किसान इजरायल गये वे ज्यादा-पढ़े लिखे भी नहीं थे.
‘राज्य सरकार फसल बीमा राशि का करे भुगतान’
बंधु ने आरोप लगाया कि राज्य सरकार ने कृषि के लिए जो बजट का प्रवाधान किया था उसे चुनावी लाभ लेने के लिए मुख्यमंत्री आर्शीवाद योजना के नाम पर कुछ किसानों को एक किस्त प्रति एकड़ तीन हजार दिये जा रहे है.
वहीं सरकार की किसानों को समय पर बीज देने, कृषि कर्ज माफ करने, फसल बीमा की राशि भुगतान करने में कोई दिलचस्पी नहीं. पांच साल में राज्य में सिंचित क्षेत्र नहीं बढ़े. ऐसे में किसानों के साथ रघुवर सरकार का प्रेम सिर्फ चुनावी लाभ का हथियार है.
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