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लातेहार : डायन के आरोप में महिला की धारदार हथियार से मारकर हत्या

घटना की जानकारी लेती पुलिस

Latehar : जिले के मनिका थाना क्षेत्र के मंधनिया गांव में एक महिला की डायन के शक में हत्या कर दी गयी. महिला का नाम सोहबतिया देवी (55 वर्ष) है. घटना के बारे में बताया जा रहा कि महिला के भतीजे ने ही घटना को अंजाम दिया है. आरोपी युवक का नाम अजय उरांव है और वह महिला को मारने के पहले भी उसे डायन बताकर प्रताड़ित करता था.

घटना की जानकारी मिलते ही पुलिस मौके पर पहुंची और शव को कब्जे में लेकर पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया. वहीं पुलिस ने आरोपी अजय उरांव को हिरासत में ले लिया है. पुलिस आरोपी से पूछताछ कर रही है.

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अंधविश्वास की वजह से हो रही हैं हत्याएं

झारखंड में जादू टोना, अंधविश्वास और डायन बिसाही के शक में हत्या और प्रताड़ना के मामले नहीं थम रहे हैं. पिछले एक वर्ष के दौरान झारखंड में अंधविश्वास और जादू-टोना के शक में 30 लोगों की हत्या कर दी गयी है. यह आंकड़े पुलिस के हैं. जबकि स्थिति इससे ज्यादा खराब है.

कई ऐसे मामले हैं जो पुलिस तक पहुंचते ही नहीं हैं. 1990 से 2000 तक झारखंड के कई इलाकों में डायन के नाम पर 522 महिलाओं की निर्मम हत्या की गयी थी. लेकिन झारखंड अलग राज्य बनने का बाद डायन के नाम पर होने वाली हत्याओं की संख्या में काफी इजाफा हो गया.

2000 से लेकर 2019 के ताजा आंकड़ो के अनुसार अबतक 1800 महिलाएं मार दी गयी हैं. जिसमें सबसे अधिक आंकड़ा चाईबासा और सरायकेला का है. जहां कुल 233 महिलाओं की हत्या कर दी गयी.

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अंधविश्वास की जकड़ से बाहर नहीं निकल पा रहे लोग

अंधविश्वास की वजह से इतनी ज्यादा संख्या में हत्या किया जाना राज्य के लिए कलंक है. पर, इस मुद्दे पर समाज अभी तक जागरूक नहीं हो सका है. इस गंभीर समस्या के निराकरण के लिए कई लोग और कई संस्थाएं लड़ाई लड़ रही हैं.

पर, ये कुप्रथा गांवों में इस तरह से फैली हुई है कि लोग इससे बाहर ही नहीं निकल पा रहे हैं. तमाम तरह की योजनाओं और कई संस्थाओं के द्वारा काम किए जाने के बावजूद भी इस अंधविश्वास को लोगों के दिमाग से नहीं निकाला जा सका है.

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अधिनियम बनने के बाद भी घटनाओं में कमी नहीं

डायन के नाम पर औरतों के साथ जुल्म करने वाले लोग समझ नहीं पा रहे हैं कि वे ऐसा करके इस सामाजिक बीमारी को और बढ़ावा ही दे रहे हैं. डायन बताकर महिलाओं को मारने और उसके परिवार को प्रताड़ित करने की घटनाओं में लगातार वृद्धि हो रही है.

हद तो तब हो जाती है, जब डायन बताकर महिला को मल-मूत्र पिलाया जाता है, निर्वस्त्र कर उसका सामूहिक दुष्कर्म किया जाता है. सर मुंडवाकर मुंह काला कर गांव में घूमाया जाता है.

कई बार तो गांव से निकाल भी दिया जाता है. इस सामाजिक कुरीति को खत्म करने के लिए राज्य में डायन प्रथा प्रतिषेध अधिनियम 2001 बना. इसके बावजूद ऐसी घटनाओं में कमी नहीं आ रही है.

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