JamshedpurJharkhand

जयंती 12 मई पर विशेष : अगर भूवैज्ञानिक पीएन बोस नहीं होते, तो जमशेदपुर का अस्तित्व भी नहीं होता

इन्होंने ही जेएन टाटा को बताया कि कालीमाटी-साकची के आसपास की धरती में छिपी है अकूत प्राकृतिक संपदा

Jamshedpur : पीएन बोस नहीं होते तो जमशेदपुर शहर नहीं होता. बोस ने ही सबसे पहले पत्र लिख जेएन टाटा को बताया कि जमशेदपुर के आसपास की धरती की गर्भ में लौह अयस्क का अकूत भंडार है. भूविज्ञानी प्रमथ नाथ बोस ने मयूरभंज राज्य में गोरुमहिसानी की पहाड़ियों में लौह अयस्क के भंडार की खोज की थी. खोज के बाद बोस ने 24 फरवरी 1904 को जेएन टाटा को एक ऐतिहासिक पत्र लिखा, जिसके कारण साकची में टाटा आयरन एंड स्टील कंपनी (टिस्को) की स्थापना हुई. जमशेदजी के पुत्रों के नेतृत्व में समूह उनके निष्कर्षों को साबित करने के लिए निकल पड़ा और बोस की भविष्यवाणी सही साबित हुई.

दो दशक तक जीएसआई में काम किया

बोस का जन्म 12 मई 1855 को कोलकाता से लगभग 60 किलोमीटर उत्तर पूर्व में गैपुर में हुआ था. कृष्णानगर कॉलेज और बाद में सेंट जेवियर्स कॉलेज में अपनी शिक्षा के बाद बोस ने लंदन विश्वविद्यालय से विज्ञान में स्नातक की उपाधि प्राप्त की और 1880 में भारतीय भूवैज्ञानिक सर्वेक्षण (जीएसआई) में पहले भारतीय श्रेणीबद्ध अधिकारी बने. शुरू में उन्होंने शिवालिक जीवाश्मों पर ध्यान केंद्रित किया. अगले दो दशकों में उन्होंने जीएसआई में जो किया, उसमें असम में पेट्रोलियम की खोज और पूरे भारत और आधुनिक म्यांमार में कई खनिज और कोयला खादान शामिल थे. उन्होंने भारत में पहली साबुन फैक्ट्री स्थापित करने में भी मदद की.

Catalyst IAS
ram janam hospital

प्रेरणा और गौरव के प्रतीत है बोस

The Royal’s
Sanjeevani

आज पीएन बोस प्रेरणा और गौरव के प्रतीक बने हुए हैं. भारत में उन्हें हमेशा एक ऐसे भूविज्ञानी के रूप में याद किया जाएगा, जिन्होंने राष्ट्र के लिए इस्पात का मार्ग प्रशस्त किया. वैज्ञानिक और तकनीकी कौशल के विकास के साथ सहायता प्राप्त प्राकृतिक संसाधनों के मामले में भारत को आत्मनिर्भर बनाने के लिए पीएन बोस ने वास्तव में ‘आत्मनिर्भर भारत’ का बीड़ा उठाया, जहां तक भारत के औद्योगीकरण का संबंध है.बोस को भारत के सबसे प्रतिष्ठित वैज्ञानिकों में गिना जाता है और उनकी कई उपलब्धियों ने भारत में तकनीकी क्रांति का नेतृत्व किया.

कोलकाता में जादवपुर यूनिवर्सिटी की स्थापना की

भारतीय भूवैज्ञानिक सर्वेक्षण में अपने कार्यकाल के दौरान पीएन बोस ने अपनी स्मारकीय पुस्तक-‘ए हिस्ट्री ऑफ हिंदू सिविलाइजेशन अंडर द ब्रिटिश रूल’ लिखी, जो 1894 और 1896 के बीच 3 खंडों में प्रकाशित हुई. तकनीकी और व्यावसायिक शिक्षा को बढ़ावा देने के लिए पीएन बोस के प्रयासों ने बंगाल तकनीकी संस्थान की स्थापना की. यह आज कोलकाता में जादवपुर विश्वविद्यालय के रूप में जाना जाता है.

प्रकृति से खास लगाव था बोस का

एक बच्चे के रूप में प्रकृति के साथ उनके घनिष्ठ संबंध ने उनमें पृथ्वी के अध्ययन के लिए एक जुनून पैदा किया, जिससे उन्हें भूविज्ञान को अपने पेशे के रूप में अपनाने के लिए मजबूर होना पड़ा.उन्होंने नर्मदा घाटी, शिलांग पठार का सर्वेक्षण किया और उन्हें असम में पेट्रोलियम की खोज का श्रेय दिया जाता है. वह नर्मदा घाटी में मंडलेश्वर के आसपास अलग-अलग ज्वालामुखी केंद्रों की पहचान करने वाले पहले व्यक्ति थे. उन्होंने जबलपुर जिले में मैंगनीज, दार्जिलिंग में कोयला, सिक्किम में तांबा और असम में पेट्रोलियम की खोज की.

इसे भी पढ़ें: मैथिली व भोजपुरी भाषाभाषी लोगों को गूगल का तोहफा, अब इन भाषओं में भी अनुवाद

Related Articles

Back to top button