Jharkhand

पंचायतों में 14वें वित्त के पैसे से लगे सोलर वाटर मेंटेनेंस का पैसा हुआ गोल, सोशल ऑडिट की उठी मांग

Ranchi : पंचायतों में 14वें वित्त के पैसों से ग्रामीणों को पेयजल की सुविधा देने की योजना बनी थी. पेयजल एवं स्वच्छता विभाग ने इसके लिये फरवरी 2019 में गाइडलाइन के साथ एक लेटर जारी किया. कहा कि 14वें वित्त के पैसों से गांव के हर टोले में सौर उर्जा आधारित लघु ग्रामीण पाइप जलापूर्ति योजना पर काम किया जाये. सोलर वाटर टंकी लगाने के लिये जरूरी निर्देश और एक मॉडल एस्टिमेट भी जारी किया. इसमें 5 सालों तक टंकी के संचालन और मेंटेनेंस के लिये खाते में पैसा रखे जाने को कहा गया. लगाये गये एक टंकी के लिये इस मद में पांच सालों के लिये 64,383 रुपये सुरक्षित रखे जाने थे. कई पंचायतों ने ऐसा नहीं किया है. पंचायत सचिव और मुखिया पर सवाल उठ रहे हैं. सोशल ऑडिट की मांग भी इसके लिये शुरू हो गयी है.

इसे भी पढ़ें :राज्यसभा चुनाव 2016 के हॉर्स ट्रेडिंग मामले में निष्कर्ष के करीब पुलिस, मुख्य गवाह मंटू सोनी से 3 घंटे पूछताछ

टंकी के लिये लगभग चार लाख का बजट

Catalyst IAS
ram janam hospital

राज्यभर में लगभग 4400 पंचायतें हैं. पेयजल विभाग के आदेश पर पंचायतों ने सोलर वाटर स्कीम पर काम शुरू किया. 14वें वित्त से लगाये जाने वाले सोलर वाटर टंकी के लिये प्रति टंकी 3,84,691 रुपये का प्रावधान तय किया. इसमें लगभग 3 लाख 19 हजार की राशि टंकी लगाने के कामों के लिये फिक्सड है. ऑपरेशन और मेंटेनेंस के लिये 64,383 रुपये की राशि को 14वें वित्त के खाते में बनाये रखना है. इस पैसे का उपयोग पांच सालों तक किया जाना है.

 

The Royal’s
Pushpanjali
Pitambara
Sanjeevani

खाते में नहीं हैं मेंटेनेंस के 64000 रुपये

पेयजल विभाग के गाइडलाइन के अनुसार पंप लगाये जाने के बाद इसके मेंटेनेंस का पैसा 14वें वित्त के खाते में ही रखने को कहा गया. पर कई पंचायतें ऐसी हैं जिनके खाते में इस मद का पैसा नहीं दिखता है. जानकारी के मुताबिक सभी जिलों में हर पंचायत में कम से कम 4-5 सोलर वाटर स्कीम 14वें वित्त से 2019-20 में ली गयी है. इस हिसाब से हर पंचायत के पास 3,21,915 रुपये मेंटेनेंस के एवज में होना चाहिये. पर ऐसा कई पंचायतों में नहीं दिखता है.  धनबाद के टुंडी प्रखंड की कई पंचायतों को उदाहरण के तौर पर देखें जिनके खाते में 20 से 30 हजार रुपये भी नहीं बचे हैं. टूंडी के फतेहपुर पंचायत के खाते में 2019-20 में मात्र 32675 रुपये बचे थे जबकि 2020-21 में 6500 रुपये. इसी तरह बेगनरिया पंचायत के खाते में 2019-20 में 1,25,694 रुपये और 2020-21 में 27052 रुपये शेष थे. ये आंकड़े जुलाई 2020 तक के हैं. इसी तरह के किस्से दूसरे कई पंचायतों में भी हैं,

क्या कहता है मुखिया संघ

मुखिया संघ प्रमुख विकास महतो के अनुसार किसी किसी पंचायत में मेंटेनेंस का पैसा नहीं रखे जाने की सूचना है. पर इसके लिये सीधे सीधे मुखिया जिम्मेवार नहीं हैं. पंचायत सचिवों के उपर अभिलेख संधारण का दायित्व होता है. विभिन्न तरह के सरकारी दिशा निर्देशों के अनुरूप उसका अनुपालन करने की प्राथमिक जिम्मेदारी उसकी है. सरकार को चाहिये कि 14वें वित्त से लगाये जा रहे सोलर वाटर मामले में तरीके से पंचायत प्रतिनिधियों को जागरुक करें.

इसे भी पढ़ें :18 करोड़ से बने स्लॉटर हाउस के संचालन का जिम्मा अर्श एंड अहलान को, 25 प्रतिशत राशि निगम को देगी कंपनी

क्या कहता है विभाग

पंचायती राज निदेशक विनय कुमार राय के मुताबिक 14वें वित्त के पैसे के उपयोग के मामले में गाइडलाइन तय है. सोलर वाटर मेंटनेंस का पैसा पंचायतों में नहीं रखे जाने की शिकायत उचित माध्यम से विभाग के पास आने पर एक्शन जरुर लिया जायेगा.

सोशल ऑडिट की जरूरत

सोशल ऑडिट टीम के प्रमुख गुरजीत सिंह के अनुसार 14वें वित्त के सोशल ऑडिट का काम सभी पंचायतों में नहीं किया जा सका है. अब तक 1500 पंचायतों में ही ऑडिट का काम हो सका है. हालांकि सोलर वाटर स्कीम पिछले साल शुरू होने के बाद इसका ऑडिट नहीं हो सका है. इसे सतत जारी रखा जाना लाभदायक होगा. ऑडिट से पंचायतों में किसी स्कीम में हो रही गड़बड़ियों को देखा जाता और उसके बेहतर संचालन की भी संभावना बनती.

इसे भी पढ़ें :आम आदमी पार्टी की गिरिडीह इकाई ने चलाया ऑक्सीजन जांच अभियान

Leave a Reply

Your email address will not be published.

Related Articles

Back to top button