
Ranchi: लोकसभा चुनाव से पहले झामुमो को बड़ा झटका लगा है. सोरेन परिवार की बड़ी बहू और विधायक सीता सोरेन ने पार्टी से इस्तीफा दे दिया है. जानकारी के मुताबिक चंपाई सोरेन सरकार में मंत्री नहीं बनाये जाने से सीता सोरेन नाराज चल रही थी.
सीता सोरेन झारखंड मुक्ति मोर्चा के केंद्रीय अध्यक्ष शिबू सोरेन के पुत्र दिवंगत दुर्गा सोरेन की पत्नी हैं. वो जेएमएम के टिकट पर तीन टर्म विधायक रही हैं . झारखंड की सियासत में वो मजबूत पकड़ रखती हैं, लेकिन पूर्व की हेमंत सरकार में उन्हें जगह नहीं मिल सकी थी. जब हेमंत सोरेन जेल जाने के बाद चंपाई सोरेन के नेतृत्व में बनी सरकार में वो मंत्री पद चाहती थी, लेकिन नहीं मिल सका. सीता की राजनीतिक महत्वाकांक्षा भी जगजाहिर है. ऐसे में उन्होंने अपने ही सरकार के खिलाफ लंबे समय से मोर्चा खोल रखा है.
झामुमो के केन्द्रीय अध्यक्ष शिबू सोरेन को लिखे त्यागपत्र में लिखा है कि ” मेरे स्वर्गीय पति, श्री दुर्गा सोरेन, जो कि झारखण्ड आंदोलन के अग्रणी योद्धा और महान क्रांतिकारी थे, के निधन के बाद से ही मैं और मेरा परिवार लगातार उपेक्षा का शिकार रहे हैं. पार्टी और परिवार के सदस्यों द्वारा हमे अलग-थलग किया गया है, जो कि मेरे लिए अत्यन्त पिड़ा दायक रहा है. मैने उम्मीद की थी कि समय के साथ स्थितियां सुधरेगी, परन्तु दुर्भाग्यवश ऐसा नहीं हुआ. झारखण्ड मुक्ति मोर्चा जिसे मेरे स्वर्गीय पति ने अपने त्याग समपर्ण और नेतृत्व क्षमता के बल पर एक महान पार्टी बनाया था, आज वह पार्टी नहीं रही. मुझे यह देख कर गहरा दुःख होता है कि पार्टी अब उन लोगों के हाथों में चली गयी है जिनके दृष्टिकोण और उद्देश्य हमारे मुल्यों और आदर्शों से मेल नहीं खाते .
श्री शिबू सोरेन (गुरूजी बाबा के) अथक प्रयासों के बावजूद जिन्होने हम सभी को एक जुट रखने के लिए कठिन परिश्रम किया, अफसोस कि उसके प्रयास भी विफल रहें मुझे हाल ही में यह ज्ञात हुआ है कि मेरे और मेरे परिवार के खिलाफ भी एक गहरी साजीस रची जा रहीं है. मै अत्यन्त दुःखी हूँ. मैने यह दृढ़ निश्चय किया हूँ कि मुझे झारखण्ड मुक्ति मोर्चा और इस परिवार को छोड़ना होगा.
अतः मैं अपनी प्राथमिक सदस्यता से इस्तीफा दे रहीं हूं और आप से निवेदन करती हूँ कि मेरे इस्तीफे को स्वीकार किया जाए.”

सीता सोरेन और हेमंत सोरेन के बीच सियासी वर्चस्व का टकराव
झारखंड की राजनीति में ऐसा माना जाता है कि सीता सोरेन और हेमंत सोरेन के बीच सियासी वर्चस्व का टकराव है. सीता सोरेन राजनीति में अपने पति के मौत के बाद आई हैं. सीता के पति दुर्गा सोरेन एक समय झारखंड मुक्ति मोर्चा के कद्दावार नेता माने जाते थे. अध्यक्ष शिबू सोरेन झारखंड की राजनीति में अपने बड़े बेटे दुर्गा को उत्तराधिकारी के रूप स्थापित करने में लगे थे, इसी बीच 39 वर्ष की उम्र में 21 मई 2009 को दुर्गा सोरेन की बोकारो अस्पताल में मृत्यु हो गई थी.
दुर्गा सोरेन के निधन के बाद बढ़ा हेमंत का राजनीतिक करियर
दुर्गा सोरेन के निधन हो जाने के बाद ही शिबू सोरेन ने अपने मंझले बेटे हेमंत सोरेन को राजनीतिक उत्तराधिकारी के रूप में आगे बढ़ाना शुरू किया तो सीता सोरेन भी राजनीति में आईं. हेमंत सोरेन ने 2019 विधानसभा चुनाव में खुद को शिबू सोरेने के वारिस के तौर पर साबित भी किया, तो सीता सोरेन तीसरी बार विधायक बनकर दुर्गा सोरेन की सियासत को आगे बढ़ाने का काम किया. अब सीता सोरेन ने पार्टी छोड़ने का फैसला लेते हुए अपना इस्तीफा झामुमो अध्यक्ष को भेज दिया है.




