
Ranchi: 2018 में गोड्डा के सरकारी स्कूलों में बच्चों के लिये स्कूली पोशाक तैयार किये जाने का जिम्मा एसएचजी से जुड़ी महिलाओं को मिला था. इसके लिये एसएचजी और गोड्डा जिला प्रशासन के बीच एमओयू भी हुआ. इसके मुताबिक 5 सालों तक पोशाक की आपूर्ति की जानी थी. इसके बाद 1 लाख 75 हजार बच्चों के पोशाक सिले गये. पर अभी तक (फरवरी 2022 तक) एसएचजी को भुगतान नहीं किया जा सका है. ऐसे में उनके लिये आर्थिक संकट खड़ा हो चुका है. वे आगे किसी एक्टिविटी के लिये खुद को तैयार नहीं कर पा रहीं हैं.
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अडानी कंपनी से मिली थी ट्रेनिंग
संताल परगना के अलग-अलग इलाकों में एसएचजी से जुड़ी 1000 से अधिक महिलाओं को अडानी के सीएसआर प्रोग्राम के जरिये सिलाई की ट्रेनिंग दी गयी थी. ग्रामीण विकास विभाग भी मानता है कि 2018 में 1019 महिलाओं को ट्रेनिंग मिली थी. इसके बाद उन्हें जिला प्रशासन के द्वारा जेएसएलपीएस द्वारा गठित फूलो झानो सखी मंडल से जोड़ने को कहा गया था. इन महिलाओं ने गोड्डा जिला प्रशासन के कहने पर सरकारी स्कूलों के लिये स्कूल ड्रेस की सिलाई की थी. पर इसके एवज में अब तक उनका पेमेंट नहीं हो पाया है. इसे लेकर एसएचजी समूह की महिलाएं सरकार से न्याय मांग रही हैं.
क्या कह रही है सरकार
विधानसभा के बजट सत्र के दौरान विधायक दीपिका पांडेय सिंह ने सरकार से सरकारी स्कूलों के लिये ड्रेस सिलने वाली एसएचजी महिलाओं के पेमेंट का मसला उठाया था. इस पर ग्रामीण विकास विभाग ने बुधवार को बताया कि जेएसएलपीएस द्वारा गठित फूलो झानो सखी मंडल में केवल 12 महिलाएं ही जुड़ी हैं. हालांकि अडानी के सीएसआर प्रोग्राम के तहत 1019 महिलाओं को ट्रेनिंग मिली थी. स्कूलों में पोशाक आपूर्ति के लिये शिक्षा विभाग और फूलो झानो सक्षम आजीविका सखी मंडल के बीच एमओयू हुआ है. इसमें जेएसएलपीएस को कोई रोल नहीं है. बकाया राशि का भुगतान शिक्षा विभाग, गोड्डा के स्तर से संबंधित है. सरकार ने माना कि बकाया राशि का पेमेंट अब तक नहीं हुआ है. इसके चलते इस समूह की बैठक भी नहीं हो पा रही है.
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