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11 माह पहले तक पावरलिफ्टिंग का P तक नहीं था पता, जीता देश के लिए गोल्ड मेडल 

Ranchi: किरण मिश्रा ने वर्ल्ड पावरलिफ्टिंग चैंपियनशिप कंपिटीशन में देश के लिए गोल्ड मेडल जीता है. 11 महीने पहले तक उन्हें पावरलिफ्टिंग का पी तक मालूम नहीं था. ऊपर से 6 महीने तक कोरोना संकट के कारण इस खेल के लिये प्रैक्टिस करने की गुंजाइश नहीं बन पायी थी. ऐसे में अमरावती, महाराष्ट्र पावरलिफ्टिंग के इंटरनेशनल चैंपियनशिप में गोल्ड मेडल निकालना बेहद दिलचस्प है.

इस कंपिटीशन में नेपाल, कजाकिस्तान सहित 5 देशों के कैंडिडेट भी शामिल हुए थे. इन देशों के प्रतिभागियों के बीच 90 किग्रा भार वर्ग में सुनहरी दास्तान लिखने वाली किरण का किस्सा वाकई बेहद दिलचस्प रहा है.

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कोरोना पर पायी पहली सफलता

एक हाउसवाइफ का इंटरनेशनल प्लेटफॉर्म पर जाकर देश के लिये तिरंगा लहराने की किरण की कहानी दूसरी महिला खिलाड़ियों के लिये भी प्रेरक है. किरण मिश्रा ने न्यूजविंग से बातचीत में बताया कि वे रांची में ही पिछले 40 सालों से रह रही हैं. उनकी पढ़ाई-लिखाई सेंट्रल स्कूल, विमेंस कॉलेज से हुई. एम.ए तक की पढ़ाई की. 2000 में ग्रेजुएशन के बाद संजीव कुमार मिश्रा से शादी हो गयी. इस समय तक खेलों से या कैरियर बनाने को लेकर दूर दूर तक कोई इरादा नहीं था.

राज्य की प्रमुख पावरलिफ्टर खिलाड़ियों में से एक सुजाता भगत की प्रेरणा पर उन्होंने पावर लिफ्टिंग में जनवरी 2020 से हाथ आजमाना शुरू किया. लगातार जिम जाने की आदत बनी. जनवरी-फरवरी में स्टेट लेवल के एक कंपिटीशन में सिल्वर मेडल मिला. जोश बढ़ा. कोरोना संकट के कारण मार्च में लॉकडाउन लगा. मार्च से जुलाई तक प्रैक्टिस पूरी तरह डिस्टर्ब रहा. इस बीच वे कोरोना की चपेट में आकर उससे उबरी भीं. अगस्त से नवंबर के बीच सुजाता के साथ प्रैक्टिस शुरू की. बावजूद इसके अमरावती में उन्होंने अपने विल पावर और साथियों की प्रेरणा से गोल्ड मेडल जीता.

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सरकार से सपोर्ट की उम्मीद

किरण के अनुसार सरकार को पावरलिफ्टिंग खेल को सपोर्ट करने में और पहल करनी चाहिये. दूसरे खेलों में जिस तरह सरकार का जोर रहता है, वैसी ही भावना इस खेल के लिये भी हो. इससे राज्य और देश के लिये और भी काबिल महिला खिलाड़ी मिल सकेंगी.

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