
Jamshedpur : कोल्हान के जानेमाने कारोबारी और उद्यमी राजकुमार शाह के छह ठिकानों पर आयकर विभाग की कार्रवाई दूसरे दिन भी जारी रही है. शुक्रवार को आयकर की टीम ने सुबह सात-आठ बजे से एक साथ राजकुमार शाह के सभी ठिकानों पर धावा बोला. इनमें जमशेदपुर में सर्किट हाउस स्थित राजकुमार शाह के आवास (श्रीनिवास), आदित्यपुर औद्योगिक क्षेत्र स्थित टाटा-कांड्रा रोड पर इंपीरियल आटो का स्कोडा शोरूम, पूर्वी सिंहभूम जिले के पोटका प्रखंड स्थित शाह स्पंज एंड पावर लिमिटेड प्लांट शामिल है. इसके अलावा चाईबासा के यूरोपियन क्वार्टर मोहल्ला स्थित शाह ब्रदर्स के आवास, सदर बाजार स्थित शाह ब्रदर्स के दफ्तर और नोआमुंडी के करमपदा आयरन ओर माइंस में भी आयकर ने रेड डाली.
2016 में भी हो चुकी है आयकर छापेमारी
राजकुमार शाह के ठिकानों पर आयकर की यह दूसरी छापेमारी है. इससे पहले 2016 में भी इनके ठिकानों पर छापेमारी की गयी थी. उस समय मामला राजकुमार शाह के समधी और सिंहभूम चैंबर आफ कामर्स एंड इंडस्ट्री के पूर्व अध्यक्ष राजकुमार अग्रवाल से जुड़ा था. राजकुमार अग्रवाल तब राज्यसभा चुनाव के उम्मीदवार बने थे, जिसमें हार्स ट्रेडिंग के लिए ले जाये जा रहे करोड़ों रुपये नामकुम के पास एक गाड़ी से पकड़े गए थे.
खनन और उद्योग के साथ मीडिया में भी है निवेश
शाह ब्रदर्स ने खनन कारोबार और उद्योग के साथ मीडिया में भी बड़ा निवेश कर रखा है. झारखंड के एक मीडिया हाउस में उनका काफी पैसा लगा बताया जाता है. जानकारी के अनुसार राजकुमार शाह ने जिस मीडिया हाउस में निवेश कर रखा है, वह प्रिंट और डिजिटल मीडिया में सक्रिय है.
खनन घोटाला में भी है शाह ब्रदर्स का नाम
झारखंज के खनन विभाग के अनुसार पश्चिमी सिंहभूम के सारंडा वन क्षेत्र के करमपदा में शाह ब्रदर्स तथा अन्य कंपनियों द्वारा लौह अयस्क के अवैध खनन और बिक्री से झारखंड सरकार को 7000 करोड़ रुपए से ज्यादा के राजस्व का नुकसान हुआ है. इसमें राज्य के खनन विभाग के अधिकारियों की भी मिलीभगत है. सरकारी खजाने को नुकसान दो स्तरों पर पहुंचाया गया है. पहला, अवैध खनन में आरोपी पाये जाने के बावजूद कंपनी से जुर्माना नहीं वसूला गया और दूसरा, लीज रद्द होने के बाद कंपनी के स्टॉक का अधिग्रहण नहीं किया गया. खनन विभाग ने 2014-15 के बीच गड़बड़ी और नियमों की अनदेखी को लेकर चार सदस्यीय उच्चस्तरीय समिति बनाई थी. जांच में शाह ब्रदर्स समेत विभिन्न कंपनियों द्वारा नियमों का उल्लंघन करने की बात साबित हुई. इसके बावजूद अवैध खनन करनेवालों से जुर्माना नहीं वसूला गया. सरकार ने 1 जनवरी 2019 को सारंडा में शाह ब्रदर्स की खनन लीज रद्द कर दी. कंपनी ने इसके खिलाफ उच्च न्यायालय में अपील की. जून 2019 में अपने अंतरिम आदेश में उच्च न्यायालय ने कहा कि सरकार पहले नियमावली बनाये और उसके आधार पर किसी कंपनी की लीज रद्द करे. दूसरी तरफ शाह ब्रदर्स ने खनन का काम जारी रखा. 31 मार्च 2020 को लीज अवधि खत्म होने के बाद राज्य सरकार ने सारंडा में किसी भी खनन पट्टे का नवीनीकरण नहीं किया.
नियमों को ताक पर रख स्टॉक बिक्री की अनुमति दी गयी
नियम के अनुसार, पट्टा रद्द होने के बाद सरकार को कंपनी का स्टॉक अपने कब्जे में लेकर अयस्क की नीलामी करनी चाहिए थी. लेकिन अधिकारियों की मिलीभगत से शाह ब्रदर्स के साथ ही निर्मल कुमार, प्रदीप कुमार, एनकेपीके, रामेश्वर जूट मील, देवका भाई बेलजी समेत अन्य कई पट्टाधारियों को भी स्टॉक बेचने की अनुमति दी गयी. इससे सरकार को एक बार फिर राजस्व का नुकसान हुआ.
सरयू राय ने ट्वीट कर कहा- शाह ब्रदर्स मामला रघुवर तक जायेगा
पूर्व मंत्री और जमशेदपुर पूर्वी के विधायक सरयू राय ने शनिवार को ट्वीट कर कहा – “चाईबासा के शाह ब्रदर्स पर आयकर विभाग की छापामारी मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन को पकड़ में लेने के लिए हुई है.कार्रवाई हुई तो मामला रघुवर दास तक जाएगा. मेरी पुस्तक “रहबर की राहजनी”में इसका पुख़्ता प्रमाण है. मामला काफ़ी समय से ईडी के संज्ञान में है,कारवाई करें. 2015-22 तक की जुगल जोड़ी नपेगी.”
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