
Saurav Singh
Ranchi: राज्य में पुलिस का फर्जीवाड़ा लगातार उजागर हो रहा है. राज्य में जहां एक तरफ पुलिस जनता की रक्षा करने की बात कहती है वहीं दूसरी ओर पुलिस कुछ मामले में अपनी झूठी वाहवाही लूटने के लिए साजिश कर निर्दोषों को जेल भेज रही है.
राज्य में पुलिस के गलत अनुसंधान के कारण कई लोगों को निर्दोष होते हुए भी जेल जाना पड़ा है. राज्य में इस तरह के कई मामले सामने आये हैं, जिस वजह से पुलिस अपनी ही कार्यप्रणाली को लेकर सवालों से घिर गयी है. जानिए ऐसे सात मामले जिनमें पुलिस ने साजिश कर निर्दोषों को भेजा जेल.
निर्दोष को गांजा तस्करी में भेजा गया था जेल
25 अगस्त 2019 की देर रात धनबाद के निरसा थाना से करीब दो किलोमीटर दूर देवियाना गेट एनएच टू के समीप निरसा पुलिस ने गांजा लदा एसयूवी पकड़ा था. निरसा पुलिस के मुताबिक, एसयूवी में लगभाग 40 किलो गांजा मिला था. मामले को लेकर निरसा थाना में प्राथमिकी दर्ज की गयी थी.
ईसीएल कर्मी चिरंजीत घोष सहित पांच लोगों पर गांजा तस्करी का आरोप लगा था. निरसा पुलिस ने चिरंजीत को गिरफ्तार कर जेल भेजा था. इस मामले में चिरंजीत निर्दोष पाया गया, फिर उसे जेल से रिहा करवाया गया. निरसा पुलिस द्वारा निर्दोष ईसीएल कर्मी चिरंजीत घोष की गिरफ्तारी के मामले में अबतक चार लोगों को सीआइडी गिरफ्तार करके जेल भेज चुकी है. इस मामले में सीआइडी धनबाद के पूर्व एसएसपी कौशल किशोर से भी पूछताछ करेगी.
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हथियार होने की गलत सूचना देकर करायी छापेमारी
आतंकवादियों पर नकेल कसने के लिए एटीएस गठन किया गया था लेकिन यह टीम खुद ही मुखबिर के जाल में फंस गयी. मुखबिर दिलावर ने 4 जून 2020 को एटीएस को सूचना दी थी कि बूटी मोड़ स्थित रांची नर्सिंग होम के पास प्रतिबंधित संगठन सिमी के कुछ आतंकवादी मौजूद हैं. इस सूचना पर एटीएस की टीम मुखबिर के साथ भेजी गयी थी. जिसके बाद बताये गये स्थान से 4 जून को राकेश कुमार सिंह, आदिल अफरीदी के अलावा 10 अन्य लोगों को पकड़ा गया था.
इस दौरान दो पिस्टल और मैगजीन भी बरामद करने का दावा किया गया था. जब मामले में वरीय अफसरों ने छानबीन की तब मामला कुछ और ही निकला. मुखबिर दिलावर ने एटीएस को सिमी के आतंकवादी के होने की सूचना दी थी. उसने ही दो पिस्टल और मैगजीन प्लांट करा कर राकेश और अफरीदी के साथ अन्य 10 लोगों को पकड़वाया था. जिन दो युवकों आदिल अफरीदी व राकेश कुमार सिंह को गिरफ्तार किया गया था, वे छानबीन में निर्दोष निकले.
शराब तस्करी के आरोप में 25 दिनों तक रखा था जेल में
रांची के तत्कालीन हटिया डीएसपी विनोद रवानी पर शराब माफिया के साथ मिलकर हटिया के रहने वाले दो निर्दोष व्यक्तियों को झूठे मामले में फंसा कर जेल भेजने का आरोप है. मामला 31 सितंबर 2018 का है. इस बात का जब खुलासा हुआ तो आनन-फानन में जांच करवाकर दोनों निर्दोष युवकों को जेल से बाहर निकाला गया. फर्जी शराब कांड में शामिल तीन थाना प्रभारी जिसमें धुर्वा डोरंडा और तुपुदाना के प्रभारी शामिल थे, उन्हें तुरंत लाइन हाजिर कर दिया गया. लेकिन, हटिया डीएसपी पर कोई कार्रवाई नहीं की गयी. जबकि पीड़ित परिवार वालों के अनुसार और पुलिस की रिपोर्ट में फर्जी शराब कांड की पूरी साजिश रचने का मास्टरमाइंड हटिया डीएसपी को ही बताया गया है.
रांची हटिया तत्कालीन डीएसपी विनोद रवानी की साजिश के शिकार दो युवक मालवीय व नंदकिशोर को 25 दिनों के बाद कोर्ट से बेल मिली थी. इससे पहले कोर्ट ने दोनों युवकों की जमानत इसलिए खारिज कर दी थी क्योंकि पुलिस की ओर से मामले की केस डायरी कोर्ट में समर्पित नहीं की गयी थी.
रांची के धुर्वा में फर्जी तरीके से शराब प्लांट कर दो लोगों को जेल भेजे जाने के मामले में फंसे तत्कालीन हटिया के डीएसपी विनोद रवानी ने पुलिस मुख्यालय को शो-कॉज का जवाब दे दिया था. उन्होंने इस पूरे प्रकरण में खुद को निर्दोष बताया. उनका कहना था कि उन्होंने थानेदारों को छापेमारी का आदेश दिया था. अब थानेदारों ने कहां गड़बड़ी की, इसकी जानकारी उन्हें नहीं मिल सकी थी.
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मानव तस्करी के आरोप में 6 महीने तक जेल में रही महिला
22 जून 2017 रेल पुलिस ने अपनी जांच में जिस महिला को मानव तस्करी का दोषी पाया था. उस महिला को रेलवे न्यायालय ने क्लीन चिट दे दिया है. रेलवे न्यायालय ने यह पाया कि महिला पर लगाया गया मानव तस्करी का आरोप झूठा है. यह आरोप लगा था सिमडेगा जिले की रहनेवाली जिलानी लुगुन पर. मानव तस्करी करने के आरोप में गिरफ्तार की गयी जिलानी लुगुन को छह महीने तक जेल में रहना पड़ा था.
जिलानी लुगुन पर जिस बच्ची की तस्करी करने का आरोप लगाया गया था, उस बच्ची द्वारा धारा 164 के तहत कोर्ट में जिलानी लुगुन के पक्ष में बयान दे दिया गया था. जिसके बाद कोर्ट ने जिलानी लुगुन को क्लीन चिट दे दिया था.
पुलिस ने हथियार प्लांट कर झूठा केस बनाकर भेजा जेल
बीते दो जून को पतरातू पुलिस ने बालू कारोबारी राजेश राम को मोरहाबादी स्थित बोड़ेया रोड के एक फ्लैट में छापेमारी कर पकड़ा था. जब इस मामले में प्राथमिकी दर्ज की तो पतरातू थाने के जेएसआइ मुराद हसन ने लिखवाया कि पतरातू में नलकारी पुल के पास वाहन चेकिंग के दौरान भाग रहे एक वाहन को पकड़ा था. वाहन से दो लोगों को गिरफ्तार किया गया था. गिरफ्तार लोगों में राजेश राम व शिवा महली शामिल हैं. दोनों ही आरोपितों के पास से छापेमारी में रिवाल्वर मिला था.
आर्म्स एक्ट में प्राथमिकी दर्ज कर राजेश राम को जेल भेजा गया था. इधर, जैसे ही राजेश के परिजन को पतरातू पुलिस के फर्जीवाड़े की जानकारी मिली, वे पुलिस मुख्यालय पहुंच गये. परिजन ने पुलिस मुख्यालय में शिकायत की कि राजेश की गिरफ्तारी मोरहाबादी से हुई थी. जिसका सीसीटीवी फुटेज भी पुलिस मुख्यालय को सौंपा. इसके बाद पूरे मामले की जांच करायी गयी तो हथियार प्लांट कर झूठा केस बनाने और जेल भेजने के मामले में पतरातू थानेदार सहित चार पुलिसकर्मी निलंबित हो गये.
चतरा पुलिस ने निर्दोष युवक को दोषी बनाकर कोर्ट में पेश किया
चतरा टंडवा थाना पुलिस के द्वारा अक्टूबर 2019 में निर्दोष युवक को दोषी बनाकर कोर्ट में पेश करने का मामला सामने आया है. युवक का नाम मनीष कुमार सिंह है. अपनी खामियों को छिपाने की नीयत से मामले के जांच अधिकारी ने असली दोषी के ढूंढने की जगह निर्दोष युवक मनीष कुमार सिंह को गिरफ्तार किया और फिर फर्जी नाम से जेल भेज दिया. हांलाकि इस मामले का जल्द पर्दाफाश हो गया.
आइओ सचिदानंद सिंह की इस हरकत के लिए जज ने कोर्ट में ही पुलिस को फटकार लगायी और युवक को छोड़ने का आदेश दिया.जानकारी के अनुसार टंडवा थाना में दर्ज कांड संख्या 112/18 में कार्रवाई करते हुए मामले के आइओ सचिदानंद सिंह ने आरोपी को जेल भेजने के लिए अदालत में पेश किया था. इस केस में कुंमडांग गांव निवासी लेखु सिंह को जेल भेजना था, लेकिन केस आइओ ने लेखु के बजाय गांव के ही मनीष कुमार सिंह नाम के निर्दोष युवक को गिरफ्तार कर उसका चालान कर दिया था. इतना ही नहीं आइओ ने मामले में मनीष के नाम के बाद उर्फ लेखु लिख दिया था.
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गांजा प्लांट कर फंसाने की शिकायत की जांच करेगी CID
रामगढ़ जिले के भुरकुंडा में एक ठेकेदार प्रमोद कुमार सिंह को एनडीपीएस एक्ट में जेल भेजने के मामले में सीआइडी एडीजी ने जांच का आदेश दिया है. प्रमोद कुमार सिंह के भाई रमेश भारद्वाज ने प्रमोद कुमार सिंह को जेल भेजने के मामले में रामगढ़ की भुरकुंडा पुलिस पर साजिश रचने का आरोप लगाया था.
रमेश भारद्वाज ने भुरकुंडा पुलिस पर आरोप लगाया था कि उनके भाई ने स्थानीय थानेदार रघुनाथ सिंह के द्वारा कोयला तस्करी करवाने को लेकर एक वीडियो सोशल मीडिया पर पोस्ट किया था. इस पोस्ट से नाराज होकर थानेदार ने उन्हे गांजा प्लांट करवाकर जेल भिजवा दिया. पूरे मामले में शिकायत मिलने के बाद सीआइडी एडीजी अनिल पाल्टा ने जांच का आदेश दिये हैं. यह मामला बीते 24 मई का है.




