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जंगली जानवरों ने एक लाख से अधिक लोगों के फसल और घरों को रौंदा, 1100 लोगों को मौत के घाट उतारा, वन विभाग रोकने में विफल

वन विभाग 46.82 करोड़ रुपये बांट चुका है मुआवजा, हाथियों और जंगली जानवरों से बचाव के उपाय नहीं

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Ranchi : झारखंड में हाथी-मानव द्वंद रोकने की कोई ठोस योजना वन विभाग नहीं बना पाया है. साथ ही जंगली जानवरों के हमले से बचाव के भी माकुल इंतजाम नहीं किये गये हैं. वन विभाग के आंकड़ों के अनुसार अब तक हाथी और जंगली जानवरों ने एक लाख 90 हजार 332 लोगों को नुकसान पहुंचाया है. इसमें फसल का नुकसान, पशुओं का नुकसान, मकानों का नुकसान और अनाज का नुकसान शामिल हैं. हाथियों और जंगली जानवरों के हमले से अब तक 1100 लोगों की मौत हो चुकी है.

मुआवजे के एवज में 12.30 करोड़ खर्च

राज्य गठन से लेकर अब 1100 लोग हाथी और जंगली जानवरों के शिकार हो गये. इसके एवज में वन विभाग 12.30 करोड़ रुपये मुआवजा बांट चुका है. 1847 लोग घायल हो चुके हैं, इसके एवज में 3.40 करोड़ रुपये मुआवजा बांटा गया है. 109032 लोगों के फसल का नुकसान, पशु का नुकसान, मकान का नुकसान और अनाज का नुकसान हुआ. इसके एवज में 31.12 करोड़ रुपये मुआवजा बांटा जा चुका है.

हाथियों और जंगली जानवरों को काबू करने में वन विभाग विफल

वन विभाग हाथियों और जंगली जानवरों को काबू करने में अब तक विफल रहा है. हर महीने प्रदेश के विभिन्न क्षेत्रों में हाथियों का हमला जारी है. हाथियों के पुनर्वास की व्यवस्था नहीं हो पायी है. हाथियों के भ्रमण का कॉरिडोर नहीं बन पाया. एलिफेंट रेस्क्यू सेंटर भी अब तक नहीं है. वहीं भालू संरक्षण की ठोस नीति नहीं बन पायी है. छत्तीसगढ़ की तर्ज पर हजारीबाग में गज परियोजना बनाई गयी थी, वह भी लागू नहीं हो पायी. वन विभाग का वाइल्ड लाइफ क्राइम कंट्रोल भी सक्रिय नहीं हो पाया है.

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