
नक्सली हमले में धर्मदेव के मारे जाने की सूचना मिलते ही शाहबगंज में छा गया मातम
Varanasi: होली में 10 दिनों की छुट्टी बिताकर धर्मदेव कुमार ड्यूटी पर लौटे थे. जाने से पहले धर्मदेव ने अपने परिवार से वादा किया था कि वो जल्द घर वापस आयेगा. लेकिन नियति को कुछ और ही मंजूर था. धर्मदेव ड्यूटी से घर तो वापस लौटे लेकिन वो क्षण खुशी का नहीं था. छतीसगढ़ के बीजापुर में हुए नक्सली हमले में यूपी के चंदौली के लाल धर्मदेव कुमार की शहादत की सूचना उनके परिवार वालों को आई. रविवार देर शाम इस बारे में सूचना मिली तो गांव शाहबगंज में मातम छा गया. धर्मदेव के घर गांव पर लोग इक्कठा होने लगे. सूचना के बाद जिले के अफसर भी उनके घर पहुंचकर परिवारवालों से मुलाकात की.
सीआरपीएफ के स्पेशल ग्रुप कोबरा बटालियन में कमांडो थे धर्मदेव
धर्मदेव सीआरपीएफ के स्पेशल ग्रुप कोबरा बटालियन में कमांडो के पद पर तैनात थे. साल 2013 में सीआरपीएफ में उनका चयन हुआ था. धर्मदेव के पिता रामाश्रय गुप्ता ने बताया कि बचपन से धर्मदेव देश की सेवा के लिए फोर्स में जाने की बात कहते थे.
मार्च में छुट्टियों में आए थे घर
रामाश्रय गुप्ता ने बताया कि मार्च के महीने में वो छुट्टी लेकर गांव आए थे. होली के 10 दिनों पहले धर्मदेव छुट्टी बिताकर वापस ड्यूटी पर लौटे थे. ड्यूटी पर जाते समय उन्होंने जल्द वापस आने का वादा किया था. लेकिन अब उनकी शहादत की खबर आई है.
पत्नी और मां का रो-रो कर बुरा हाल
बेटे और पति की शहादत की खबर के बाद धर्मदेव की मां कृष्णावती और पत्नी मीना का रो-रो कर बुरा हाल है. छत्तीसगढ़ के बीजापुर में हुए नक्सली हमले ज्योति और साक्षी के अलावा मीना के गर्भ में पल रहे बच्चे के सिर से पिता का साया भी छीन लिया.
छोटा भाई भी सीआरपीएफ में है जवान
धर्मदेव के छोटे भाई धनजंय भी सीआरपीएफ के जवान हैं. धर्मदेव के साथ ही उनका भी चयन सीआरपीएफ में हुआ था. वर्तमान में धनजंय भी छतीसगढ़ में तैनात हैं.
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