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#SaryuRoy ने कहा- रघुवर के साले खेमराज 15 लाख के एवज में छीन रहे गरीब का मकान, सिस्टम चुप क्यों?

Jamshedpur : रघुवर सरकार में मंत्री रहे और अब मुख्यमंत्री के ही खिलाफ चुनाव लड़ रहे सरयू राय ने एक और गंभीर सवाल रघुवर दास से पूछा है. उन्होंने पूछा है कि वे अपने साले खेमराज साहू को क्यूं शह दे रहे हैं?

राय ने कहा- पहले सीएम ये जानने की कोशिश क्यूं नही करते कि उनके साले के पास 15 लाख रुपये कैश कहां से आया जबकि वो न तो धनवान हैं और न ही उनके पास कोई रोजगार. इतनी बड़ी राशि खेमराज के पास कहां से आयी और नोटबंदी के दौरान अपने मित्र मनीष दास को दिया क्यूं?

राय ने कहा कि अब खेमराज साहू जबरन उस पैसे के एवज में घर हड़पने का प्रयास कर रहे हैं. खेमराज मनीष दास और उसके परिवार को डराते धमकाते हैं. थाने बुलाकर उनकी पिटाई होती है. एक बेरोजगार ये सब किसके दम पे कर रहा है?

सऱयू राय ने साफ कहा कि वो ये नही कह रहे हैं कि खेमराज साहू गलत हैं बल्कि वे कह रहे हैं कि नोटबंदी के वक्त 15 लाख रुपये खेमराज के पास आना जांच का विषय है. एक बेरोजगार के पास इतने पैसे पर इनकम टैक्स विभाग चुप क्यों रहा. अगर यह जांच का विषय है तो उनकी मांग है कि जांच होनी चाहिए थी.

Sanjeevani

बात आगे बढ़ाते हुए सरयू राय ने कहा की रमेश दास की हिम्मत की वजह से ही मामला अब हाईकोर्ट में है.

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जानिये क्या है मामला और कैसे पहुंचा हाइकोर्ट 

मनीष दास ने सीएम रघुवर दास के साले पर आरोप लगाया था कि नोटबंदी के दौरान खेमराज साहू ने मनीष को 15 लाख रुपये नकद दिये थे. नोटबंदी के बाद अब खेमराज की नीयत बदल गयी. अब खेमराज उनका मकान लिखवाना चाह रहे हैं.

जबकि मनीष दास का कहना है कि वो उन्हें रकम लौटाने को तैयार हैं, लेकिन मकान नहीं दे सकते. मकान नहीं देने की सूरत में अब खेमराज पावर का इस्तेमाल कर जबरदस्ती कर रहे हैं.

मनीष दास का कहना है कि खेमराज अपने जीजा रघुवर दास के पावर की मदद से उन्हें प्रताड़ित करते रहते हैं. मनीष ने कोर्ट में दायर पिटीशन में कहा है कि खेमराज कहते हैं कि जो पैसा उन्होंने मनीष को दिया है, वो उनकी बहन यानि रघुवर दास की पत्नी का है.

यही नहीं मनीष दास ने लिखित आरोप लगाया है कि खेमराज कहते हैं कि वो किसी पुलिस के पास मदद के लिए जाकर दिखाये. मनीष आगे कहते हैं कि गृह विभाग उनके जीजा रघुवर दास के  पास कहकर उन्हें डराया जाता है. पुलिस के पास जाने से भी पुलिस खेमराज का कुछ नहीं बिगाड़ सकती.

हांलाकि हाईकोर्ट भी दूसरे पक्ष को जवाब देने के लिए नोटिस भेज चुकी है.

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टाटा भी खेमराज पर मेहरबान

सरयू राय ने फिर सवाल उठाते हुए कहा कि साधारण से घर में रहने वाले खेमराज साहू पर टाटा क्यों मेहरबान हो गयी जबकि खेमराज के पास टाटा की नौकरी नहीं है. वो बरोजगार हैं फिर टाटा ने अपना क्वार्टर रहने के लिए कैसे दे दिया है?

आखिर ये कैसे संभव है जबकि अपने कर्मचारियों को घर देने से पहले टाटा कई तरह की इंक्वायरी करती है तब जाके उनको घर मिलता है लेकिन यहां तो एक बेरोजगार को टाटा प्रबंधन ने बड़ा सा घर रहने के लिए दे दिया. ये भी जांच का ही विषय है.

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