Jharkhand Vidhansabha Election

#JharkhandElection : टिकट बंटने और दल-बदल की भागम-भाग के बाद जानें,  कहां बीजेपी हुई मजबूत और कहां कमजोर

Ranchi: चुनाव से पहले बीजेपी-आजसू का गठबंधन नहीं होने की सूरत में अब बीजेपी और आजसू कई सीटों पर आमने-सामने है.  वहीं कई बीजेपी के संभावित उम्मीदवारों ने टिकट नहीं  मिलने की वजह से बागी रुख अख्तियार कर लिया है. जिसका जीता-जागता उदाहरण पूर्वी जमशेदपुर विधानसभा क्षेत्र में देखा जा सकता है. पश्चिमी जमशेदपुर से टिकट न मिलने की सूरत में सरयू राय ने सीएम रघुवर दास के खिलाफ ही मोर्चा खोल दिया है. ऐसे और भी कई उदाहरण हैं.

राजनीतिक पंडितों का कहना है कि जिस तरह से टिकटों का बंटवारा बीजेपी ने किया है, उससे बीजेपी को चुनाव में परेशानी का सामना करना पड़ सकता है. इसका असर नतीजों पर भी पड़ सकता है. टिकट बंटवारे के बाद बीजेपी कहीं मजबूत हुई है, तो कहीं कमजोर. जानते हैं बीजेपी कहां हुई मजबूत और कहां हुई कमजोर.

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लोहरदगाः लोहरदगा सीट पर बीजेपी ने कांग्रेस से बीजेपी में शामिल हुए विधायक सुखदेव भगत को टिकट दिया है. नामांकन के बाद उनका प्रचार करने अमित शाह लोहरदगा पहुंचे. लोहरदगा सीट से जीत किसकी होगी यह कहना जरा जल्दबाजी होगी. लेकिन माना जा रहा है कि सुखदेव भगत एक मजबूत उम्मीदवार हैं.  आजसू के उम्मीदवार और पूर्व विधायक केके भगत की पत्नी नीरू शांति भगत और बीजेपी के सुखदेव भगत के बीच कांटे की टक्कर है.

बरहीः यहां भी बीजेपी ने कांग्रेस के मौजूदा उम्मीदवार मनोज यादव को टिकट दिया है. बरही में बीजेपी और कांग्रेस ने मिलकर उम्मीदवारों की अदला-बदली कर ली है. पिछले चुनाव में बीजेपी के टिकट पर चुनाव लड़ने वाले उमाशंकर अकेला इस बार कांग्रेस से मैदान में हैं. दोनों उम्मीदवारों के बीच कड़ी टक्कर है.

बहरागोड़ाः जेएमएम के भरोसेमंद कहे जाने वाले कुणाल षाड़ंगी ने बीजेपी का हाथ थाम लिया. हालंकि दिनेश कुमार गोस्वामी को दूसरी कोई बड़ी पार्टी ने टिकट नहीं दिया. लेकिन बीजेपी के समीर मोहंती जिसने 2014 के चुनाव में जेवीएम से चुनाव लड़ा था वो जेएमएम में शामिल हो गए हैं. कुणाल षाड़ंगी और समीर मोहंती के बीच कांटे की टक्कर मानी जा रही है.

भवनाथपुरः यह सीट काफी चर्चा में हैं. भ्रष्टाचार विरोधी पार्टी कही जाने वाली बीजेपी ने यहां अपने पुराने प्रत्याशी अनंत प्रताप देव को टिकट न देते हुए 130 करोड़ के दवा घोटाले में चार्जशीटेड आरोपी भानू प्रताप शाही को टिकट दे दिया. अब अनंत प्रताप देव भानू प्रताप शाही के खिलाफ निर्दलीय उम्मीदवार बन कर उन्हें चुनौती दे रहे हैं. दोनों के बीच कांटे की टक्कर है.

मांडूः लोकसभा चुनाव के ही समय जेएमएम से नाराज चल रहे टेकलाल महतो के बेटे जेपी पटेल ने बीजेपी का हाथ थामने की घोषणा कर दी थी. पार्टी ने भी  जेपी पटेल पर भरोसा जताते हुए उन्हें टिकट दे दिया. पार्टी के पुराने साथी कुमार महेश सिंह  बागी रुख अख्तियार करते हुए निर्दलीय चुनाव लड़ रहे हैं. वहीं जेएमएम की तरफ से जेपी पटेल के बड़े भाई अपने ही सगे छोटे भाई के खिलाफ चुनाव लड़ रहे हैं.

लातेहारः जेवीएम से 2014 का चुनाव लड़ने वाले प्रकाश राम सरकार बनाते वक्त बीजेपी में शामिल हो गए. इस बार उन्हें बीजेपी ने टिकट भी दे दिया है. लेकिन उन्हें टिकट मिलने से बीजेपी के पुराने साथी बैद्यनाथ राम बागी हो गये. उन्होंने जेएमएम का हाथ थाम लिया है. दोनों के बीच दिलचस्प टक्कर होने की बात क्षेत्र में कही जा रही है.

हटियाः पहली बार आजसू और दूसरी बार जेवीएम से विधायक बनने वाले नवीन जायसवाल इस बार बीजेपी के उम्मीदवार हैं. हालांकि लाख अटकलों के बाद भी हटिया विधानसभा क्षेत्र से पिछले साल की उम्मीदवार सीमा शर्मा ने बागी रुख अख्तियार नहीं किया. कांग्रेस ने हटिया से अजयनाथ शाहदेव को उतारा है.

सारठः सारठ में जेवीएम से बीजेपी में शामिल हुए रणधीर सिंह को पार्टी ने टिकट दिया है. हालांकि उदय शंकर सिंह ने बागी रुख अख्तियार नहीं किया. सारठ से जेमएम ने परिमल कुमार सिंह को उतारा है. दोनों के बीच सीधी टक्कर है.

चंदनकियारीः  मंत्री अमर बाउरी बीजेपी के उम्मीदवार हैं. इन्होंने 2014 में जेवीएम से चुनाव जीता था. लेकिन बाद में बीजेपी में शामिल हो गये. आजसू और बीजेपी के बीच गठबंधन टूटने का कारण इस सीट को भी माना जाता है. क्योंकि आजसू के कद्दावर नेता उमाकांत रजक इस सीट से आजसू से उम्मीदवारी कर रहे हैं.

पूर्वी जमशेदपुरः झारखंड की सबसे चर्चित सीट पूर्वी सिंहभूम बन गयी है. 1995 से लगातार यहां से रघुवर दास जीतते आये हैं. लेकिन इस बार इस सीट से कौन जीत कर विधानसभा पहुंचेगा, इसपर बीजेपी के बागी सरयू राय ने प्रश्न चिन्ह लगा दिया है. दरअसल सरयू राय अपनी सीट पश्चिमी जमशेदपुर छोड़ कर पूर्वी से निर्दलीय चुनाव लड़ रहे हैं. इस सीट पर आगे क्या होगा अभी कहना मुश्किल है. कहा जा रहा है कि सरयू राय रघुवर दास को कड़ी टक्कर देंगे.

छत्तरपुरः राधा कृष्ण किशोर पांच बार छतरपुर से विधायक रह चुके हैं. उन्होंने कांग्रेस के टिकट पर 1980, 1985, 1995 का विधानसभा चुनाव जीता था. अलग झारखंड बनने के बाद राधा कृष्ण किशोर जदयू के टिकट पर 2005 का विधानसभा चुनाव जीता. फिर राधा कृष्ण किशोर भाजपा में शामिल हो गये और 2014 का विधानसभा चुनाव जीतकर पांचवी बार विधायक बने. राधा कृष्ण किशोर ने कहा कि वे पिछले 40 साल से राजनीति में सक्रिय हैं. क्षेत्र की जनता ने उनपर भरोसा करके पांच बार विधायक चुना है.

भाजपा ने इस बार पुष्पा देवी को टिकट दिया है. टिकट कटने के बाद राधाकृष्ण किशोर आजसू के टिकट से चुनावी मैदान में है.  पुष्पा देवी और राजद के टिकट से चुनाव लड़ रहे विजय कुमार भी मजबूत पकड़ रखते हैं. जिसके कारण चुनाव बेहद रोचक हो चुका है.

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