
Jamshedpur : जनजातीय गौरव दिवस, बिरसा मुंडा जयंती एवं झारखंड स्थापना दिवस पर जमशेदपुर के लेखक संदीप मुरारका द्वारा संपादित एक “कॉफी टेबल बुक” देश के 105 विशिष्ट जनजातीय व्यक्तित्व प्रकाशित हुई है. कुल 116 पृष्ठों की इस पुस्तक में देश के 105 विशिष्ट व्यक्तित्वों का सचित्र संक्षिप्त परिचय शामिल है. इस पुस्तक की संकल्पना एवं फीचर लेखन संदीप मुरारका ने किया है. उन्होंने यह पुस्तक सिदगोड़ा टाउन हॉल में मंत्री बन्ना गुप्ता एवं उपायुक्त विजया जाधव को भेंट की. पुस्तक में कश्मीर से कर्नाटक तक के 23 राज्यों की 52 जनजातियों को समेटने का प्रयास किया गया है. देशभर में फैले जनजातीय समुदाय के वैसे प्रेरक व्यक्तित्व इस कॉफी टेबल बुक का हिस्सा हैं, जो भले स्वयं कभी स्कूल नहीं गये हों, परंतु आज उनके अनुकरणीय जीवन व कार्यों पर पीएचडी की जा रही है.
देश के 105 विशिष्ट जनजातीय व्यक्तियों का है परिचय
इस सचित्र पुस्तक में पद्म सम्मान प्राप्त 76 आदिवासियों का जिक्र है, वहीं राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू, दिशोम गुरु शिबू सोरेन, केंद्रीय मंत्री अर्जुन मुंडा, मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन, छत्तीसगढ़ की राज्यपाल अनसुइया उइके, मध्यप्रदेश के राज्यपाल मंगूभाई छगनभाई पटेल, देश के कैग गिरीश चंद्र मुर्मू , राजदूत स्व एन एन हरालु, अमृत लुगुन, विश्व बैंक के वरिष्ठ सलाहकार राजीव टोपनो जैसे आदिवासी राजनयिक व्यक्तित्वों की चर्चा है. इनके अलावा झारखंड की बाइकर गर्ल कंचन उगूरसैंडी, महावीर चक्र से सम्मानित कैप्टन कैशिंग क्लिफफोर्ड नोंग्रुम, भारत के मुख्य चुनाव आयुक्त जेम्स माइकल लिंग्दोह एवं हरि शंकर ब्रह्मा, मिरेकल मैन ऑफ इंडिया आर्मस्ट्रांग पॉमे भाप्रसे, सर्वोच्च न्यायालय के न्यायाधीश एच के सेमा, परमवीर चक्र से सम्मानित लांस नायक अल्बर्ट एक्का, पर्यावरणविद चामी मुर्मू, सिदो कान्हू विश्विद्यालय की कुलपति प्रो सोना झरिया मिंज, एवरेस्ट विजेता बिनीता सोरेन, ध्यानचंद पुरस्कार विजेता सुमराय टेटे, भारतीय महिला जूनियर हॉकी टीम की कप्तान सलीमा टेटे, अंतरराष्ट्रीय मुक्केबाज टी जोरमथांगा, पहली आदिवासी महिला पायलट अजमेरा बॉबी, नारी शक्ति पुरस्कार विजेता पडाला भूदेवी जैसे प्रेरक व्यक्तित्वों को समेटे हुये यह रंगीन पुस्तक काफी आकर्षक बन पड़ी है. पुस्तक का मूल्य 1800 रुपये है. प्रकाशक कोलकाता के विद्यादीप फाउंडेशन एवं मुद्रक रांची के कैलाश पेपर कन्वर्शन प्राइवेट लिमिटेड हैं.
पुस्तक में कौन कौन सी जनजातियां हैं शामिल
संथाल, खोंड,भोट्टादा, उरांव, मुंडा, खड़िया, हो, भुइंया (ओड़िशा), भूमिज, परधान (गोंड़), पुहुम, भील, कालबेलिया, अहरी (मीणा), वरली, महादेव कोली, कोकना, चारण (गढ़वी), कानीकर, तांगखुल, गारो, जयंतिया पहाड़ी, खासी,रेयागं (ब्रू), जमटिया, डारलोंग, कॉम रेम, नागा, जेमे कछा, सुमी, आओ, रोंगमेई (काबुई), अंगामी, नाइक, हक्काली, गौड़ालू, हल्लाकी, मिसिंग (मिरी), बोड़ो, राभा, शेरदुकपेन, मोनपा, न्यीशी, आदी, भूटिया, लेपचा, ओंग, कुकी (चिन), राजगोंड़, कोया, बंजारा, बकरवाल एवं सावरा.
संदीप मुरारका का मानना है कि प्रचार प्रसार से दूर रहने वाले जनजातीय समुदाय के महानायकों के संघर्ष व उपलब्धियों की कहानी को पुस्तक का आकार देना अत्यावश्यक है. ताकि यदि कोई शोधार्थी इनपर शोध करना चाहे तो उसे मूल सामग्री उपलब्ध हो सके. जनजातीय समुदाय के महान व्यक्तित्वों की आधी अधूरी जीवनियां क्षेत्रीय भाषाओं में बिखरी पड़ी हैं, इन सब पर शोध कर एक एक पुस्तक लिखी जा सकती है. आदिवासी राष्ट्र रूपी वृक्ष की जड़ हैं, इनकी जीवनियां इतिहास के कई बंद दरवाजों को खोल सकती है़.
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