
Patna: कल तक एनडीए में बने रहने की वकालत करने वाले रालोसपा सांसद राम कुमार शर्मा भी अब पार्टी प्रमुख के सुर में सुर मिलाते नजर आये. सांसद शर्मा ने उपेंद्र कुशवाहा के राजग नेतृत्व के खिलाफ आक्रामक रुख का समर्थन करते हुए रविवार को कहा कि अगर समुचित भागीदारी नहीं मिलती है तो गठबंधन में बने रहने का क्या औचित्य है. गौरतलब है कि हाल ही में शर्मा ने कुशवाहा के एनडीए नेतृत्व खासकर बिहार के मुख्यमंत्री और जदयू के राष्ट्रीय अध्यक्ष नीतीश कुमार के खिलाफ उनके कड़े रूख को अस्वीकार कर दिया था.
सम्मान नहीं वहां गठबंधन का कैसा लाभ- शर्मा
सीतामढ़ी संसदीय क्षेत्र से सांसद शर्मा ने संवाददाताओं से बात करते हुए कहा कि किसी को भी ऐसे गठबंधन में नहीं रहना चाहिए जहां समुचित भागीदारी और सम्मान नहीं मिलता. दो-तीन दिन में आरएलएसपी फैसला कर लेगी कि क्या करना है. पूर्वी चंपारण में हाल में हुए रालोसपा के चिंतन शिविर में अनुपस्थित रहे शर्मा से राजद, कांग्रेस और हिंदुस्तान अवाम मोर्चा वाले महागठबंधन में उनकी पार्टी के शामिल होने के बारे में पूछे जाने पर उन्होंने कहा कि हमारे राष्ट्रीय अध्यक्ष इस संबंध में निर्णय लेने के लिए पार्टी द्वारा अधिकृत किये गये हैं.
वही आरएलएसपी सांसद के बयान पर प्रतिक्रिया देते हुए जेडीयू प्रवक्ता सुहेली मेहता ने कहा कि कई तरह की बातें पिछले कुछ दिनों से हो रही है. अपनी राह चुनने को हर कोई स्वतंत्र है. हमें मालूम है कि फिलहाल आरएलएसपी एनडीए का अभिन्न अंग है. आगे इस पर रालोसपा फैसला लेगी.
उल्लेखनीय है कि बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार से नाराज चल रहे रालोसपा प्रमुख उपेंद्र कुशवाहा ने एनडीए में सीट बंटवारे को लेकर बीजेपी के राष्ट्रीय अध्यक्ष अमित शाह से समय मांगा था, लेकिन उनसे मुलाकात नहीं हो पायी. वही मोतिहारी में 6 दिसंबर को पार्टी के चिंतन शिविर में उन्होंने पूरे मामले को लेकर इशारों में एनडीए से अलग होने और नीतीश सरकार के खिलाफ मोर्चा खोलते हुए कहा था कि ‘याचना नहीं अब रण होगा’.
रालोसपा के इस चिंतन शिविर में इस दल के दोनों विधायकों ललन पासवान और सुधांशु शेखर तथा सांसद राम कुमार शर्मा जो कि राजग के बाहर जाने का विरोध विरोध कर रहे हैं, अनुपस्थित रहे थे.
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