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RIMS का दावा: अपर चिकित्सा अधीक्षक और चिकित्सा उपाधीक्षक की नियुक्ति मामले में मंत्री बन्ना गुप्ता का भी अनुमोदन

Ranchi: रिम्स (राजेंद्र इंस्टीट्यूट ऑफ मेडिकल साइंसेज,रांची) ने दावा किया है कि अपर चिकित्सा अधीक्षक और 2 चिकित्सा उपाधीक्षक की नियुक्ति मामले में कोई इश्यू नहीं है. उसने इस मामले में अपनी बात रखते कहा है कि मीडिया में अपर चिकित्सा अधीक्षक मामले की होगी जांच और इससे संबंधित प्रकाशित खबर पूरी तरह सत्य नहीं है. विभिन्न समाचार पत्रों में अपर चिकित्सा अधीक्षक नामित करने के मामले पर विभागीय जांच के निर्देश शीर्षक से प्रकाशित खबर सही नहीं है. रिम्स कार्यकारिणी समिति की 34वीं बैठक में लिए गए निर्णय के आलोक में अस्पताल के सफल संचालन के लिए कार्यकारी व्यवस्था के तहत अपने कार्यों के अतिरिक्त अपर चिकित्सा अधीक्षक व 2 चिकित्सा उपाधीक्षक नामित किये गए थे. उन्हें किसी भी प्रकार का वित्तीय लाभ नहीं दिया जा रहा है. कार्यकारिणी समिति बैठक की कार्यवृत्त को स्वास्थ्य, चिकित्सा शिक्षा एवं परिवार कल्याण मंत्री बन्ना गुप्ता द्वारा अनुमोदन प्राप्त है.

सिंडिकेट है परेशान

रिम्स प्रबंधन ने सोशल मीडिया के जरिए अपर मेडिकल सुपरिटेंडेंट नियुक्ति और उन्हें भुगतान मामले में कहा है कि रिम्स में वर्षों से कई सिंडिकेट सक्रिय हैं. इन्हें ख़त्म करने की कवायद जारी है. इस सिंडिकेट के सदस्यों को वित्तीय नुक्सान हो रहा है जिस वजह से वह रिम्स के खिलाफ निरंतर गलत ख़बरें फैला रहे हैं. अपर चिकित्सा अधीक्षक डॉ शैलेश त्रिपाठी द्वारा इन्हीं सिंडिकेट पर कार्यवाई की जा रही है जिस कारण से उन्हें अनावश्यक रूप से निशाना बनाया जा रहा है.

रिम्स की व्यवस्था में सुधार हेतु कई कार्य किये जा रहे हैं. इनमें नियुक्ति व विभिन्न उपकरणों और शल्य (ऑपरेशन) चिकित्सा वस्तुओं की खरीद के लिए निविदा शामिल है. प्राथमिकता के अनुसार निविदा प्रकाशित की जा रही है. टेंडर प्रक्रिया पर शीघ्र कार्रवाई हेतु प्रशिक्षित मैनपावर की व्यवस्था की जा रही है.

अर्धसत्य खबरों का प्रकाशन कर कुछ समाचार पत्रों द्वारा रिम्स की छवि को धूमिल करने का निरंतर प्रयास किया जा रहा है. रिम्स प्रबंधन द्वारा इस तरह की खबरों से सम्बंधित सही तथ्य अपने आधिकारिक फेसबुक व एक्स पर प्रकाशित किया जाता है ताकि सही तथ्य सभी तक पहुंच सके.

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