JharkhandRanchi

झारखंड के 20 लोगों पर दर्ज देशद्रोह के मामले के खिलाफ दिल्ली में प्रतिरोध मार्च

Ranchi/Delhi : झारखंड के 20 सामाजिक कार्यकर्ताओं पर देशद्रोह का मामला दर्ज किये जाने के खिलाफ रविवार को नयी दिल्ली में प्रतिरोध मार्च निकाला गया. यह प्रतिरोध मार्च नयी दिल्ली के मंडी हाउस से दोपहर  दो बजे निकलकर जंत-मंतर गया. गौरतलब है कि झारखंड के 20 सामाजिक कार्यकर्ताओं, लेखकों पर झारखंड सरकार ने देशद्रोह का मुकदमा दर्ज किया है. इनमें फादर स्टेन स्वामी, विनोद कुमार, आलोका कुजूर, राकेश किड़ो सहित बीस लोग शामिल हैं. इन पर फेसबुक पर लिखकर खूंटी, रांची के आदिवासियों को भड़काने का आरोप है.

इसे भी पढ़ें- केंद्र ने राष्ट्रीय स्वास्थ्य बीमा योजना का नाम बदलकर कर दिया आयुष्मान भारत

अभिव्यक्ति की आजादी पर हमला हुआ है

Catalyst IAS
ram janam hospital

प्रतिरोध मार्च में शामिल लोगों ने कहा कि रघुवर दास सरकार ने हाल में भूमि अधिग्रहण कानून में संशोधन किया है. साथ ही सरकार ग्रामीण अंचल की जमीन को लैंड बैंक में शामिल कर पूंजीपतियों को देने का मन बना चुकी है. बगैर ग्रामसभा की अनुमति या परामर्श के कॉरपोरेट से अनेक एमओयू किये गये हैं और खूंटी में पत्थलगड़ी आंदोलन के रूप में आदिवासियों ने जब उसका विरोध किया, तो उस आंदोलन को कुचलने का षड्यंत्र किया गया. देशद्रोह का यह मामला उसी षड्यंत्र का हिस्सा है. यह अभिव्यक्ति की आजादी पर हमला है. प्रतिरोध मार्च मंडी हाउस के सामने से नेपाल भवन के पास जमा होकर और वहां से जंतर-मंतर तक प्रदर्शन करते हुए गया. जंतर-मंतर पर दो घंटे तक धरना दिया गया. इस दौरान राष्ट्रपति और प्रधानमंत्री के नाम ज्ञापन सौंपा गया.

The Royal’s
Sanjeevani

इसे भी पढ़ें- सादरी बोल कर झारखंडियों को पीएम ने की लुभाने की कोशिश

प्रतिरोध मार्च में ये हुए शामिल

प्रतिरोध मार्च में देशद्रोह का मुकदमा झेल रहे पत्रकार विनोद कुमार भी शामिल हुए. इनके अलावा दिल्ली समर्थक समूह से सत्यम श्रीवास्तव, अलीन लकड़ा, स्नेहलता शुक्ला जेएवाईएस (जयस) से सर्वश्री मिथिलेश हेंब्रम, प्रो.बलभद्र बिरुआ, गंगाधर बिरुआ, दिल्ली आदिवासी यूथ नेटवर्क से सर्वश्री विंसेंट एक्का, वी जनमुक्ति संघर्ष वाहिनी से चक्रवर्ती ए प्रियदर्शी, तृप्ति पारेख, ज्ञानेंद्र कुमार मौजूद थे. साथ ही बड़ी संख्या में झारखंड के लोग जो दिल्ली में रह रहे हैं, वे विरोध मार्च में शामिल हुए.

इसे भी पढ़ें- प्रचार-प्रसार में सरकार ने फूंके करोड़ों, कार्यक्रम में आये लोगों को योजना के बारे में पता तक नहीं

राष्ट्रपति को सौंपे ज्ञापन में यह लिखा

प्रतिष्ठा में ,

महामहिम राष्ट्रपति,

भारत सरकार, नयी दिल्ली.

विषय : झारखंड के खूंटी थाना में बीस (20) लोगों के खिलाफ दर्ज देशद्रोह के मामले के संदर्भ में,

महोदय,

आपको उपरोक्त लिखित विषय पर ध्यान आकर्षित करना चाहता हूं. जैसा कि आपको मालूम होगा, झाररवंड के खूंटी थाना में बीस लोगों के खिलाफ भारतीय दंड संहिता की धारा 121/121 ए/124ए एवं आईटी एक्ट की धारा 66ए/66 एफ के तहत देशद्रोह का एक मामला दर्ज किया गया है. इस संबंध में हम आपके समक्ष कुछ निवेदन करना चाहते हैं.

हम सब इस लोकतांत्रिक देश के नागरिक हैं और भारतीय संविधान का आदर करते हैं. लेकिन हम यह भी मानते हैं कि सामान्य नागरिक संविधान के कानूनी प्रावधानों से जिस तरह से बंधा है, उसी तरह खुद को जनता का सेवक पुलिस और प्रशासन भी, और हमें लगता है कि इस मामले में खूंटी पुलिस-प्रशासन ने खुद को संविधान से ऊपर समझकर काम किया है और 20 लोगों पर इस तरह के अभियोग और धाराएं लगा दी गयीं, मानो वे सभी किसी एक संगठन या गिरोह के सदस्य हों. जबकि हकीकत यह है कि उनमें अलग-अलग पेशे केलोग हैं. कुछ सरकारी सेवक भी हैं, कुछ बैंककर्मी, कुछ पत्रकार- लेखक, कुछ समाजकर्मी. मुख्य रूप से आरोप यह है कि इनमें से अधिकतर लोगों ने सोशल मीडिया पर लिखकर संविधान की गलत व्याख्या की, भ्रामक बातें फैलायीं और खूंटी में लोगों को देशद्रोह के लिए उकसाया, जिस क्रम में 26 जून 2018 को खूंटी में आंदोलनरत आदिवासियों ने सांसद कड़िया मुंडा के सुरक्षागार्डों का अपहरण किया. इस संबंध में हम विनम्रतापूर्वक कहना चाहते हैं कि माननीय सर्वोच्च न्यायालय ने आईटी एक्ट की धारा 66ए/ 66 एफ को दो साल पूर्व ही असंवैधानिक घोषित करते हुए निरस्त कर दिया है. बावजूद इसके खूंटी थाना प्रभारी ने उस धारा का प्रयोग किया जो हमारे हिसाब से असंवैधानिक कदम है, साथ ही माननीय उच्चतम न्यायालय की अवमानना भी. फेसबुक/सोशल मीडिया का इस्तेमाल नकारात्मक कार्यों के लिए नहीं होना चाहिए और गैरजिम्मेदाराना लेखन के लिए उचित कार्रवाई भी होनी चाहिए, लेकिन महोदय, उसके लिए किसी को देशद्रोही करार देना कानून का दुरुपयोग और संविधान प्रदत्त अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता को सीमित करने का प्रयास है.

हम आपको विश्वास दिलाते हैं कि लोकतंत्र और शांतिमयता के प्रति हमारी असंदिग्ध निष्ठा है और हम ऐसा कोई काम न करते हैं, न करेंगे, जो संविधान के विरुद्ध हो और देश व समाज के लिए अहितकारी हो.

अंत में आपसे अनुरोध है कि आप खूंटी थाना द्वारा दर्ज एफआईआर और हमारी आपत्तियों को स्वयं अवलोकन करें और पुलिस प्रशासन को उक्त प्राथमिकी को निरस्त करने का निर्देश दें.

भवदीय,

दिल्ली सॉलिडेरिटी ग्रुप

दिल्ली जेएवाईएस (दिल्ली जयस)

दिल्ली आदिवासी यूथ नेटवर्क

जनमुक्ति संघर्ष वाहिनी

अन्य नागरिकगण

 

Related Articles

Back to top button